मध्य प्रदेश 35 साल बाद नक्सल मुक्त, सीएम मोहन यादव ने पुलिस को बताया सुशासन की रीढ़
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 15 अगस्त 2026 को स्वाधीनता दिवस समारोह में घोषणा की कि मध्य प्रदेश करीब 35 वर्षों के बाद पूरी तरह नक्सल मुक्त हो गया है। उन्होंने प्रदेश की पुलिस को सेवा, सुरक्षा और सुशासन की असली रीढ़ बताते हुए कहा कि यह उपलब्धि स्वतंत्रता दिवस पर प्रदेशवासियों को मिला सबसे अनमोल तोहफा है।
समारोह और सम्मान
मुख्यमंत्री निवास, भोपाल में आयोजित स्वाधीनता दिवस समारोह में पुलिस और होमगार्ड्स के 47 अधिकारियों एवं कर्मचारियों को विभिन्न राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। इनमें राष्ट्रपति के विशिष्ट सेवा पदक, सराहनीय सेवा पदक, राष्ट्रपति के होमगार्ड तथा नागरिक सुरक्षा पदक और सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक शामिल रहे। मुख्यमंत्री यादव ने पदक विजेताओं के साहस, शौर्य और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना की।
नक्सल मुक्ति का ऐतिहासिक मील का पत्थर
मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नक्सलवाद मुक्त भारत का संकल्प लिया था और मध्य प्रदेश सरकार ने उस संकल्प के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश 'लाल सलाम को आखिरी सलाम' करने वाला देश का अग्रणी राज्य बन गया है। इस अभियान में मध्य प्रदेश पुलिस के जवानों और हॉक फोर्स की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के बालाघाट और मंडला जैसे जिले दशकों तक नक्सल प्रभावित रहे। यादव के अनुसार, कई नक्सलियों का सफाया किया गया जबकि अनेक ने सरकार और पुलिस के सामने हथियार डाल दिए। अब ये पूर्व नक्सली विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहे हैं।
जनजातीय क्षेत्रों के विकास का संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार उन जनजातीय क्षेत्रों के विकास के लिए संकल्पित है जो लंबे समय तक मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहे। उन्होंने पुलिस और होमगार्ड्स की विषम परिस्थितियों में भी नागरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की प्रतिबद्धता की सराहना की।
पुलिस बल में बड़े सुधार
मुख्यमंत्री यादव ने बताया कि प्रदेश के इतिहास में पहली बार इस वर्ष अब तक 27,534 पुलिस अधिकारियों-कर्मचारियों को पदोन्नत किया गया है। वर्ष 2023 से अब तक 14,704 से अधिक अभ्यर्थियों का पुलिस में चयन किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त इस वर्ष 9,751 नए पुलिस कर्मियों की भर्ती को मंजूरी दी गई है। थानों और वरिष्ठ पुलिस कार्यालयों को डिजिटल सेवाओं से जोड़ने का काम भी पूरा किया जा चुका है।
आगे की राह
नक्सल मुक्ति के बाद प्रभावित जनजातीय क्षेत्रों में विकास कार्यों की गति और पूर्व नक्सलियों के पुनर्वास की प्रक्रिया अगले चरण की प्राथमिकता होगी। पुलिस बल में जारी भर्तियाँ और डिजिटलीकरण प्रदेश की कानून-व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं।