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बालाघाट के तीन आदिवासी गांवों में 3,811 लोगों की जांच; कांग्रेस का आरोप — 8 नहीं, 19 बच्चों की मौत

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बालाघाट के तीन आदिवासी गांवों में 3,811 लोगों की जांच; कांग्रेस का आरोप — 8 नहीं, 19 बच्चों की मौत

सारांश

मध्य प्रदेश के बालाघाट में बैगा आदिवासी गांवों में 8 बच्चों की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने 3,811 लोगों की जांच की और 798 मामले दर्ज किए। कांग्रेस का दावा है कि मृतकों की संख्या 19 है और सरकार तथ्य छिपा रही है। बीमारी का कारण अभी अस्पष्ट है।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के कुंडेक्सा, कोरका और बोंडारी गांवों में 3,811 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई।
सर्वे में 798 मामले दर्ज — 320 मलेरिया , 155 दस्त , 146 रैश के साथ बुखार , 177 त्वचा रोग ।
स्वास्थ्य विभाग ने 8 बच्चों की मौत की पुष्टि की; 28 मरीज अभी भी अस्पताल में भर्ती।
विपक्ष के नेता उमंग सिंघार का दावा — मृत बच्चों की संख्या 19 , सरकार पर आंकड़े छिपाने का आरोप।
बीमारियों का सटीक कारण अभी अज्ञात; रक्त और जल के नमूने जांच के लिए भेजे गए।

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैगा-बहुल आदिवासी गांवों में बच्चों की मौत को लेकर उठे विवाद के बीच राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने बिरसा ब्लॉक के तीन गांवों — कुंडेक्सा, कोरका और बोंडारी — में 3,811 लोगों की घर-घर जाकर स्वास्थ्य जांच पूरी की है। अधिकारियों ने आठ बच्चों की मौत की पुष्टि की है, जबकि विपक्षी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) का आरोप है कि असली संख्या इससे कहीं अधिक है और सरकार तथ्य छिपा रही है।

स्वास्थ्य सर्वे में क्या सामने आया

तीनों गांवों में किए गए हेल्थ सर्वे में कुल 798 मामले दर्ज किए गए। रविवार, 24 अगस्त तक की सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, इनमें 320 लोग मलेरिया, 155 दस्त, 146 रैशेज के साथ बुखार और 177 त्वचा संबंधी बीमारियों से पीड़ित पाए गए।

पहचाने गए 798 मरीजों में से 569 का उपचार घर पर किया गया, जबकि 229 को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें से 201 ठीक होकर घर लौट चुके हैं और 28 का इलाज अभी भी जारी है। अधिकारियों ने बताया कि रविवार को 12 नए मरीज अस्पताल में भर्ती हुए और 5 को छुट्टी दी गई। सभी भर्ती मरीजों की स्थिति स्थिर बताई गई है।

बीमारियों का कारण अभी अस्पष्ट

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, बीमारियों का सटीक कारण अभी तक पक्के तौर पर स्थापित नहीं हो पाया है। मलेरिया जैसे बुखार, त्वचा संक्रमण और पोषण की कमी सहित कई तरह के लक्षण सामने आए हैं। आगे की जांच के लिए रक्त और जल के नमूने प्रयोगशाला में भेजे गए हैं। गांवों में निगरानी और उपचार का कार्य अनवरत जारी है।

राजनीतिक विवाद और कांग्रेस के आरोप

इस मामले ने तीखा राजनीतिक रंग ले लिया है। कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राज्य सरकार पर मौतों की वास्तविक संख्या छिपाने का आरोप लगाया है। विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने पिछले सप्ताह दावा किया था कि मरने वाले बच्चों की संख्या 19 है, जबकि सरकार केवल 8 मौतों की पुष्टि कर रही है। सिंघार ने सरकार पर आदिवासी समुदाय के प्रति लापरवाही का भी आरोप लगाया।

यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच पहले से ही एक संवेदनशील मुद्दा रही है। गौरतलब है कि बैगा जनजाति विशेष रूप से कमज़ोर आदिवासी समूहों (PVTG) में शामिल है।

सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई

राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है और कहा है कि सभी भर्ती मरीज खतरे से बाहर हैं। हेल्थ टीमें तीनों गांवों में सक्रिय हैं और जरूरत पड़ने पर तत्काल अस्पताल में भर्ती की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। प्रयोगशाला रिपोर्टें आने के बाद बीमारियों के मूल कारण की स्पष्ट तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

कुपोषण और त्वचा रोग एक साथ फैलना यह बताता है कि बुनियादी स्वास्थ्य ढांचा अभी भी इन क्षेत्रों तक प्रभावी रूप से नहीं पहुंचा है। मौतों की संख्या को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच का अंतर — 8 बनाम 19 — स्वतंत्र जांच की मांग को और पुख्ता करता है। जब तक प्रयोगशाला रिपोर्टें और निष्पक्ष ऑडिट सामने नहीं आते, जवाबदेही का यह सवाल अनुत्तरित रहेगा।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बालाघाट के आदिवासी गांवों में क्या हो रहा है?
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बिरसा ब्लॉक के तीन बैगा आदिवासी गांवों — कुंडेक्सा, कोरका और बोंडारी — में मलेरिया, दस्त और त्वचा रोग फैले हैं। स्वास्थ्य विभाग ने 3,811 लोगों की जांच की है और 8 बच्चों की मौत की पुष्टि की है।
कांग्रेस ने सरकार पर क्या आरोप लगाए हैं?
कांग्रेस और विपक्ष के नेता उमंग सिंघार का आरोप है कि मरने वाले बच्चों की संख्या सरकार द्वारा स्वीकृत 8 नहीं, बल्कि 19 है। उनका कहना है कि BJP सरकार वास्तविक मृत्यु संख्या छिपा रही है।
इन गांवों में कितने लोग बीमार पाए गए?
घर-घर सर्वे में 798 मामले दर्ज किए गए — 320 मलेरिया, 155 दस्त, 146 रैश के साथ बुखार और 177 त्वचा रोग के। 229 लोगों को अस्पताल में भर्ती किया गया, जिनमें से 201 ठीक होकर घर लौट चुके हैं।
बीमारियों का कारण क्या है?
बीमारियों का सटीक कारण अभी तक पक्के तौर पर स्थापित नहीं हुआ है। अधिकारियों ने मलेरिया, त्वचा संक्रमण और पोषण की कमी को संभावित कारण बताया है। रक्त और जल के नमूने प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजे गए हैं।
सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
राज्य स्वास्थ्य विभाग की टीमें तीनों गांवों में घर-घर जाकर जांच और इलाज कर रही हैं। 569 मरीजों का घर पर उपचार किया गया है और ज़रूरत पड़ने पर अस्पताल में भर्ती की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। अधिकारियों ने कहा है कि निगरानी और उपचार जारी रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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