कांग्रेस ने सीएम फडणवीस को महिला आरक्षण पर बहस के लिए चुनौती दी

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कांग्रेस ने सीएम फडणवीस को महिला आरक्षण पर बहस के लिए चुनौती दी

सारांश

कांग्रेस कार्यसमिति की सदस्य प्रणीति शिंदे ने सीएम फडणवीस की महिला आरक्षण पर बहस की चुनौती स्वीकार की। शिंदे ने पीएम मोदी को भी इस बहस में शामिल होने की मांग की है। क्या भाजपा वाकई महिला आरक्षण के मुद्दे पर गंभीर है?

Key Takeaways

  • कांग्रेस ने मुख्यमंत्री को महिला आरक्षण पर बहस के लिए चुनौती दी।
  • प्रधानमंत्री मोदी की भागीदारी की मांग।
  • भाषण में भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए गए।
  • महिला आरक्षण विधेयक में जटिल शर्तें।
  • सरकार की मंशा पर सवाल उठाए गए।

मुंबई, 20 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। लैंगिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर चल रही राजनीतिक चर्चाओं के बीच, कांग्रेस कार्यसमिति की सदस्य एवं सांसद प्रणीति शिंदे ने सोमवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उस चुनौती को स्वीकार किया, जिसमें उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक पर खुली बहस का आयोजन करने का प्रस्ताव रखा था। इसके साथ ही शिंदे ने यह भी कहा कि इस बहस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी शामिल होना आवश्यक है।

प्रणीति शिंदे ने कांग्रेस सांसद शोभा बच्छाव के साथ पत्रकार वार्ता में भारतीय जनता पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी आरक्षण के मुद्दे का इस्तेमाल एक छिपे हुए एजेंडे के तहत कर रही है, जिसका मकसद निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है। इससे देश की संघीय व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

शिंदे ने मुख्यमंत्री को चुनौती देते हुए कहा कि वे इस मुद्दे पर सार्वजनिक बहस के लिए समय और स्थान निर्धारित करें, ताकि सभी पक्ष अपने विचार व्यक्त कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार द्वारा बुलाया गया विशेष सत्र महिला आरक्षण के लिए नहीं, बल्कि परिसीमन से जुड़े निर्णयों को आगे बढ़ाने के लिए था।

शिंदे और बच्छाव ने कहा कि सरकार की मंशा संदिग्ध है, क्योंकि प्रस्तावित योजनाओं से उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच असंतुलन उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने मांग की कि लोकसभा की सभी पांच सौ तैंतालीस सीटों पर तैंतीस प्रतिशत महिला आरक्षण को तुरंत लागू किया जाए और इसके लिए जनगणना या परिसीमन जैसी किसी शर्त को न जोड़ा जाए।

प्रणीति शिंदे ने यह भी आरोप लगाया कि वर्ष 2023 में लाया गया महिला आरक्षण विधेयक जानबूझकर जटिल शर्तों के साथ प्रस्तुत किया गया था, ताकि इसे लागू करने में देरी हो सके। उन्होंने कहा कि सरकार ने महिला आरक्षण के नाम पर विशेष सत्र बुलाया था, लेकिन इस विषय को प्रारंभ में एजेंडे में शामिल नहीं किया गया था।

उन्होंने आगे कहा कि सरकार का असली उद्देश्य निर्वाचन क्षेत्रों के पुनर्गठन के जरिए राजनीतिक लाभ प्राप्त करना था। लेकिन कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के प्रयासों के कारण यह योजना सफल नहीं हो सकी और सरकार को अपने कदम पीछे हटाने पड़े।

शिंदे ने मुख्यमंत्री की 'भ्रूण हत्या' वाली टिप्पणी का उल्लेख किया और भाजपा पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने मणिपुर, हाथरस, उन्नाव और बदलापुर जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ये मामले महिलाओं की सुरक्षा की स्थिति पर चिंता पैदा करते हैं। उनके अनुसार, भाजपा राजनीतिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के मुद्दे पर भी सवालों के घेरे में है।

उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ होने वाली घटनाओं पर सरकार को और अधिक संवेदनशील होने की आवश्यकता है। शिंदे ने आरोप लगाया कि कई मामलों में महिलाओं के साथ अन्याय हुआ है और उन पर उचित कार्रवाई नहीं की गई।

कांग्रेस नेता शोभा बच्छाव ने पार्टी के ऐतिहासिक योगदानों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को तैंतीस प्रतिशत आरक्षण देने का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को जाता है। साथ ही कई राज्यों में इसे बढ़ाकर पचास प्रतिशत तक पहुंचाने का श्रेय सोनिया गांधी को दिया जाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि आज स्थानीय निकायों में लगभग पंद्रह लाख महिलाएं कार्यरत हैं और यह बदलाव कांग्रेस की नीतियों के कारण संभव हुआ है। बच्छाव के अनुसार, यदि 2024 के चुनावों के लिए प्रस्तावित 2023 का महिला आरक्षण कानून लागू कर दिया गया होता, तो लोकसभा में लगभग एक सौ अस्सी महिला सांसद होतीं। लेकिन उनके अनुसार, सरकार ने इस कानून को कुछ शर्तों से जोड़कर इसकी प्रक्रिया को जटिल बना दिया।

शिंदे ने भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की संगठनात्मक संरचना पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अब तक भाजपा में कोई भी महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बनी है, जो महिलाओं की भागीदारी पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने भाजपा के प्रस्तावित हस्ताक्षर अभियान को भी आलोचना का विषय बनाते हुए कहा कि यह केवल दिखावा है और इसमें विश्वसनीयता की कमी है।

Point of View

जबकि भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। दोनों पक्षों के तर्कों को सुनना और समझना आवश्यक है।
NationPress
22/04/2026

Frequently Asked Questions

महिला आरक्षण क्या है?
महिला आरक्षण का मतलब है कि राजनीति में महिलाओं को विशेष सीटों पर आरक्षण दिया जाए, ताकि उनकी भागीदारी बढ़ सके।
कांग्रेस ने मुख्यमंत्री को क्या चुनौती दी?
कांग्रेस ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को महिला आरक्षण पर खुली बहस के लिए चुनौती दी है।
क्या प्रधानमंत्री मोदी इस बहस में शामिल होंगे?
प्रणीति शिंदे ने मांग की है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस बहस में शामिल हों।
महिला आरक्षण विधेयक में क्या समस्याएं हैं?
शिंदे का आरोप है कि विधेयक में जटिल शर्तें हैं, जो इसे लागू करने में देरी कर सकती हैं।
भाजपा पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाया है कि वह आरक्षण के मुद्दे का उपयोग राजनीतिक लाभ के लिए कर रही है।
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