बालाघाट के नक्सल मुक्त बोंदारी-कोरका गांव में CM मोहन यादव पहुंचे, आजादी के बाद पहली बार किसी मुख्यमंत्री का दौरा
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 29 अगस्त 2026 को बालाघाट जिले के नक्सल मुक्त हुए सुदूर गांवों बोंदारी और कोरका का दौरा किया — स्वतंत्रता के बाद यह पहला अवसर है जब किसी मुख्यमंत्री ने इन गांवों में पहुँचकर ग्रामवासियों से सीधा संवाद किया। इस ऐतिहासिक दौरे में मुख्यमंत्री ने जनजातीय समाज की समस्याएं सुनीं और मौके पर ही कई समाधान दिए।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री मोहन यादव शनिवार को बोंदारी गांव पहुँचे और ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर उनकी बात सुनी। यह प्रतीकात्मक कदम उस क्षेत्र में विशेष महत्व रखता है जहाँ दशकों तक नक्सली प्रभाव के कारण कोई भी शीर्ष जनप्रतिनिधि नहीं पहुँच सका था। उन्होंने पशुपालन, आवास सुविधा, पोषण आहार, वन विभाग सहयोग, चिकित्सा, शिक्षा और रोजगार जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की।
सरकार का विकास संकल्प
मुख्यमंत्री यादव ने घोषणा की कि ₹225 करोड़ की विकास पहल के अंतर्गत इन क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचे का विस्तार किया जाएगा। इस पहल में पंचायत एवं ग्रामीण विकास, ऊर्जा, शिक्षा, उद्योग, महिला एवं बाल विकास, आयुष, खाद्य, मत्स्य, स्वास्थ्य, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, कृषि, पशुपालन, उद्यानिकी, जनजातीय कार्य एवं पर्यटन सहित 15 से अधिक विभाग शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का स्पष्ट संकल्प 'सुरक्षा के साथ विकास और विकास के साथ रोजगार' का है। नक्सलवाद के प्रभाव से मुक्त हुए क्षेत्रों में अब सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।
रोजगार और उद्यमिता पर जोर
मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल सड़क बनाना नहीं, बल्कि सड़कों को बाजार से, गांव को रोजगार से और युवाओं को अवसरों से जोड़ना है। उन्होंने बताया कि गांव में तैयार उत्पादों का स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन कर उन्हें देश के बड़े बाजारों तक पहुँचाया जाएगा।
यहाँ के युवाओं को नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला स्व-उद्यमी बनाने के लिए कौशल प्रशिक्षण और उद्यमिता के अवसर बढ़ाए जाएंगे। महिलाओं और स्व-सहायता समूहों को आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर परिवारों की आय बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
ऐतिहासिक संदर्भ
गौरतलब है कि बालाघाट जिले के ये गांव लंबे समय तक नक्सली हिंसा और भय के साए में रहे, जिसके चलते यहाँ विकास कार्य और प्रशासनिक पहुँच अत्यंत सीमित रही। यह दौरा ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश सरकार नक्सल मुक्त क्षेत्रों में पुनर्निर्माण और विकास को नई गति देने की कोशिश कर रही है। यह 1947 के बाद पहला अवसर है जब किसी मुख्यमंत्री ने इन गांवों में कदम रखा।
आम जनता पर असर
इस दौरे का सीधा असर बोंदारी और कोरका के जनजातीय परिवारों पर पड़ेगा, जो वर्षों से बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहे हैं। ₹225 करोड़ की विकास राशि से इन गांवों में सड़क, बिजली, स्वास्थ्य केंद्र और स्कूलों का निर्माण होने की उम्मीद है। आने वाले समय में यह क्षेत्र मध्य प्रदेश के नक्सल पुनर्वास मॉडल की परीक्षा भूमि बनेगा।