मध्य प्रदेश नक्सलवाद मुक्त: सीएम मोहन यादव बोले — मोदी-शाह के नेतृत्व में मिली ऐतिहासिक सफलता
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 18 जून को इंदौर में घोषणा की कि राज्य अब नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में यह उपलब्धि हासिल हुई है, जो कभी राज्य की सबसे बड़ी चुनौती मानी जाती थी।
नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक जीत
मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के 12 वर्ष के शासनकाल में नक्सलवाद को 'अंतिम सलाम' देना राज्य की दृष्टि से सबसे बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस शासनकाल में यह समस्या इतनी विकराल थी कि एक मंत्री को भी अपनी जान गंवानी पड़ी थी। आज वही समस्या न केवल समाप्त हो चुकी है, बल्कि बालाघाट, मंडला और डिंडोरी जैसे पूर्व नक्सल-प्रभावित जिलों में विकास की बयार बह रही है।
भोपाल गैस त्रासदी के कचरे से मुक्ति
सीएम यादव ने भोपाल में लगभग चार दशक पहले हुए यूनियन कार्बाइड हादसे का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उस कारखाने के विषाक्त कचरे को जलाकर नष्ट कर दिया गया है, जिससे राज्य उस दीर्घकालीन पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संकट से भी मुक्त हुआ है। साथ ही उन्होंने नदी जोड़ो अभियान सहित कई बड़े विकास कार्यों का उल्लेख किया, जिन्हें उन्होंने 'पूरी दुनिया के लिए आश्चर्य' बताया।
चीता पुनर्स्थापन: वैश्विक सफलता की कहानी
राज्य के श्योपुर में स्थित कूनो नेशनल पार्क में चीता पुनर्स्थापन के प्रयोग को सफल बताते हुए सीएम यादव ने कहा, 'चीता कहाँ जीता है, वह हमारे मध्य प्रदेश में जीता है।' उन्होंने इसे राज्य के लिए सौभाग्य की बात करार दिया।
शिक्षा में उल्लेखनीय प्रगति
नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के संदर्भ में मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि बीते तीन वर्षों में प्राथमिक शिक्षा स्तर पर ड्रॉपआउट दर शून्य हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन में मध्य प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्य अभी भी NEP के पूर्ण कार्यान्वयन की दिशा में संघर्ष कर रहे हैं।
आगे की राह
गौरतलब है कि नक्सलवाद से मुक्ति और शिक्षा में सुधार जैसे दावे राज्य सरकार की उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत किए जा रहे हैं। बालाघाट, मंडला और डिंडोरी जैसे जिलों में विकास की रफ्तार और वहाँ के नागरिकों के जीवन स्तर में वास्तविक बदलाव ही इन दावों की असली कसौटी होगी।