क्या इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद उमंग सिंघार ने सरकार का घेराव किया?
सारांश
Key Takeaways
- इंदौर में दूषित पानी पीने से मौतें हुई हैं।
- सरकारी संस्थानों में दूषित पानी की आपूर्ति हो रही है।
- जल शक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट चिंताजनक है।
- बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए साफ पानी उपलब्ध नहीं है।
- राज्य सरकार को इस मुद्दे पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
भोपाल, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश की व्यापारिक नगरी इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के बाद विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने जल शक्ति मंत्रालय की रिपोर्ट का हवाला देते हुए यह दावा किया है कि राज्य के स्कूल, आंगनबाड़ी और अस्पतालों में भी दूषित पानी की आपूर्ति हो रही है।
सिंघार ने विधानसभा में एक बयान जारी कर कहा कि केवल शहरों में ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के स्कूलों, आंगनबाड़ियों और अस्पतालों में भी दूषित पानी दिया जा रहा है।
उन्होंने जल शक्ति मंत्रालय की 2024 की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश के सार्वजनिक संस्थानों में पीने के पानी की स्थिति चिंताजनक है। यह रिपोर्ट 52 जिलों के 1271 गांवों के स्कूलों, आंगनबाड़ियों और अस्पतालों के सर्वे के आधार पर तैयार की गई थी।
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के केवल 58.3 प्रतिशत सार्वजनिक संस्थानों (स्कूल, आंगनबाड़ी, अस्पताल आदि) में ही नल से पानी की सुविधा उपलब्ध है।
उन्होंने यह भी कहा कि पानी की गुणवत्ता की स्थिति सबसे गंभीर है। मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं की जांच में पता चला कि स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति सबसे खराब है। केवल 12 प्रतिशत अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में ही पानी मानकों पर खरा उतरता है, जबकि बाकी 88 प्रतिशत केंद्रों पर दूषित पानी पाया गया।
मध्य प्रदेश के केवल 64.6 प्रतिशत सार्वजनिक संस्थानों में पीने का पानी साफ है, जबकि 35.4 प्रतिशत में पानी दूषित पाया गया। आंगनबाड़ी केंद्रों में साफ पेयजल की बात करें तो केवल 63.6 प्रतिशत केंद्रों पर व्यवस्था उपलब्ध है, जबकि ये बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
सिंघार ने कहा कि राज्य सरकार ने घरों में नल कनेक्शन की संख्या दिखाने पर ज्यादा ध्यान दिया है, लेकिन स्कूलों, आंगनबाड़ियों और अस्पतालों में साफ पानी पहुंचाने में पूरी तरह नाकाम रही है, जबकि यही संस्थान बच्चों और मरीजों की सुरक्षा का काम करते हैं।