पंजाब में पराली जलाने के 27 मामले दर्ज, PPCB रिपोर्ट में ₹35,000 जुर्माना — पटियाला में वसूली शून्य
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) ने 24 सितंबर 2026 तक के आंकड़ों पर आधारित एटीआर रिपोर्ट जारी की है, जिसके अनुसार इस सीजन में पंजाब भर में पराली जलाने की कुल 27 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें से 21 खेतों का मौके पर निरीक्षण किया गया और 10 जगहों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई है। 7 मामलों में पर्यावरण मुआवजा लगाया गया है, जिससे कुल जुर्माने की राशि ₹35,000 बनती है, परंतु अब तक केवल ₹10,000 की ही वसूली हो सकी है।
इसरो उपग्रह निगरानी प्रणाली और निरीक्षण प्रक्रिया
उल्लेखनीय है कि इसरो के मानक प्रोटोकॉल के तहत पराली (फसल अवशेष) जलाने की घटनाओं की निगरानी उपग्रहों (सैटेलाइट्स) के माध्यम से की जाती है। उपग्रह से मिले संकेत के आधार पर जिला अधिकारी खेतों का मौके पर निरीक्षण करते हैं और पुष्टि के बाद पर्यावरण मुआवजा लगाया जाता है। यह प्रक्रिया राज्य में प्रदूषण नियंत्रण के लिए अपनाई जा रही बहु-स्तरीय निगरानी व्यवस्था का हिस्सा है।
जिलेवार स्थिति: अमृतसर सबसे आगे, पटियाला में वसूली नहीं
सबसे अधिक मामले अमृतसर में दर्ज हुए हैं — कुल 13 घटनाएं, जिनमें से 11 खेतों का निरीक्षण हुआ और 4 जगहों पर जलाने की पुष्टि हुई। यहाँ एक मामले में ₹5,000 जुर्माना लगाकर वसूल भी कर लिया गया।
फिरोजपुर में 4 मामले दर्ज हुए, 3 का निरीक्षण हुआ और तीनों पर जलाने की पुष्टि हुई। यहाँ ₹15,000 का जुर्माना लगाया गया, जिसमें से ₹5,000 वसूले गए। इसके अतिरिक्त 3 फार्म रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई और 4 वार्निंग नोटिस जारी हुए — राज्य में सबसे कड़ी कार्रवाई यहीं देखने को मिली।
तरनतारन में 5 मामले दर्ज हुए, 3 का निरीक्षण हुआ, 1 की पुष्टि हुई और ₹5,000 जुर्माना लगाया गया। होशियारपुर में 1 मामला दर्ज हुआ, पुष्टि भी हुई और ₹5,000 जुर्माना लगा, लेकिन अभी तक वसूली नहीं हुई।
पटियाला में 1 मामला दर्ज हुआ, निरीक्षण में पुष्टि भी हो गई और ₹5,000 का पर्यावरण मुआवजा लगाया गया। रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि, अभी तक जुर्माने की वसूली शून्य रही है। पटियाला में न कोई एफआईआर दर्ज हुई है और न ही नोडल या पर्यवेक्षी अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन, चार्जशीट, निलंबन या वार्निंग नोटिस जैसी कोई कार्रवाई की गई है।
गुरदासपुर में 2 और शहीद भगत सिंह नगर में 1 मामला दर्ज हुआ है। वहीं बरनाला, बठिंडा, फतेहगढ़ साहिब, फरीदकोट, फाजिल्का, जालंधर, कपूरथला, लुधियाना, मानसा, मोगा, मुक्तसर, पठानकोट, रूपनगर, एसएएस नगर, संगरूर और मलेरकोटला में इस सीजन में अब तक एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ है।
जुर्माने की वसूली में अंतर: प्रवर्तन पर सवाल
PPCB की रिपोर्ट के समग्र आंकड़े बताते हैं कि ₹35,000 के कुल लगाए गए जुर्माने में से केवल ₹10,000 ही वसूले जा सके हैं — यानी जुर्माने की वसूली दर मात्र 28.5% के आसपास है। यह अंतर यह संकेत देता है कि दर्ज और पुष्टि की गई घटनाओं के बावजूद, ज़मीनी स्तर पर आर्थिक दंड का असर अभी सीमित है। आलोचकों का कहना है कि बिना समयबद्ध वसूली और कड़ी जवाबदेही के, मुआवजा प्रणाली पूरी तरह प्रभावी नहीं बन पाती।
आगे क्या होगा
पंजाब में धान की कटाई का मुख्य सीजन अक्टूबर से शुरू होता है, जब पराली जलाने की घटनाओं में तेज़ी आने की आशंका होती है। PPCB की यह रिपोर्ट सीजन के शुरुआती आंकड़ों पर आधारित है और बोर्ड नियमित अंतराल पर एटीआर अपडेट जारी करता रहेगा। दिल्ली-एनसीआर और समूचे उत्तर भारत में वायु प्रदूषण पर सीधा असर डालने वाले इन आंकड़ों पर केंद्रीय और राज्य पर्यावरण एजेंसियों की निगाहें टिकी हैं।