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पंजाब पराली जलाने पर कार्रवाई: 29 सितंबर तक 52 घटनाएँ, ₹55,000 का पर्यावरणीय मुआवज़ा लगाया

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पंजाब पराली जलाने पर कार्रवाई: 29 सितंबर तक 52 घटनाएँ, ₹55,000 का पर्यावरणीय मुआवज़ा लगाया

सारांश

पंजाब में पराली सीज़न की शुरुआत ही विवादास्पद रही — 29 सितंबर तक 52 घटनाएँ, ₹55,000 का मुआवज़ा, लेकिन वसूली आधी भी नहीं। अमृतसर सबसे आगे, पटियाला में एकमात्र एफआईआर। अधिकारियों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं।

मुख्य बातें

29 सितंबर 2026 तक पंजाब में पराली जलाने की कुल 52 घटनाएँ रिपोर्ट।
42 खेतों का निरीक्षण; 16 स्थानों पर जलाने के निशान की भौतिक पुष्टि।
11 मामलों में कुल ₹55,000 पर्यावरणीय मुआवज़ा; अब तक केवल ₹25,000 की वसूली।
अमृतसर में सर्वाधिक 30 घटनाएँ ; पटियाला में एकमात्र एफआईआर दर्ज।
खेत रिकॉर्ड में 9 रेड एंट्री , 4 शो-कॉज नोटिस ; नोडल अधिकारियों पर कार्रवाई अभी शून्य ।

पंजाब में धान की पराली जलाने पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार 29 सितंबर 2026 तक राज्यभर में कुल 52 आग की घटनाएँ रिपोर्ट की गई हैं, जिनमें से 42 खेतों का भौतिक निरीक्षण किया गया और 16 स्थानों पर फसल जलाने के निशान की पुष्टि हुई है। प्रशासन ने कुल 11 मामलों में ₹55,000 का पर्यावरणीय मुआवज़ा लगाया है, जिसमें से अब तक ₹25,000 की वसूली हो चुकी है।

जिलेवार घटनाक्रम

अमृतसर राज्य में सबसे अधिक प्रभावित ज़िला रहा, जहाँ कुल 30 आग की घटनाएँ रिपोर्ट हुईं। इनमें 20 खेतों का निरीक्षण किया गया और 4 स्थानों पर जलाने के निशान की पुष्टि हुई। एक मामले में ₹5,000 का पर्यावरणीय मुआवज़ा लगाया गया और पूरी राशि वसूल कर ली गई।

तरनतारन में 8 घटनाएँ रिपोर्ट हुईं, सभी 8 खेतों का निरीक्षण किया गया और 5 स्थानों पर जलाने के निशान मिले। यहाँ 4 मामलों में कुल ₹20,000 का मुआवज़ा लगाया गया, जिसमें से ₹10,000 वसूल हुए। इसके अलावा खेत रिकॉर्ड में 5 रेड एंट्री दर्ज की गईं।

फिरोजपुर में 5 घटनाएँ रिपोर्ट हुईं। सभी 5 खेतों का निरीक्षण किया गया और 5 स्थानों पर जलाने के निशान मिले। 4 मामलों में ₹20,000 का मुआवज़ा लगाया गया, जिसमें से केवल ₹5,000 की वसूली हो सकी। खेत रिकॉर्ड में 4 रेड एंट्री भी दर्ज की गईं।

गुरदासपुर में 3, मोगा में 2 तथा फाजिल्का, होशियारपुर, एसबीएस नगर और पटियाला में एक-एक आग की घटना दर्ज की गई।

पटियाला में एफआईआर

पटियाला में दर्ज एकमात्र घटना में खेत का निरीक्षण कर जलाने के निशान की पुष्टि की गई। इस मामले में ₹5,000 का पर्यावरणीय मुआवज़ा लगाने के साथ-साथ सरकारी आँकड़ों के अनुसार इसे एफआईआर से भी जोड़ा गया है — यह राज्य में दर्ज एकमात्र प्राथमिकी है।

समग्र कार्रवाई का चित्र

कुल आँकड़ों के अनुसार अब तक 1 एफआईआर दर्ज, खेत रिकॉर्ड में 9 रेड एंट्री और 4 चेतावनी नोटिस/शो-कॉज नोटिस जारी किए गए हैं। गौरतलब है कि नोडल या सुपरवाइजरी अधिकारियों के खिलाफ चार्जशीट या निलंबन की कार्रवाई का आँकड़ा अभी तक शून्य है, जिसे लेकर पर्यावरण विशेषज्ञ प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल उठा रहे हैं।

पराली संकट: पृष्ठभूमि

यह ऐसे समय में आया है जब हर वर्ष अक्टूबर-नवंबर में पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की घटनाओं से दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत की वायु गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित होती है। सर्वोच्च न्यायालय और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) पराली जलाने पर अंकुश लगाने के निर्देश जारी करते रहे हैं। इस वर्ष सीज़न की शुरुआत में ही इतनी घटनाओं का सामने आना यह संकेत देता है कि आने वाले हफ्तों में इनकी संख्या और बढ़ सकती है।

आगे क्या होगा

प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा निरीक्षण अभियान जारी रखे जाने की उम्मीद है। वसूली में अभी भी ₹30,000 का अंतर बना हुआ है, जो प्रवर्तन की सीमाओं को उजागर करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि दीर्घकालिक समाधान के लिए किसानों को पराली प्रबंधन के वैकल्पिक साधनों तक आसान और सस्ती पहुँच सुनिश्चित करना ज़रूरी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि निवारक। हर साल सुप्रीम कोर्ट की फटकार, CAQM के दिशानिर्देश और करोड़ों की सब्सिडी के बावजूद पराली जलाने की घटनाएँ रुकती नहीं — इस बार सीज़न की शुरुआत में ही 52 मामले यही दर्शाते हैं। जब तक वैकल्पिक पराली प्रबंधन उपकरण हर छोटे किसान तक नहीं पहुँचते और अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक यह 'कार्रवाई' महज कागज़ी खानापूर्ति बनी रहेगी।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब में पराली जलाने की कितनी घटनाएँ हुई हैं?
सरकारी आँकड़ों के अनुसार 29 सितंबर 2026 तक पंजाब में पराली जलाने की कुल 52 घटनाएँ रिपोर्ट की गई हैं। इनमें से 42 खेतों का निरीक्षण किया गया और 16 स्थानों पर जलाने के निशान की भौतिक पुष्टि हुई।
पराली जलाने पर पंजाब सरकार ने क्या कार्रवाई की है?
प्रशासन ने 11 मामलों में ₹55,000 का पर्यावरणीय मुआवज़ा लगाया है, खेत रिकॉर्ड में 9 रेड एंट्री दर्ज की हैं और 4 शो-कॉज नोटिस जारी किए हैं। पटियाला में एकमात्र एफआईआर दर्ज हुई है, जबकि नोडल अधिकारियों के खिलाफ कोई चार्जशीट या निलंबन नहीं हुआ।
सबसे अधिक पराली जलाने की घटनाएँ किस जिले में हुईं?
अमृतसर में सबसे अधिक 30 घटनाएँ दर्ज की गई हैं। इसके बाद तरनतारन में 8, फिरोजपुर में 5, गुरदासपुर में 3 और मोगा में 2 मामले हैं।
पर्यावरणीय मुआवज़े की वसूली कितनी हुई है?
कुल ₹55,000 के पर्यावरणीय मुआवज़े में से अब तक केवल ₹25,000 की वसूली हो सकी है। शेष ₹30,000 अभी बकाया हैं, जो प्रवर्तन में सीमाओं को दर्शाता है।
पराली जलाने से क्या नुकसान होता है?
पराली जलाने से निकलने वाला धुआँ हर वर्ष अक्टूबर-नवंबर में दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत की वायु गुणवत्ता को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) और सर्वोच्च न्यायालय इस पर बार-बार अंकुश लगाने के निर्देश जारी कर चुके हैं।
राष्ट्र प्रेस
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