झारखंड स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने रांची कोर्ट में किया सरेंडर, योग शिक्षिका टिप्पणी मामले में मिली जमानत
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री और जामताड़ा से कांग्रेस विधायक इरफान अंसारी ने सोमवार, 25 अगस्त 2025 को रांची स्थित एमपी-एमएलए कोर्ट में सरेंडर किया। यह मामला योग शिक्षिका राफिया नाज के पहनावे को लेकर एक निजी समाचार चैनल पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा है। अदालत ने उन्हें ₹10,000-₹10,000 के दो जमानतदारों के आधार पर जमानत प्रदान कर दी।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद 19 अगस्त 2020 का है, जब रांची के डोरंडा निवासी योग शिक्षिका राफिया नाज ने सिविल कोर्ट में अंसारी के विरुद्ध शिकायतवाद दर्ज कराया था। आरोप है कि मंत्री ने एक निजी टेलीविजन चैनल पर उनके पहनावे को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिससे उनकी सामाजिक छवि को नुकसान पहुँचा और धार्मिक भावनाएँ आहत हुईं।
शिकायत में अंसारी पर स्त्री लज्जा भंग करने, भीड़ को हिंसा के लिए उकसाने, धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने और जानबूझकर अपमानित करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जाँच और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 500 और 504 के तहत संज्ञान लेते हुए उन्हें समन जारी किया था।
व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट की माँग खारिज
इससे पहले मंत्री की ओर से अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट के लिए याचिका दायर की गई थी। जुलाई 2025 में एमपी-एमएलए मामलों के विशेष न्यायिक दंडाधिकारी सार्थक शर्मा ने यह याचिका खारिज कर दी। बचाव पक्ष ने मंत्री की व्यस्तताओं का हवाला दिया था, लेकिन अदालत ने स्पष्ट किया कि सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत उपस्थिति अनिवार्य है।
शिकायतकर्ता राफिया नाज के अधिवक्ता जितेंद्र कुमार वर्मा ने छूट की माँग का विरोध करते हुए तर्क दिया था कि मंत्री का मुख्यालय और अदालत दोनों रांची में ही स्थित हैं, इसलिए व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट का कोई औचित्य नहीं बनता।
कोर्ट में सरेंडर और मंत्री का बयान
सोमवार को अदालत में उपस्थित होने के बाद इरफान अंसारी ने कहा कि वे सभी अदालतों का सम्मान करते हैं। अदालत ने जमानत मंजूर करते हुए मामले की आगे की सुनवाई के लिए तारीख निर्धारित की है।
आगे क्या होगा
जमानत मिलने के बाद अब मामले में नियमित सुनवाई जारी रहेगी। यह मामला झारखंड की राजनीति में उस समय चर्चा का विषय बना है जब राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन पहले से कई मोर्चों पर दबाव में है। गौरतलब है कि यह पाँच वर्ष पुराना मामला अब कोर्ट में सक्रिय चरण में प्रवेश कर चुका है।