क्या पीएम मोदी और सीएम योगी से असंतुष्ट होना सनातन विरोधी होना है?: जगद्गुरु परमहंस आचार्य
सारांश
Key Takeaways
- जगद्गुरु परमहंस आचार्य का बयान राजनीति में तीखे आरोपों का प्रतीक है।
- सनातन धर्म को लेकर बढ़ती राजनीतिक बहस का महत्व।
- राजनीति के प्रभाव से धार्मिक विचारों का परिवर्तन।
सीधी, २४ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य पर निर्णायक तंज करते हुए कहा कि जो लोग देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व से संतुष्ट नहीं हैं, वे असल में सनातन विरोधी हैं।
जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर आरोप लगाया कि वे सनातनी विरोधी हैं और उन्हें शंकराचार्य नहीं कहा जाना चाहिए।
मध्य प्रदेश के सीधी जिले में आयोजित एक कार्यक्रम में जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने राष्ट्र प्रेस से बात करते हुए कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद इस समय राजनीति से प्रभावित हैं। उन्हें शंकराचार्य न कहने की आवश्यकता है। वे सनातन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। वे देख रहे हैं कि इंडी गठबंधन के लोग सनातन धर्म को डेंगू, मच्छर, मलेरिया और कोविड के समान बताते हैं। जब अखिलेश यादव ने उनके साथ बुरा व्यवहार किया था, तब भी वे उन्हीं के साथ बैठे रहे।
जगद्गुरु ने कहा कि जब पिछली बार दुर्घटना हुई थी, तो उन्होंने तुरंत योगी आदित्यनाथ से इस्तीफा देने की मांग की।
माघ मेले के दौरान अपेक्षित भीड़ से कहीं अधिक लोग पहुंचे। कुछ अधिकारियों की गलती पर कार्रवाई हुई, लेकिन वे सीधे योगी आदित्यनाथ पर आरोप लगाने लगे।
उन्होंने कहा कि जिस तरह से लोग जा रहे थे, उससे और भी लोग प्रभावित होते हैं। ऐसी स्थिति में कोई घटना हुई तो जिम्मेदारी कौन लेगा?
जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने कहा कि जो लोग पीएम मोदी और सीएम योगी से खुश नहीं हैं, या मध्य प्रदेश में मोहन यादव की सरकार से असंतुष्ट हैं, वे सनातन विरोधी हैं। वे या तो स्वयं विधर्मी हैं या फिर विधर्मियों के साथ हैं।
उन्होंने सभी धार्मिक लोगों से अपील की कि भाजपा के नेतृत्व में ही देश आगे बढ़ रहा है। भाजपा का विरोध करने वाली पार्टियां सनातन विरोधी हैं।