स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर संतों की चिंता, सनातन धर्म के लिए खतरे की घंटी
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अयोध्या, 23 फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। तपस्वी छावनी पीठ के प्रमुख जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर कहा कि इसे जल्द समाप्त करने के लिए दोनों पक्षों के बीच संवाद होना आवश्यक है। उन्होंने सभी से शांति और समझदारी से काम लेने की अपील की।
उन्होंने कहा, "देखिए, साधु-संतों और ब्राह्मणों में आपसी विवाद नहीं, प्रेम होना चाहिए। ये लोग समाज के लिए मार्गदर्शन का स्रोत होते हैं, जिनसे पूरा समाज उम्मीद रखता है, लेकिन आज दुर्भाग्य से ऐसा नहीं है।"
उन्होंने आगे कहा कि ईसाई धर्म ने कई साल पहले कई देशों को एकजुट कर लिया। इसी तरह 1500 साल पहले पैगंबर मुहम्मद के नाम पर 58 देश इस्लाम में शामिल हो गए, लेकिन सनातन धर्म, जो अरबों साल पुराना है, वह आज धीरे-धीरे खत्म हो रहा है।"
परमहंस आचार्य ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि पूरी दुनिया में एक भी ऐसा देश नहीं बचा, जहां पर हिंदू या सनातन बहुसंख्यक हों। उन्होंने कहा, "हमारे भारत में हालात चिंताजनक हैं। समाज इतना भटक गया है कि अब गाय, ब्राह्मण और संतों को खत्म करने की कोशिश हो रही है।"
उन्होंने कहा, "मैं चाहता हूं कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और आस्था ब्रह्मचारी एक-दूसरे से मिलें और इस मामले को खत्म करें। मुझे इससे बहुत दुख हुआ है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरकार विरोधी पार्टियों की कठपुतली बनकर रह गए हैं।"
परमहंस आचार्य ने गहरा दुख जताते हुए कहा कि अगर कोई गाय हत्या चाहता है, तो अखिलेश यादव जैसे नेता का साथ दे रहे हैं, लेकिन अखिलेश यादव ये नहीं कह सकते हैं कि वे गाय मारने के पक्ष में नहीं हैं, क्योंकि इससे उनका वोट खत्म होने लगेगा।
उन्होंने कहा, "अगर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आज अखिलेश यादव और कांग्रेस के साथ हैं, तो उनसे कहें कि वे स्पष्ट रूप से गाय हत्या के खिलाफ हैं। अगर वे ऐसा कह दें, तो भाजपा सरकार गाय संरक्षण के लिए मजबूत कानून ला सकती है, लेकिन वे ऐसा नहीं करेंगे।"
उन्होंने कहा, "मैं जगतगुरु परमहंस आचार्य हूं। मेरा दुख इस बात का नहीं है कि अविमुक्तेश्वरानंद जेल जा सकते हैं। मेरा दुख इस बात का है कि आज हर संत को शक की नजर से देखा जाएगा। आपका आपसी झगड़ा और घमंड पूरे सनातन समाज को भारी नुकसान पहुंचाएगा।"
महंत सीताराम दास ने कहा, "निश्चित रूप से प्रयागराज कोर्ट द्वारा पास्को एक्ट के तहत मुकदमा पंजीकृत करने का आदेश दिया गया है। हम लोग न्यायालय को मानने वाले हैं। उसका फैसला हमारे लिए सर्वमान्य है, लेकिन जिस तरह से किसी धर्माचार्य पर इस तरह के इल्जाम लगाया जा रहा है, यह अत्यंत निंदनीय है।"
महामंडलेश्वर कुलदीप दास ने कहा, "हम सभी लोग कोर्ट और संविधान को मानने वालों में से हैं। कोर्ट का जो भी फैसला आया है, वह सर्वमान्य है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर अगर केस सही है, तो इसकी जांच होनी चाहिए।"
नरसिंह दास जी महाराज ने कहा, "देखिए, सनातनी हिंदू धर्म में साधु समाज के चरित्र का बहुत बड़ा महत्व है। यदि इसका हल नहीं निकला, तो कोई भी फैसला लेना सही नहीं है।"