महिला आरक्षण पर फडणवीस का चिदंबरम को करारा जवाब: 'माता-बहनों का हक क्यों छीना?'
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 24 अगस्त 2026 को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम पर तीखा पलटवार किया, जब चिदंबरम ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर फडणवीस के महिला आरक्षण संबंधी बयान को 'मानसिक थकान' का नतीजा बताया। यह विवाद महिला आरक्षण के क्रियान्वयन की समयसीमा और कांग्रेस की भूमिका को लेकर दोनों पक्षों के बीच उभरे तीखे मतभेदों को उजागर करता है।
विवाद की जड़: चिदंबरम का एक्स पोस्ट
चिदंबरम ने एक्स पर लिखा कि फडणवीस ने कथित तौर पर आरोप लगाया था कि राहुल गांधी मंच से महिला सशक्तीकरण की बातें करते हैं, लेकिन महिला आरक्षण विधेयक के समय उन्होंने और उनकी पार्टी ने इसका 'पुरजोर विरोध' किया। चिदंबरम ने इसे 'मानसिक थकान' से उपजा बयान बताते हुए याद दिलाया कि संविधान (106वाँ संशोधन) विधेयक, 2023 — जिसे नारी शक्ति वंदन अधिनियम भी कहा जाता है — संसद के दोनों सदनों में कांग्रेस के पूर्ण समर्थन से पारित हुआ था।
फडणवीस का जवाब: 'सेलेक्टिव मेमोरी' पर कटाक्ष
फडणवीस ने एक्स पर ही प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, 'मैं भी सेलेक्टिव मेमोरी की कला सीखना चाहता हूँ।' उन्होंने स्पष्ट किया कि 106वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2023 में स्पष्ट शर्त है कि महिला आरक्षण का प्रावधान तभी लागू होगा, जब अधिनियम के बाद हुई पहली जनगणना के आधार पर परिसीमन (डिलिमिटेशन) का काम पूरा होगा। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण जनगणना में देरी हुई, जिससे परिसीमन और आरक्षण लागू होने की प्रक्रिया भी अटकी।
2026 का नया विधेयक और कांग्रेस का विरोध
फडणवीस ने आरोप लगाया कि 2026 में केंद्र सरकार ने 2011 की जनगणना के आँकड़ों के आधार पर परिसीमन संभव बनाने, लोकसभा में सीटें बढ़ाने और 2029 के आम चुनावों से पहले महिला आरक्षण लागू करने के लिए एक नया विधेयक लाई। उनके अनुसार, राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस ने संसद में इस प्रयास का विरोध किया और उसे पारित नहीं होने दिया, जिससे 2029 तक महिला आरक्षण लागू होने का रास्ता रुक गया।
फडणवीस ने कांग्रेस की रणनीति पर तंज कसते हुए कहा कि 2023 में पार्टी ने 106वें संशोधन का समर्थन इसलिए किया क्योंकि एनडीए के पास पर्याप्त संख्या थी और विधेयक बिना कांग्रेस के भी पास हो जाता — 'तो बहती गंगा में हाथ धो लो।' लेकिन जब आरक्षण को जल्दी लागू करने का 'असली मौका' आया, तो 'कांग्रेस का असली रंग सामने आ गया।'
फडणवीस की चुनौती
फडणवीस ने अपनी पोस्ट के अंत में लिखा, 'हमारे नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण लागू करने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।' उन्होंने सीधे सवाल दागा — 'इधर-उधर की बात न करो, यह बताओ हमारी माता-बहनों का हक क्यों छीना?' — जो इस पूरे विवाद का केंद्रीय राजनीतिक संदेश बन गया।
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब 2029 के लोकसभा चुनाव की तैयारियाँ राजनीतिक दलों की रणनीति को तेज़ी से आकार दे रही हैं। महिला मतदाताओं की बढ़ती निर्णायक भूमिका के मद्देनज़र आरक्षण का मुद्दा भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए अहम चुनावी हथियार बन चुका है। गौरतलब है कि परिसीमन की प्रक्रिया और जनगणना की तारीख अभी भी अनिश्चित है, जो आरक्षण की वास्तविक समयसीमा को और जटिल बनाती है।