विपक्ष पर फडणवीस-शिंदे का हमला, 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' का पारित न होना शर्मनाक

Click to start listening
विपक्ष पर फडणवीस-शिंदे का हमला, 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' का पारित न होना शर्मनाक

सारांश

लोकसभा में 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' का पारित न होना महाराष्ट्र के सीएम और डिप्टी सीएम के लिए शर्मनाक है। वे इसके खिलाफ विपक्ष के रुख को कड़ा आलोचना करते हैं। जानिए इस मुद्दे पर उनका क्या कहना है।

Key Takeaways

  • नारी शक्ति वंदन अधिनियम का पारित न होना राजनीतिक विफलता है।
  • मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री ने विपक्ष पर गंभीर आरोप लगाए।
  • महिला सशक्तिकरण के लिए यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।
  • महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन का आह्वान किया गया है।
  • इस मुद्दे पर समाज के विभिन्न वर्गों की प्रतिक्रिया अपेक्षित है।

मुंबई, 17 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। लोकसभा में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का पारित न होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इसे शर्मनाक करार दिया है।

सीएम देवेंद्र फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा करते हुए कहा कि यह एक बड़ा अपमान है। उन्होंने कहा कि आज पूरे देश ने विपक्ष का असली चेहरा देखा है। उनके पास महिला सशक्तिकरण के लिए एक ऐतिहासिक अवसर था, लेकिन वे इससे चूक गए। उनके लिए महिलाओं का सशक्तिकरण केवल भाषणों तक सीमित है। उन्होंने अपनी नारी शक्ति के अधिकारों की जगह राजनीति को तरजीह दी। नारी शक्ति वंदन विधेयक के खिलाफ उनका विरोध यह दर्शाता है कि वे किसके हितों की रक्षा कर रहे हैं।

उन्होंने आगे कहा कि भारत की महिलाएं इसे देख रही हैं और वे इसे नहीं भूलेंगी। हमारे लिए महिला सशक्तिकरण का अर्थ केवल भाषण नहीं है, बल्कि यह हमारी प्रतिबद्धता है। हम कल से सड़कों पर उतरेंगे और अपनी नारी शक्ति को हर अधिकार और सम्मान दिलाने का प्रयास करेंगे।

कोलकाता में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि यह एक काला दिन है। प्रधानमंत्री मोदी ने लोकतंत्र में नारी शक्ति की हिस्सेदारी को सुनिश्चित किया था, लेकिन विपक्ष ने एकजुट होकर इसे पारित नहीं होने दिया। इसके परिणामस्वरूप संविधान में कोई संशोधन नहीं हो पाया। विपक्ष का महिला विरोधी चेहरा अब स्पष्ट हो गया है।

उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि ममता दीदी भी इसका विरोध कर रही हैं। यह निश्चित रूप से तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की महिलाओं के लिए एक संदेश है। कल से नारी शक्ति की लड़ाई शुरू होगी और तब तक जारी रहेगी, जब तक उन्हें महिला आरक्षण नहीं मिल जाता। उन्होंने राहुल गांधी के बयान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि विपक्ष के लोग ढोल नगाड़े बजाकर डांस कर रहे हैं जबकि उन्हें अपने अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि लोकसभा में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का नामंजूर होना अत्यधिक दुर्भाग्यपूर्ण है। कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने गरीब, आदिवासी, पिछड़े और अनुसूचित जातियों की माताओं और बहनों को संसद में आने से रोकने के लिए महिला-विरोधी रुख अपनाया है। शिवसेना इसका कड़ा विरोध करती है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं को सम्मानित करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया था, लेकिन विरोधियों का पूर्वाग्रह आज स्पष्ट हो गया है। उनका असली चेहरा अब सबके सामने है। यह हमारे देश के इतिहास का एक काला दिन साबित होगा। अब आने वाले समय में हमारी बहनों का रुद्र रूप विरोधियों को देखने को मिलेगा।

सांसद मिलिंद देओरा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोकसभा में स्पष्ट आश्वासन दिए जाने के बावजूद विपक्ष ने ऐतिहासिक संविधान संशोधन का विरोध करने का फैसला किया, जबकि इस संशोधन के तहत 2029 तक लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया जाना था। यह बेहद शर्मनाक है।

Point of View

जो कि नारी शक्ति के अधिकारों को प्रभावित करता है। यह मुद्दा समाज के हर वर्ग के लिए महत्वपूर्ण है।
NationPress
17/04/2026

Frequently Asked Questions

‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ क्या है?
यह एक विधेयक है जो महिलाओं को संसद में 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करता है।
इस अधिनियम का पारित न होना क्यों महत्वपूर्ण है?
इसका पारित न होना महिला सशक्तिकरण के प्रयासों को कमजोर करता है।
मुख्यमंत्री ने इस पर क्या कहा?
मुख्यमंत्री ने इसे शर्मनाक बताते हुए विपक्ष की नीयत पर सवाल उठाए।
उपमुख्यमंत्री का क्या कहना है?
उपमुख्यमंत्री ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया और महिला-विरोधी रुख को नकारा।
महिला आरक्षण से क्या लाभ होगा?
महिला आरक्षण से महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और उनके अधिकारों की रक्षा होगी।
Nation Press