29 अगस्त 2026
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बालाघाट के नक्सल मुक्त बोंदारी-कोरका गांव में CM मोहन यादव पहुंचे, आजादी के बाद पहली बार किसी मुख्यमंत्री का दौरा

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बालाघाट के नक्सल मुक्त बोंदारी-कोरका गांव में CM मोहन यादव पहुंचे, आजादी के बाद पहली बार किसी मुख्यमंत्री का दौरा

सारांश

आजादी के बाद पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने बालाघाट के नक्सल प्रभावित बोंदारी-कोरका गांवों में कदम रखा। CM मोहन यादव ने जमीन पर बैठकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और ₹225 करोड़ की विकास पहल का ऐलान किया — यह दौरा सुरक्षा के बाद विकास की नई इबारत लिखने की कोशिश है।

मुख्य बातें

CM मोहन यादव ने 29 अगस्त 2026 को बालाघाट के नक्सल मुक्त बोंदारी और कोरका गांवों का दौरा किया — 1947 के बाद पहली बार किसी मुख्यमंत्री की यात्रा।
₹225 करोड़ की विकास पहल के तहत 15 से अधिक विभागों के माध्यम से बुनियादी ढाँचा, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार का विस्तार होगा।
मुख्यमंत्री ने सरकार का संकल्प 'सुरक्षा के साथ विकास और विकास के साथ रोजगार' बताया।
महिलाओं और स्व-सहायता समूहों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर परिवारों की आय बढ़ाने की योजना।
युवाओं को स्व-उद्यमी बनाने के लिए कौशल प्रशिक्षण और उद्यमिता अवसर बढ़ाए जाएंगे।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 29 अगस्त 2026 को बालाघाट जिले के नक्सल मुक्त हुए सुदूर गांवों बोंदारी और कोरका का दौरा किया — स्वतंत्रता के बाद यह पहला अवसर है जब किसी मुख्यमंत्री ने इन गांवों में पहुँचकर ग्रामवासियों से सीधा संवाद किया। इस ऐतिहासिक दौरे में मुख्यमंत्री ने जनजातीय समाज की समस्याएं सुनीं और मौके पर ही कई समाधान दिए।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री मोहन यादव शनिवार को बोंदारी गांव पहुँचे और ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर उनकी बात सुनी। यह प्रतीकात्मक कदम उस क्षेत्र में विशेष महत्व रखता है जहाँ दशकों तक नक्सली प्रभाव के कारण कोई भी शीर्ष जनप्रतिनिधि नहीं पहुँच सका था। उन्होंने पशुपालन, आवास सुविधा, पोषण आहार, वन विभाग सहयोग, चिकित्सा, शिक्षा और रोजगार जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की।

सरकार का विकास संकल्प

मुख्यमंत्री यादव ने घोषणा की कि ₹225 करोड़ की विकास पहल के अंतर्गत इन क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे का विस्तार किया जाएगा। इस पहल में पंचायत एवं ग्रामीण विकास, ऊर्जा, शिक्षा, उद्योग, महिला एवं बाल विकास, आयुष, खाद्य, मत्स्य, स्वास्थ्य, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी, जनजातीय कार्य एवं पर्यटन सहित 15 से अधिक विभाग शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार का स्पष्ट संकल्प 'सुरक्षा के साथ विकास और विकास के साथ रोजगार' का है। नक्सलवाद के प्रभाव से मुक्त हुए क्षेत्रों में अब सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।

रोजगार और उद्यमिता पर जोर

मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल सड़क बनाना नहीं, बल्कि सड़कों को बाजार से, गांव को रोजगार से और युवाओं को अवसरों से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि गांव में तैयार उत्पादों का स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन कर उन्हें देश के बड़े बाजारों तक पहुँचाया जाएगा।

यहाँ के युवाओं को नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला स्व-उद्यमी बनाने के लिए कौशल प्रशिक्षण और उद्यमिता के अवसर बढ़ाए जाएंगे। महिलाओं और स्व-सहायता समूहों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर परिवारों की आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

ऐतिहासिक संदर्भ

गौरतलब है कि बालाघाट जिले के ये गांव लंबे समय तक नक्सली हिंसा और भय के साए में रहे, जिसके चलते यहाँ विकास कार्य और प्रशासनिक पहुँच अत्यंत सीमित रही। यह दौरा ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश सरकार नक्सल मुक्त क्षेत्रों में पुनर्निर्माण और विकास को नई गति देने की कोशिश कर रही है। यह 1947 के बाद पहला अवसर है जब किसी मुख्यमंत्री ने इन गांवों में कदम रखा।

आम जनता पर असर

इस दौरे का सीधा असर बोंदारी और कोरका के जनजातीय परिवारों पर पड़ेगा, जो वर्षों से बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहे हैं। ₹225 करोड़ की विकास राशि से इन गांवों में सड़क, बिजली, स्वास्थ्य केंद्र और स्कूलों का निर्माण होने की उम्मीद है। आने वाले समय में यह क्षेत्र मध्य प्रदेश के नक्सल पुनर्वास मॉडल की परीक्षा भूमि बनेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि ₹225 करोड़ की यह राशि उन गांवों तक कितनी पारदर्शिता से पहुँचेगी जो दशकों से प्रशासनिक रडार से बाहर रहे हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की घोषणाएं पहले भी होती रही हैं, लेकिन क्रियान्वयन की कमी ने अक्सर इन्हें कागजी वादों तक सीमित रखा। जनजातीय समाज की जमीनी जरूरतें — भूमि अधिकार, वन उपज का उचित मूल्य, स्थानीय भाषा में शिक्षा — अक्सर बड़े विकास पैकेजों की सुर्खियों में दब जाती हैं। मुख्यमंत्री का जमीन पर बैठकर संवाद करना नई शुरुआत का संकेत है, पर निरंतर निगरानी और जवाबदेही तंत्र के बिना यह एकल दौरा पर्याप्त नहीं होगा।
RashtraPress
29 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

CM मोहन यादव का बालाघाट के बोंदारी-कोरका गांव दौरा ऐतिहासिक क्यों है?
29 अगस्त 2026 को यह पहला अवसर था जब 1947 में आजादी के बाद से किसी मुख्यमंत्री ने बालाघाट के नक्सल प्रभावित रहे बोंदारी और कोरका गांवों में कदम रखा। इन गांवों में दशकों तक नक्सली हिंसा के कारण प्रशासनिक पहुँच बेहद सीमित रही थी।
बालाघाट के नक्सल मुक्त गांवों के लिए कितनी राशि की विकास पहल घोषित हुई?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ₹225 करोड़ की विकास पहल का ऐलान किया, जिसके तहत 15 से अधिक विभागों के माध्यम से सड़क, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़े कार्य किए जाएंगे।
बोंदारी-कोरका गांव में किन क्षेत्रों के विकास पर ध्यान दिया जाएगा?
सरकार ने पशुपालन, आवास, पोषण, वन विभाग सहयोग, चिकित्सा, शिक्षा और रोजगार को प्राथमिकता दी है। इसके साथ ही महिलाओं और स्व-सहायता समूहों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने और युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने की योजना है।
मध्य प्रदेश सरकार का नक्सल मुक्त क्षेत्रों में विकास का क्या दृष्टिकोण है?
मुख्यमंत्री यादव के अनुसार सरकार का संकल्प 'सुरक्षा के साथ विकास और विकास के साथ रोजगार' है। सड़कों को बाजार से, गांव को रोजगार से और युवाओं को उद्यमिता के अवसरों से जोड़ना इस दृष्टिकोण का मूल है।
इस दौरे से बालाघाट के जनजातीय समाज को क्या फायदा होगा?
बोंदारी और कोरका के जनजातीय परिवारों को बुनियादी सुविधाएं — सड़क, बिजली, स्वास्थ्य केंद्र और स्कूल — मिलने की उम्मीद है। स्थानीय उत्पादों के मूल्य संवर्धन और बड़े बाजारों तक पहुँच से इन परिवारों की आय बढ़ने का अनुमान है।
राष्ट्र प्रेस
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