24 अगस्त 2026
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महिला आरक्षण पर फडणवीस का चिदंबरम को करारा जवाब: 'माता-बहनों का हक क्यों छीना?'

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महिला आरक्षण पर फडणवीस का चिदंबरम को करारा जवाब: 'माता-बहनों का हक क्यों छीना?'

सारांश

महिला आरक्षण के क्रियान्वयन को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। फडणवीस ने चिदंबरम के 'सेलेक्टिव मेमोरी' वाले तंज का जवाब देते हुए कांग्रेस पर 2026 में आरक्षण जल्दी लागू करने वाले विधेयक को संसद में हराने का आरोप लगाया।

मुख्य बातें

देवेंद्र फडणवीस ने 24 अगस्त 2026 को एक्स पर पी.
चिदंबरम के 'मानसिक थकान' वाले तंज का करारा जवाब दिया।
संविधान (106वाँ संशोधन) अधिनियम, 2023 में शर्त है कि महिला आरक्षण पहली जनगणना के बाद परिसीमन पूरा होने पर ही लागू होगा।
फडणवीस के अनुसार 2026 में सरकार ने 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कर 2029 से आरक्षण लागू करने का विधेयक लाई, जिसे कांग्रेस ने संसद में हराया।
फडणवीस ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि 2023 में समर्थन 'बहती गंगा में हाथ धोना' था, असली मौके पर पार्टी ने विरोध किया।
PM मोदी के नेतृत्व में 2029 के लोकसभा चुनाव तक महिला आरक्षण लागू करने का संकल्प दोहराया गया।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 24 अगस्त 2026 को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम पर तीखा पलटवार किया, जब चिदंबरम ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर फडणवीस के महिला आरक्षण संबंधी बयान को 'मानसिक थकान' का नतीजा बताया। यह विवाद महिला आरक्षण के क्रियान्वयन की समयसीमा और कांग्रेस की भूमिका को लेकर दोनों पक्षों के बीच उभरे तीखे मतभेदों को उजागर करता है।

विवाद की जड़: चिदंबरम का एक्स पोस्ट

चिदंबरम ने एक्स पर लिखा कि फडणवीस ने कथित तौर पर आरोप लगाया था कि राहुल गांधी मंच से महिला सशक्तीकरण की बातें करते हैं, लेकिन महिला आरक्षण विधेयक के समय उन्होंने और उनकी पार्टी ने इसका 'पुरजोर विरोध' किया। चिदंबरम ने इसे 'मानसिक थकान' से उपजा बयान बताते हुए याद दिलाया कि संविधान (106वाँ संशोधन) विधेयक, 2023 — जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम भी कहा जाता है — संसद के दोनों सदनों में कांग्रेस के पूर्ण समर्थन से पारित हुआ था।

फडणवीस का जवाब: 'सेलेक्टिव मेमोरी' पर कटाक्ष

फडणवीस ने एक्स पर ही प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, 'मैं भी सेलेक्टिव मेमोरी की कला सीखना चाहता हूँ।' उन्होंने स्पष्ट किया कि 106वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2023 में स्पष्ट शर्त है कि महिला आरक्षण का प्रावधान तभी लागू होगा, जब अधिनियम के बाद हुई पहली जनगणना के आधार पर परिसीमन (डिलिमिटेशन) का काम पूरा होगा। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण जनगणना में देरी हुई, जिससे परिसीमन और आरक्षण लागू होने की प्रक्रिया भी अटकी।

2026 का नया विधेयक और कांग्रेस का विरोध

फडणवीस ने आरोप लगाया कि 2026 में केंद्र सरकार ने 2011 की जनगणना के आँकड़ों के आधार पर परिसीमन संभव बनाने, लोकसभा में सीटें बढ़ाने और 2029 के आम चुनावों से पहले महिला आरक्षण लागू करने के लिए एक नया विधेयक लाई। उनके अनुसार, राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने संसद में इस प्रयास का विरोध किया और उसे पारित नहीं होने दिया, जिससे 2029 तक महिला आरक्षण लागू होने का रास्ता रुक गया

फडणवीस ने कांग्रेस की रणनीति पर तंज कसते हुए कहा कि 2023 में पार्टी ने 106वें संशोधन का समर्थन इसलिए किया क्योंकि एनडीए के पास पर्याप्त संख्या थी और विधेयक बिना कांग्रेस के भी पास हो जाता — 'तो बहती गंगा में हाथ धो लो।' लेकिन जब आरक्षण को जल्दी लागू करने का 'असली मौका' आया, तो 'कांग्रेस का असली रंग सामने आ गया।'

फडणवीस की चुनौती

फडणवीस ने अपनी पोस्ट के अंत में लिखा, 'हमारे नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण लागू करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।' उन्होंने सीधे सवाल दागा — 'इधर-उधर की बात न करो, यह बताओ हमारी माता-बहनों का हक क्यों छीना?' — जो इस पूरे विवाद का केंद्रीय राजनीतिक संदेश बन गया।

व्यापक राजनीतिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारियाँ राजनीतिक दलों की रणनीति को तेज़ी से आकार दे रही हैं। महिला मतदाताओं की बढ़ती निर्णायक भूमिका के मद्देनज़र आरक्षण का मुद्दा भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए अहम चुनावी हथियार बन चुका है। गौरतलब है कि परिसीमन की प्रक्रिया और जनगणना की तारीख अभी भी अनिश्चित है, जो आरक्षण की वास्तविक समयसीमा को और जटिल बनाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी से बचते हैं। 106वें संशोधन में जनगणना-परिसीमन की शर्त जानबूझकर रखी गई थी या यह तकनीकी अनिवार्यता थी — यह सवाल अनुत्तरित है। कोविड के कारण जनगणना की देरी एक तथ्य है, लेकिन 2026 के विधेयक का विरोध करने पर कांग्रेस के पास क्या तर्क था, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है। महिला मतदाताओं की बढ़ती ताकत को देखते हुए 2029 से पहले यह मुद्दा और तीखा होगा — और दोनों दल इसे चुनावी हथियार की तरह इस्तेमाल करते रहेंगे।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फडणवीस और चिदंबरम के बीच महिला आरक्षण पर विवाद क्या है?
चिदंबरम ने एक्स पर फडणवीस के बयान को 'मानसिक थकान' का नतीजा बताते हुए कहा कि कांग्रेस ने 2023 में महिला आरक्षण विधेयक का पूरा समर्थन किया था। फडणवीस ने जवाब दिया कि 2026 में आरक्षण जल्दी लागू करने के लिए लाए गए नए विधेयक को कांग्रेस ने संसद में हरा दिया।
संविधान (106वाँ संशोधन) अधिनियम, 2023 में महिला आरक्षण कब लागू होगा?
इस अधिनियम में स्पष्ट शर्त है कि महिला आरक्षण तभी लागू होगा जब अधिनियम के बाद हुई पहली जनगणना के आधार पर परिसीमन (डिलिमिटेशन) का काम पूरा हो जाए। कोविड-19 के कारण जनगणना में देरी हुई, जिससे यह प्रक्रिया अटकी हुई है।
2026 में सरकार कौन-सा नया विधेयक लाई और कांग्रेस ने क्यों विरोध किया?
फडणवीस के अनुसार, 2026 में सरकार ने 2011 की जनगणना के आँकड़ों के आधार पर परिसीमन संभव बनाने और 2029 के चुनावों से पहले महिला आरक्षण लागू करने के लिए एक नया विधेयक पेश किया। कांग्रेस ने इसे संसद में हरा दिया; हालाँकि, कांग्रेस की ओर से इस विरोध का विस्तृत आधिकारिक कारण अभी सार्वजनिक नहीं हुआ है।
क्या 2029 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण लागू हो सकेगा?
फडणवीस ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री मोदी 2029 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण लागू करने में 'कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।' हालाँकि, जनगणना और परिसीमन की समयसीमा अभी अनिश्चित है, जिससे 2029 तक क्रियान्वयन की संभावना पर सवाल बने हुए हैं।
2023 में कांग्रेस ने महिला आरक्षण विधेयक का समर्थन किया था, तो अब विवाद क्यों?
2023 में कांग्रेस ने 106वें संशोधन को संसद के दोनों सदनों में समर्थन दिया था। विवाद 2026 के उस नए विधेयक को लेकर है जो 2029 से पहले आरक्षण लागू करने का रास्ता खोलता। फडणवीस का आरोप है कि कांग्रेस ने 2023 में समर्थन सिर्फ इसलिए दिया क्योंकि विधेयक उनके बिना भी पास हो जाता, लेकिन असली मौके पर विरोध किया।
राष्ट्र प्रेस
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