12 अगस्त 2026
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बालाघाट के बिरसा में 11 आदिवासी बच्चों की मौत: दिग्विजय सिंह ने CM यादव को लिखा पत्र, राज्य जांच और ₹10 लाख मुआवज़े की मांग

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बालाघाट के बिरसा में 11 आदिवासी बच्चों की मौत: दिग्विजय सिंह ने CM यादव को लिखा पत्र, राज्य जांच और ₹10 लाख मुआवज़े की मांग

सारांश

बालाघाट के बिरसा विकासखंड में एक सप्ताह में 11 आदिवासी बच्चों की मौत और 100 से अधिक का अस्पताल में भर्ती होना — यह महज़ एक स्वास्थ्य संकट नहीं, बल्कि ₹30,000 करोड़ की 'हर घर नल से जल' योजना की ज़मीनी विफलता का कड़वा सच है। दिग्विजय सिंह ने CM यादव को पत्र लिखकर राज्य जाँच और तत्काल राहत की माँग की है।

मुख्य बातें

मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के बिरसा विकासखंड में विगत एक सप्ताह में दूषित पानी और संक्रमण से 11 आदिवासी बच्चों की मौत का आरोप; जिला प्रशासन ने 7 मौतों की पुष्टि की।
बालाघाट जिला चिकित्सालय में 100 से अधिक बच्चे भर्ती; 40-50 बच्चे अत्यंत गंभीर हालत में।
पूर्व CM दिग्विजय सिंह ने 12 अगस्त को CM मोहन यादव को पत्र लिखकर राज्य स्तरीय जाँच और दोषियों पर कार्रवाई की माँग की।
प्रत्येक मृत बच्चे के परिवार को ₹10 लाख मुख्यमंत्री सहायता कोष से देने, गंभीर बच्चों को एयरलिफ्ट कर नागपुर/रायपुर/भोपाल भेजने की माँग।
सरकार पर आरोप — ₹30,000 करोड़ की 'हर घर नल से जल' योजना के बावजूद बिरसा में दूषित जल आपूर्ति जारी।
प्रभावित गाँव — बोंदारी , कुंडेकसा , कोरका — जिला मुख्यालय से करीब 100 किमी दूर।

वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने 12 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर बालाघाट जिले के आदिवासी विकासखंड बिरसा में दूषित पानी और संक्रमण जनित बीमारियों से 11 आदिवासी बच्चों की मौत पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। जिला प्रशासन ने अब तक सात बच्चों की मृत्यु की आधिकारिक पुष्टि की है, जबकि दिग्विजय सिंह का आरोप है कि चार और बच्चों की मृत्यु की जानकारी छुपाई जा रही है।

मृत्यु का विवरण और प्रभावित गाँव

पत्र के अनुसार, आदिवासी नेता शुभम उईके के हवाले से दिग्विजय सिंह ने बताया कि विगत एक सप्ताह में बोंदारी, कुंडेकसा और कोरका से लगे टोले-मजरों में दहशत का माहौल है। बोंदारी गाँव में मजदूरी करने वाले समारू धुर्वे के दो बच्चे — साहिल धुर्वे और नामिन धुर्वे — निमोनिया से तड़पते हुए काल के गाल में समा गए। इसके अलावा प्रीति मरकाम, अरविंद धुर्वे (ग्राम कुंडेकसा), सचिन मरकाम (ग्राम बोंदारी), पूजा धुर्वे और रूपलाल धुर्वे (ग्राम बोंदारी) की भी तेज बुखार से मृत्यु हुई बताई गई है। ये सभी गाँव जिला मुख्यालय बालाघाट से करीब 100 किमी दूर हैं।

अस्पताल में भर्ती बच्चों की स्थिति

बालाघाट जिला चिकित्सालय का बाल-वार्ड बीमार बच्चों से पूरी तरह भर चुका है। अब तक 100 से अधिक बच्चों को भर्ती कराया जा चुका है, जिनमें से 40 से 50 बच्चे जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे हैं। पिछले दस दिनों से बिरसा विकासखंड के अनेक गाँवों में हर दूसरे घर में बच्चे गंभीर बुखार, मलेरिया, निमोनिया, सर्दी-खाँसी और चर्म रोग से पीड़ित हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार 6 अगस्त से 'जनविश्वास अभियान' चला रही है।

सरकार पर लापरवाही का आरोप

दिग्विजय सिंह ने पत्र में तीखा सवाल उठाया कि एक ओर सरकार 'हर घर नल से जल' के नाम पर ₹30,000 करोड़ खर्च करने का दावा करती है, वहीं बिरसा की नल-जल परियोजना या तो बिगड़ी हुई है या दूषित जल स्रोतों से जुड़ी है। उन्होंने इसे विभागीय लापरवाही का सीधा परिणाम बताते हुए कहा कि विश्व आदिवासी दिवस मनाने की औपचारिकता के दो दिन बाद ही विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा आदिवासी परिवारों पर यह संकट टूटना सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है। गौरतलब है कि बैगा जनजाति को संविधान के तहत विशेष संरक्षण प्राप्त है।

विधायकों की प्रतिक्रिया

बिरसा के विधायक संजय उइके ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर बच्चों को शीघ्र उपचार हेतु जिला चिकित्सालय भेजा है। वहीं बालाघाट विधायक अनुभा मुंजारे ने बीमार बच्चों से मिलकर सिविल सर्जन से उचित इलाज सुनिश्चित करने की बात की है।

दिग्विजय सिंह की माँगें और आगे की राह

दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री से माँग की है कि इस प्रकोप की राज्य स्तरीय जाँच कराई जाए और दोषी अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई हो। उन्होंने यह भी माँग की है कि राज्य के स्वास्थ्य मंत्री और प्रमुख सचिव चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ प्रभावित गाँवों का दौरा कर मेडिकल कैम्प लगाएँ। प्रत्येक मृत बच्चे के परिवार को मुख्यमंत्री सहायता कोष से ₹10 लाख की राहत राशि दी जाए। गंभीर रूप से बीमार बच्चों को एयरलिफ्ट कर नागपुर, रायपुर या भोपाल के अस्पतालों में भर्ती कराया जाए और सम्पूर्ण इलाज का खर्च राज्य सरकार वहन करे। यह देखना होगा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव इस पत्र पर कितनी तेज़ी से प्रतिक्रिया देते हैं और क्या राज्य स्तरीय जाँच वास्तव में शुरू होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और हर बार जाँच के आश्वासन दिए जाते हैं। ₹30,000 करोड़ की 'हर घर नल से जल' योजना का दावा और बिरसा जैसे विकासखंड में दूषित जल से बच्चों की मौत — यह विरोधाभास सिर्फ क्रियान्वयन की विफलता नहीं, बल्कि जवाबदेही तंत्र की अनुपस्थिति को उजागर करता है। जिला प्रशासन द्वारा चार मौतों की जानकारी छुपाने का आरोप — अगर सिद्ध हुआ — तो यह महज़ लापरवाही नहीं, बल्कि आपराधिक उदासीनता की श्रेणी में आता है। असली परीक्षा यह है कि राज्य सरकार इस पत्र को राजनीतिक आरोप मानकर खारिज करती है या संवैधानिक रूप से संरक्षित बैगा जनजाति के बच्चों की जान को प्राथमिकता देती है।
RashtraPress
12 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बालाघाट के बिरसा में आदिवासी बच्चों की मौत कैसे हुई?
बिरसा विकासखंड में दूषित पानी और संक्रमण से फैली बीमारियों — मुख्यतः मलेरिया और निमोनिया — के कारण एक सप्ताह में 11 आदिवासी बच्चों की मौत का आरोप है। जिला प्रशासन ने सात मौतों की पुष्टि की है।
दिग्विजय सिंह ने CM मोहन यादव से क्या माँगें की हैं?
दिग्विजय सिंह ने राज्य स्तरीय जाँच, दोषी अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई, प्रत्येक मृत बच्चे के परिवार को ₹10 लाख मुआवज़ा, गंभीर बच्चों को एयरलिफ्ट कर नागपुर/रायपुर/भोपाल में भर्ती कराने और स्वास्थ्य मंत्री की प्रभावित गाँवों में तत्काल मेडिकल कैम्प की माँग की है।
बिरसा विकासखंड में कितने बच्चे अस्पताल में भर्ती हैं?
बालाघाट जिला चिकित्सालय में अब तक 100 से अधिक बच्चे भर्ती हो चुके हैं, जिनमें से 40 से 50 बच्चे अत्यंत गंभीर स्थिति में जीवन और मृत्यु के बीच हैं।
'हर घर नल से जल' योजना और इस संकट का क्या संबंध है?
दिग्विजय सिंह ने आरोप लगाया है कि सरकार ₹30,000 करोड़ खर्च करने का दावा करती है, लेकिन बिरसा में नल-जल परियोजना या तो बिगड़ी हुई है या दूषित जल स्रोतों से जुड़ी है, जो इस संक्रमण का प्रमुख कारण है।
बिरसा के कौन-से गाँव सबसे अधिक प्रभावित हैं?
बोंदारी, कुंडेकसा और कोरका से लगे टोले-मजरे सबसे अधिक प्रभावित हैं। ये गाँव जिला मुख्यालय बालाघाट से करीब 100 किमी दूर हैं, जिससे त्वरित चिकित्सा सहायता पहुँचाने में कठिनाई आई।
राष्ट्र प्रेस
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