बालाघाट में बैगा बच्चों की मौत: दो अधिकारी हटाए, उपमुख्यमंत्री शुक्ल ने दिए जांच के निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में बैगा आदिवासी बच्चों की मौत के मामले में राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए जिला टीकाकरण अधिकारी को बदल दिया है और जिला मलेरिया अधिकारी को पद से हटा दिया है। उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने 22 अगस्त को स्वयं प्रभावित ग्राम मछुरदा पहुँचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए।
मौके पर पहुँचे उपमुख्यमंत्री, परिवारों से की मुलाकात
उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने बालाघाट के बिरसा विकासखंड के ग्राम मछुरदा पहुँचकर बीमारी से प्रभावित बैगा जनजाति के परिवारों से विस्तृत चर्चा की। उन्होंने परिवारों की सामाजिक स्थिति, स्वास्थ्य समस्याओं और बच्चों की दशा के बारे में जानकारी ली तथा प्रदेश सरकार की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।
इस दौरान उन्होंने ग्राम पंचायत मछुरदा की बैगा जनजाति की सरपंच जिलसो रामसिंह तिलगाम सहित बैगा परिवारों से बच्चों के टीकाकरण में सहयोग की अपील भी की। शुक्ल ने कहा कि जिन परिवारों ने बच्चे खोए हैं, उनके प्रति प्रदेश सरकार की पूरी संवेदना है।
अधिकारियों पर कार्रवाई, जांच के आदेश
पत्रकारों से बात करते हुए उपमुख्यमंत्री शुक्ल ने स्पष्ट किया कि बालाघाट के जिला टीकाकरण अधिकारी को बदला गया है और जिला मलेरिया अधिकारी को हटाया गया है। उन्होंने कहा कि बैगा बच्चों की मृत्यु के मामले की जांच की जाएगी और यदि किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आई, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई से सरकार नहीं हिचकेगी।
स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत करने के निर्देश
शुक्ल ने मछुरदा के उप स्वास्थ्य केंद्र में एक एएनएम (ANM) की तैनाती के निर्देश अधिकारियों को दिए, ताकि स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ हो सकें। उन्होंने यह भी बताया कि बिरसा क्षेत्र के 38 गाँवों में मलेरिया से बचाव के लिए दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। घर-घर सर्वे कर बीमार लोगों की जांच और उपचार भी जारी है, साथ ही प्रभावित गाँवों में विशेष टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र हाल ही में नक्सलवाद से मुक्त हुआ है और अब सरकारी योजनाएं एवं सुविधाएं इस दूरस्थ इलाके तक प्रभावी रूप से पहुँच रही हैं।
पोषण और जागरूकता पर विशेष अभियान
उपमुख्यमंत्री शुक्ल ने परिवारों को पोषण एवं स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने की समझाइश दी और कहा कि दैनिक जीवन में साफ-सफाई तथा पौष्टिक आहार से अनेक बीमारियों से बचाव संभव है। उन्होंने घोषणा की कि बैगा बच्चों के पोषण को लेकर वे भोपाल में महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे।
इसके अलावा, दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग का मैनपावर बढ़ाने और आंगनबाड़ी केंद्रों की सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के लिए भी आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया गया। सरकार ने बैगा जनजाति के बीच स्वास्थ्य एवं अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर जागरूकता के लिए विशेष अभियान चलाने की भी घोषणा की।
आगे क्या होगा
जांच के निष्कर्ष आने के बाद दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की संभावना है। महिला एवं बाल विकास विभाग के साथ बैठक में बैगा बच्चों के पोषण के दीर्घकालिक समाधान पर विचार होगा। यह मामला राज्य में आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करता है।