30 सितंबर 2026
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थर्ड-कंट्री डिपोर्टेशन: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को दी हरी झंडी, दिसंबर में होगी पूरी सुनवाई

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थर्ड-कंट्री डिपोर्टेशन: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को दी हरी झंडी, दिसंबर में होगी पूरी सुनवाई

सारांश

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को थर्ड-कंट्री डिपोर्टेशन फिर से शुरू करने की अनुमति दी — तीन उदार न्यायाधीशों की असहमति के बावजूद। दिसंबर में पूर्ण सुनवाई तय है। प्रवासी वकीलों का कहना है कि 25,000 से अधिक लोग पहले ही 28 देशों में भेजे जा चुके हैं।

मुख्य बातें

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 30 सितंबर 2026 को ट्रंप प्रशासन की थर्ड-कंट्री रिमूवल नीति को अंतरिम रूप से बहाल किया।
मैसाचुसेट्स के संघीय न्यायाधीश के फरवरी 2026 के उस फैसले पर रोक लगाई गई जिसने इस नीति को निलंबित किया था।
जस्टिस सोटोमायर, कगन और जैक्सन ने असहमति जताई; बहुमत ने बिना कारण बताए अनुमति दी।
सुप्रीम कोर्ट दिसंबर 2026 में नीति की कानूनी वैधता पर विस्तृत सुनवाई करेगा।
प्रवासी वकीलों के अनुसार DHS ने 2025-26 में 28 देशों में 25,000 से अधिक लोगों को निर्वासित किया — सुप्रीम कोर्ट ने इस आँकड़े की पुष्टि नहीं की है।
यह आदेश केवल अंतिम रिमूवल ऑर्डर वाले व्यक्तियों पर लागू; वैध वीजा धारकों पर कोई असर नहीं।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को 30 सितंबर 2026 को एक अंतरिम आदेश में प्रवासियों को उनके मूल देश के अलावा किसी अन्य देश में निर्वासित करने की प्रक्रिया — जिसे थर्ड-कंट्री रिमूवल नीति कहा जाता है — फिर से शुरू करने की अनुमति दे दी। यह आदेश तब आया जब न्यायाधीश इस प्रश्न पर अंतिम विचार कर रहे हैं कि यह नीति कानूनी रूप से वैध है या नहीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि वह इस पूरे मामले पर दिसंबर सत्र में विस्तृत दलीलें सुनेगी।

मुख्य घटनाक्रम

सुप्रीम कोर्ट ने मैसाचुसेट्स के एक संघीय न्यायाधीश के फरवरी 2026 के उस फैसले पर रोक लगाई, जिसमें थर्ड-कंट्री डिपोर्टेशन नीति को रद्द कर दिया गया था। उस निचली अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि प्रवासियों को निर्वासित करने से पहले उन्हें उचित नोटिस दिया जाए और उत्पीड़न या प्रताड़ना के भय को रखने का मौका दिया जाए।

शीर्ष न्यायालय के इस अंतरिम आदेश में जस्टिस सोनिया सोटोमायर, जस्टिस एलेना कगन और जस्टिस केतनजी ब्राउन जैक्सन ने असहमति जताई — ये तीनों न्यायाधीश चाहती थीं कि सरकार की माँग ठुकरा दी जाए। बाकी न्यायाधीशों ने सरकार को अनुमति दे दी, लेकिन अपने निर्णय का कोई विस्तृत कारण नहीं बताया।

नीति में क्या है

होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) की इस नीति के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति के विरुद्ध अंतिम रिमूवल ऑर्डर जारी हो चुका है, तो उसे किसी ऐसे देश में भेजा जा सकता है जिसका नाम मूल आदेश में नहीं था — बशर्ते वह देश उसे स्वीकार करने को तैयार हो। यदि कोई कूटनीतिक आश्वासन उपलब्ध न हो, तो प्रवासी को गंतव्य की सूचना दी जानी चाहिए और उसे उत्पीड़न या प्रताड़ना का भय व्यक्त करने का अवसर दिया जाना चाहिए।

DHS आमतौर पर नोटिस जारी करने के कम से कम 24 घंटे बाद प्रतीक्षा करता है, जिसके बाद एक आव्रजन अधिकारी यह निर्णय लेता है कि क्या उस व्यक्ति को संभावित नुकसान का अधिक सामना करना पड़ सकता है। जो लोग इस मानक को पूरा नहीं करते, उन्हें निर्वासित किया जा सकता है।

सरकार का तर्क

ट्रंप प्रशासन ने तीसरे देश में निर्वासन को 'कुछ विदेशियों को हटाने के लिए एक जरूरी हथियार' बताया, जिसमें कथित तौर पर कुछ 'सबसे खतरनाक अपराधी' भी शामिल हैं। प्रशासन ने यह भी कहा कि निचली अदालत की पाबंदियों के कारण 70 आपराधिक दोषी प्रवासियों को तीन देशों में ले जा रही एक उड़ान रद्द करनी पड़ी थी, जिससे अतिरिक्त खर्च हुआ और नए सिरे से कूटनीतिक वार्ता करनी पड़ी।

न्याय विभाग ने तर्क दिया कि निचली अदालतों ने पूरे वर्ग के लिए राहत देकर और आव्रजन तथा विदेश नीति से जुड़े फैसलों में हस्तक्षेप करके अपनी न्यायिक सीमा लांघ दी है।

प्रवासियों के वकीलों की दलीलें

प्रवासियों का प्रतिनिधित्व करने वाले वकीलों का कहना है कि यह नीति लोगों को बिना यह साबित करने का उचित अवसर दिए अनजान देशों में भेज सकती है कि उन्हें वहाँ उत्पीड़न, प्रताड़ना या पुनः निष्कासन का खतरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन 'लंबे समय से अमेरिका में रह रहे निवासियों — जिनमें से कई का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है — को तीसरे देशों में भेजने से होने वाले गंभीर नुकसान को नजरअंदाज कर रहा है।'

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि कुछ निर्वासित व्यक्तियों को लंबे समय तक हिरासत, पिटाई, यौन उत्पीड़न, गायब होने और एक देश से दूसरे देश में भेजे जाने जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ा। वकीलों के अनुसार एक अनुमान के अनुसार DHS ने 2025 और 2026 के दौरान कम से कम 28 तीसरे देशों में 25,000 से अधिक लोगों को निर्वासित किया — हालाँकि सुप्रीम कोर्ट के मंगलवार के आदेश में इस आँकड़े की पुष्टि नहीं की गई है।

आगे क्या होगा

न्यायाधीश अब यह परखेंगे कि जिला अदालत के पास पूरे वर्ग के लिए राहत देने का अधिकार था या नहीं, और क्या यह नीति संघीय आव्रजन कानून, संवैधानिक प्रक्रिया की सुरक्षा या प्रताड़ना से जुड़े अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का उल्लंघन करती है। गौरतलब है कि यह अंतरिम आदेश केवल उन लोगों पर लागू होता है जिनके विरुद्ध पहले से अंतिम रिमूवल ऑर्डर जारी है — यह वैध स्थायी निवासियों, छात्रों, कामगारों या अन्य वीजा धारकों की स्थिति को प्रभावित नहीं करता। दिसंबर 2026 में होने वाली विस्तृत सुनवाई के बाद ही इस नीति की कानूनी स्थिति पर अंतिम निर्णय आने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 से अधिक निर्वासन के आँकड़े — भले ही अभी तक न्यायालय द्वारा असत्यापित हों — यह दर्शाते हैं कि यह नीति अदालती लड़ाई से बहुत आगे जा चुकी है। तीन उदार न्यायाधीशों की स्पष्ट असहमति बताती है कि दिसंबर की बहस कड़ी होगी और फैसला नज़दीकी मतों से आने की संभावना है।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का थर्ड-कंट्री डिपोर्टेशन पर क्या फैसला आया?
सुप्रीम कोर्ट ने 30 सितंबर 2026 को एक अंतरिम आदेश में ट्रंप प्रशासन को थर्ड-कंट्री रिमूवल नीति फिर से लागू करने की अनुमति दी। यह आदेश उस निचली अदालत के फैसले पर रोक है जिसने इस नीति को निलंबित किया था। कोर्ट दिसंबर 2026 में पूर्ण सुनवाई करेगा।
थर्ड-कंट्री रिमूवल नीति क्या है?
यह DHS की वह नीति है जिसके तहत अंतिम रिमूवल ऑर्डर वाले किसी प्रवासी को उसके मूल देश के बजाय किसी ऐसे तीसरे देश में भेजा जा सकता है जो उसे स्वीकार करने को तैयार हो। यदि कूटनीतिक आश्वासन न हो तो प्रवासी को 24 घंटे पहले नोटिस दिया जाता है और उसे उत्पीड़न का भय व्यक्त करने का मौका दिया जाता है।
इस फैसले का विरोध किसने किया और क्यों?
जस्टिस सोनिया सोटोमायर, जस्टिस एलेना कगन और जस्टिस केतनजी ब्राउन जैक्सन ने असहमति जताई। प्रवासियों के वकीलों का तर्क है कि यह नीति लोगों को बिना पर्याप्त प्रक्रिया के अनजान देशों में भेज सकती है, जहाँ उन्हें उत्पीड़न, प्रताड़ना या पुनः निष्कासन का खतरा हो सकता है।
क्या यह फैसला भारतीय या अन्य वैध वीजा धारकों को प्रभावित करता है?
नहीं। यह आदेश केवल उन लोगों पर लागू होता है जिनके विरुद्ध पहले से अंतिम रिमूवल ऑर्डर जारी हो चुका है। वैध स्थायी निवासी, छात्र, कामगार और अन्य वीजा धारक जो रिमूवल प्रक्रिया में नहीं हैं, इससे सीधे प्रभावित नहीं होते।
आगे सुप्रीम कोर्ट में क्या होगा?
दिसंबर 2026 के सत्र में सुप्रीम कोर्ट विस्तृत दलीलें सुनेगा। न्यायाधीश यह तय करेंगे कि जिला अदालत के पास पूरे वर्ग के लिए राहत देने का अधिकार था या नहीं, और क्या यह नीति संघीय आव्रजन कानून, संवैधानिक प्रक्रिया या अंतरराष्ट्रीय प्रताड़ना-विरोधी दायित्वों का उल्लंघन करती है।
राष्ट्र प्रेस
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