क्या रामभद्राचार्य के बयान का संतों ने समर्थन किया, भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की अपील?

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क्या रामभद्राचार्य के बयान का संतों ने समर्थन किया, भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की अपील?

सारांश

जगद्गुरु रामभद्राचार्य के बयान पर संतों का समर्थन, हिंदू राष्ट्र बनाने की आवश्यकता पर जोर। भविष्य में हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की गई है। क्या भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाना चाहिए? जानिए संतों का मत और उनके विचार।

मुख्य बातें

हिंदू राष्ट्र की आवश्यकता पर संतों का जोर भविष्य में हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर चिंताएं संसद में 470 सीटों की आवश्यकता संस्कृति और संस्कारों का महत्व सामाजिक समरसता की आवश्यकता

अयोध्या, 2 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। जगद्गुरु रामभद्राचार्य के बयान पर रविवार को सीताराम दास महाराज और परमहंस आचार्य ने समर्थन जताया। दोनों संतों ने देश को हिंदू राष्ट्र घोषित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कुछ कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में देश में हिंदुओं की सुरक्षा संदिग्ध हो सकती है।

सीताराम दास महाराज ने जगद्गुरु रामभद्राचार्य के बयान को सही बताते हुए कहा कि जब तक ऐसे संत हैं, सनातनियों द्वारा हिंदुओं को कोई क्षति नहीं पहुंचने दी जाएगी। जब तक ऐसे संत हैं, हमारा राष्ट्र सुरक्षित है। कई हिंदू महापुरुष भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए प्रयासरत हैं और यह तब तक संभव नहीं होगा, जब तक संसद में हमारी संख्या 470 सीटों तक नहीं पहुंचती।

उन्होंने आगे कहा कि महाराज ने जनता से अपील की कि आने वाले दिनों में इस संख्या को पूरा करने की दिशा में काम करें ताकि भारत हिंदू राष्ट्र बन सके। उन्होंने हमारी संस्कृति पर हो रहे हमलों को दुर्भाग्यपूर्ण बताया और बच्चों को संस्कृत भाषा व संस्कारों से जोड़ने की आवश्यकता बताई ताकि वे राष्ट्र के प्रति समर्पित रहें।

जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने भी जगद्गुरु रामभद्राचार्य के कथन का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार को भी उनके सुझावों पर विचार करना चाहिए और देश की बहुसंख्यक जनता को भी इस पर आत्म चिंतन करना चाहिए।

परमहंस आचार्य ने विभाजन के इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि मुसलमानों की मांगों के कारण विभाजन हुआ था और उस दौर में हिन्दुओं का बड़ा नरसंहार हुआ। विभाजन के बाद पाकिस्तान और बांग्लादेश बने और वहां के हिंदुओं को राष्ट्रीय पहचान व सुरक्षा नहीं मिली। आचार्य ने 1990 के दशक में कश्मीर में हुई घटनाओं का भी जिक्र करते हुए कहा कि वहां हिंदुओं के साथ बुरा व्यवहार हुआ और कई तरह के अत्याचार दिखाई दिए।

परमहंस आचार्य ने चेतावनी देते हुए आगे कहा कि यदि भारत को तत्काल हिंदू राष्ट्र घोषित नहीं किया गया तो अगले 50 वर्षों में देश के हिंदुओं के साथ उसी तरह की स्थिति बन सकती है, जैसी कुछ स्थानों पर देखी गई है। देश को बचाना है तो भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करना होगा, नहीं तो इसका अंजाम बुरा होगा।

गौरतलब है कि जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा था कि संसद में जब तक 470 सीटें नहीं होंगी तब तक देश हिंदू राष्ट्र नहीं बन सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि संतों के विचारों में एक निश्चित तर्क है, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इस विषय पर व्यापक चर्चा हो। समाज की विविधता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, हर कोण से विचार करना ज़रूरी है।
RashtraPress
17 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या रामभद्राचार्य का बयान नए विचार हैं?
हां, यह बयान देश में हिंदू राष्ट्र की आवश्यकता को लेकर नए विचार प्रस्तुत करता है।
संतों का समर्थन क्यों महत्वपूर्ण है?
संतों का समर्थन धार्मिक और सामाजिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है क्योंकि वे समाज में एक प्रभावशाली भूमिका निभाते हैं।
क्या भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करना संभव है?
यह एक विवादास्पद मुद्दा है और इसके लिए संवैधानिक और सामाजिक सहमति की आवश्यकता है।
राष्ट्र प्रेस
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