14 अगस्त 2026
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बालाघाट में 19 बच्चों की मौत: दूषित पानी और संक्रमण का आरोप, उमंग सिंघार ने घेरी सरकार

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बालाघाट में 19 बच्चों की मौत: दूषित पानी और संक्रमण का आरोप, उमंग सिंघार ने घेरी सरकार

सारांश

बालाघाट के बैगा आदिवासी गाँवों में दूषित पानी और संक्रमण से कथित तौर पर 19 बच्चों की मौत — और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का आरोप है कि प्रशासन आँकड़े छुपा रहा है। स्वास्थ्य सेवाओं की पुरानी कमी और कुपोषण के बीच यह त्रासदी मध्यप्रदेश के आदिवासी क्षेत्रों की उपेक्षा को फिर उजागर करती है।

मुख्य बातें

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 14 अगस्त 2026 को बालाघाट के प्रभावित गाँवों का दौरा किया।
कथित तौर पर दूषित पानी और संक्रमण से 19 बच्चों की मौत हुई; प्रशासन ने आधिकारिक आँकड़ों की पुष्टि नहीं की।
प्रभावित गाँव — कुण्डेकसा , बोनदारी और कोरका — बैगा आदिवासी बहुल क्षेत्र में हैं।
सिंघार ने BJP सरकार पर आँकड़े छुपाने और प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाया।
माँग: तत्काल स्वास्थ्य जाँच, निःशुल्क इलाज, स्वच्छ पेयजल और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई।

मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 14 अगस्त 2026 को बालाघाट जिले के बीमारी प्रभावित गाँवों का दौरा कर आरोप लगाया कि क्षेत्र में दूषित पानी पीने और संक्रमण फैलने के कारण अब तक 19 बच्चों की मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन वास्तविक आँकड़े छुपाने की कोशिश कर रहा है।

प्रभावित गाँवों में दौरा

सिंघार ने शुक्रवार को कुण्डेकसा, बोनदारी और कोरका गाँवों का दौरा किया और अस्पताल में भर्ती बीमार बच्चों से मुलाकात की। उन्होंने पीड़ित परिजनों से भी बात की और अस्पताल में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लिया। ये तीनों गाँव बैगा आदिवासी बहुल क्षेत्र में स्थित हैं, जहाँ पहले से ही स्वास्थ्य सेवाओं की भारी कमी है।

मुख्य आरोप और माँगें

स्थानीय ग्रामीणों के बयानों का हवाला देते हुए सिंघार ने कहा कि पिछले कई दिनों से क्षेत्र में दूषित पानी और संक्रमण के कारण बीमारी फैली हुई है। उनके अनुसार, आसपास के गाँवों में 19 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि प्रशासन इन मौतों के वास्तविक आँकड़े सार्वजनिक करने से बच रहा है। उन्होंने सरकार से माँग की कि प्रभावित क्षेत्र के प्रत्येक व्यक्ति — विशेषकर बच्चों — की तत्काल स्वास्थ्य जाँच कराई जाए।

सिंघार ने यह भी माँग की कि बीमार बच्चों को निःशुल्क इलाज, पर्याप्त पोषण और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाए। इसके साथ ही पीड़ित परिवारों को उचित आर्थिक सहायता दी जाए और प्रशासनिक लापरवाही की निष्पक्ष जाँच कर दोषी अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई हो।

सरकार पर राजनीतिक हमला

नेता प्रतिपक्ष ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि बैगा आदिवासी बहुल इलाकों में 19 मासूम बच्चों की जान गई, लेकिन सरकार उन मौतों के आँकड़े छुपाने में लगी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री उस दिन तिरंगा यात्रा में व्यस्त थे, जबकि आदिवासी परिवारों के आँसू पोंछने और बच्चों की जान बचाने की ओर ध्यान नहीं दिया गया।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल जिलों में कुपोषण और स्वास्थ्य सेवाओं की अनुपलब्धता पहले से चिंता का विषय रही है। बैगा जनजाति विशेष रूप से संवेदनशील मानी जाती है और इन गाँवों में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था दशकों से अधूरी बताई जाती है। कुपोषण की आशंका के बीच दूषित पानी का संयोजन बच्चों के लिए विशेष रूप से घातक हो सकता है, जैसा कि विशेषज्ञ लंबे समय से चेताते आए हैं।

क्या होगा आगे

सिंघार ने स्पष्ट किया कि वे इस मामले को विधानसभा में भी उठाएँगे। प्रशासन की ओर से अभी तक मौतों की आधिकारिक संख्या की पुष्टि नहीं हुई है। स्वतंत्र स्वास्थ्य जाँच और पेयजल परीक्षण की माँग ज़ोर पकड़ रही है। इस मामले में सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया और जाँच की दिशा आने वाले दिनों में तस्वीर स्पष्ट करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अब तक प्रशासन ने 19 मौतों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की — यह अंतर खुद एक बड़ा सवाल है। मध्यप्रदेश के आदिवासी जिलों में दूषित पानी और कुपोषण की समस्या नई नहीं है; यह उस दीर्घकालिक उपेक्षा का नतीजा है जो सरकारें बदलने के बावजूद नहीं बदली। असली जाँच यह होनी चाहिए कि क्या ये मौतें रोकी जा सकती थीं — और यदि हाँ, तो जवाबदेही किसकी है।
RashtraPress
14 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बालाघाट में बच्चों की मौत का कारण क्या बताया जा रहा है?
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने स्थानीय ग्रामीणों के बयानों के हवाले से कहा है कि दूषित पानी पीने और संक्रमण फैलने के कारण बालाघाट के आसपास के गाँवों में 19 बच्चों की मौत हुई है। हालाँकि प्रशासन ने अभी तक इन आँकड़ों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
कौन-से गाँव प्रभावित हैं?
बालाघाट जिले के कुण्डेकसा, बोनदारी और कोरका गाँव बीमारी से प्रभावित बताए जा रहे हैं। ये तीनों गाँव बैगा आदिवासी बहुल क्षेत्र में स्थित हैं जहाँ स्वास्थ्य सेवाओं की पहले से कमी है।
उमंग सिंघार ने सरकार से क्या माँगें की हैं?
सिंघार ने माँग की है कि प्रभावित क्षेत्र के सभी लोगों — विशेषकर बच्चों — की तत्काल स्वास्थ्य जाँच हो, बीमारों को निःशुल्क इलाज और स्वच्छ पेयजल मिले, पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद दी जाए, और प्रशासनिक लापरवाही की निष्पक्ष जाँच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो।
प्रशासन पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया है कि स्थानीय प्रशासन मौतों के वास्तविक आँकड़े सार्वजनिक नहीं कर रहा और उन्हें छुपाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने इसे प्रशासनिक लापरवाही करार देते हुए निष्पक्ष जाँच की माँग की है।
बैगा आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य संकट क्यों गहरा है?
बैगा जनजाति मध्यप्रदेश की विशेष रूप से संवेदनशील जनजातियों में शामिल है। इन क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल, पोषण और स्वास्थ्य सेवाओं की दीर्घकालिक कमी है, जिससे संक्रमण और कुपोषण का खतरा अधिक रहता है।
राष्ट्र प्रेस
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