बालाघाट के तीन आदिवासी गांवों में 3,811 लोगों की जांच; कांग्रेस का आरोप — 8 नहीं, 19 बच्चों की मौत
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैगा-बहुल आदिवासी गांवों में बच्चों की मौत को लेकर उठे विवाद के बीच राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने बिरसा ब्लॉक के तीन गांवों — कुंडेक्सा, कोरका और बोंडारी — में 3,811 लोगों की घर-घर जाकर स्वास्थ्य जांच पूरी की है। अधिकारियों ने आठ बच्चों की मौत की पुष्टि की है, जबकि विपक्षी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) का आरोप है कि असली संख्या इससे कहीं अधिक है और सरकार तथ्य छिपा रही है।
स्वास्थ्य सर्वे में क्या सामने आया
तीनों गांवों में किए गए हेल्थ सर्वे में कुल 798 मामले दर्ज किए गए। रविवार, 24 अगस्त तक की सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, इनमें 320 लोग मलेरिया, 155 दस्त, 146 रैशेज के साथ बुखार और 177 त्वचा संबंधी बीमारियों से पीड़ित पाए गए।
पहचाने गए 798 मरीजों में से 569 का उपचार घर पर किया गया, जबकि 229 को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें से 201 ठीक होकर घर लौट चुके हैं और 28 का इलाज अभी भी जारी है। अधिकारियों ने बताया कि रविवार को 12 नए मरीज अस्पताल में भर्ती हुए और 5 को छुट्टी दी गई। सभी भर्ती मरीजों की स्थिति स्थिर बताई गई है।
बीमारियों का कारण अभी अस्पष्ट
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, बीमारियों का सटीक कारण अभी तक पक्के तौर पर स्थापित नहीं हो पाया है। मलेरिया जैसे बुखार, त्वचा संक्रमण और पोषण की कमी सहित कई तरह के लक्षण सामने आए हैं। आगे की जांच के लिए रक्त और जल के नमूने प्रयोगशाला में भेजे गए हैं। गांवों में निगरानी और उपचार का कार्य अनवरत जारी है।
राजनीतिक विवाद और कांग्रेस के आरोप
इस मामले ने तीखा राजनीतिक रंग ले लिया है। कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राज्य सरकार पर मौतों की वास्तविक संख्या छिपाने का आरोप लगाया है। विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने पिछले सप्ताह दावा किया था कि मरने वाले बच्चों की संख्या 19 है, जबकि सरकार केवल 8 मौतों की पुष्टि कर रही है। सिंघार ने सरकार पर आदिवासी समुदाय के प्रति लापरवाही का भी आरोप लगाया।
यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश के आदिवासी बहुल इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुँच पहले से ही एक संवेदनशील मुद्दा रही है। गौरतलब है कि बैगा जनजाति विशेष रूप से कमज़ोर आदिवासी समूहों (PVTG) में शामिल है।
सरकार की प्रतिक्रिया और आगे की कार्रवाई
राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है और कहा है कि सभी भर्ती मरीज खतरे से बाहर हैं। हेल्थ टीमें तीनों गांवों में सक्रिय हैं और जरूरत पड़ने पर तत्काल अस्पताल में भर्ती की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। प्रयोगशाला रिपोर्टें आने के बाद बीमारियों के मूल कारण की स्पष्ट तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।