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पंजाब में पराली जलाने के 27 मामले दर्ज, PPCB रिपोर्ट में ₹35,000 जुर्माना — पटियाला में वसूली शून्य

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पंजाब में पराली जलाने के 27 मामले दर्ज, PPCB रिपोर्ट में ₹35,000 जुर्माना — पटियाला में वसूली शून्य

सारांश

PPCB की एटीआर रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में इस सीजन में अब तक पराली जलाने की 27 घटनाएं दर्ज हैं। ₹35,000 के जुर्माने में से केवल ₹10,000 वसूले गए। मुख्य कटाई सीजन अक्टूबर में शुरू होने से पहले ये आंकड़े प्रवर्तन की सीमाओं को उजागर करते हैं।

मुख्य बातें

PPCB की 24 सितंबर 2026 तक की रिपोर्ट में पंजाब में पराली जलाने की 27 घटनाएं दर्ज।
21 खेतों का निरीक्षण, 10 जगहों पर पुष्टि; 7 मामलों में कुल ₹35,000 जुर्माना लगाया गया।
अब तक केवल ₹10,000 की वसूली — जुर्माने का 28.5% भी नहीं।
सबसे अधिक 13 मामले अमृतसर में; फिरोजपुर में 3 रेड एंट्री और 4 वार्निंग नोटिस — सबसे कड़ी कार्रवाई।
पटियाला में ₹5,000 जुर्माना लगा लेकिन वसूली शून्य, कोई एफआईआर या अधिकारी-कार्रवाई नहीं।
बरनाला, बठिंडा, लुधियाना सहित 16 जिलों में इस सीजन कोई मामला दर्ज नहीं।

पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) ने 24 सितंबर 2026 तक के आंकड़ों पर आधारित एटीआर रिपोर्ट जारी की है, जिसके अनुसार इस सीजन में पंजाब भर में पराली जलाने की कुल 27 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इनमें से 21 खेतों का मौके पर निरीक्षण किया गया और 10 जगहों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई है। 7 मामलों में पर्यावरण मुआवजा लगाया गया है, जिससे कुल जुर्माने की राशि ₹35,000 बनती है, परंतु अब तक केवल ₹10,000 की ही वसूली हो सकी है।

इसरो उपग्रह निगरानी प्रणाली और निरीक्षण प्रक्रिया

उल्लेखनीय है कि इसरो के मानक प्रोटोकॉल के तहत पराली (फसल अवशेष) जलाने की घटनाओं की निगरानी उपग्रहों (सैटेलाइट्स) के माध्यम से की जाती है। उपग्रह से मिले संकेत के आधार पर जिला अधिकारी खेतों का मौके पर निरीक्षण करते हैं और पुष्टि के बाद पर्यावरण मुआवजा लगाया जाता है। यह प्रक्रिया राज्य में प्रदूषण नियंत्रण के लिए अपनाई जा रही बहु-स्तरीय निगरानी व्यवस्था का हिस्सा है।

जिलेवार स्थिति: अमृतसर सबसे आगे, पटियाला में वसूली नहीं

सबसे अधिक मामले अमृतसर में दर्ज हुए हैं — कुल 13 घटनाएं, जिनमें से 11 खेतों का निरीक्षण हुआ और 4 जगहों पर जलाने की पुष्टि हुई। यहाँ एक मामले में ₹5,000 जुर्माना लगाकर वसूल भी कर लिया गया।

फिरोजपुर में 4 मामले दर्ज हुए, 3 का निरीक्षण हुआ और तीनों पर जलाने की पुष्टि हुई। यहाँ ₹15,000 का जुर्माना लगाया गया, जिसमें से ₹5,000 वसूले गए। इसके अतिरिक्त 3 फार्म रिकॉर्ड में रेड एंट्री की गई और 4 वार्निंग नोटिस जारी हुए — राज्य में सबसे कड़ी कार्रवाई यहीं देखने को मिली।

तरनतारन में 5 मामले दर्ज हुए, 3 का निरीक्षण हुआ, 1 की पुष्टि हुई और ₹5,000 जुर्माना लगाया गया। होशियारपुर में 1 मामला दर्ज हुआ, पुष्टि भी हुई और ₹5,000 जुर्माना लगा, लेकिन अभी तक वसूली नहीं हुई।

पटियाला में 1 मामला दर्ज हुआ, निरीक्षण में पुष्टि भी हो गई और ₹5,000 का पर्यावरण मुआवजा लगाया गया। रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि, अभी तक जुर्माने की वसूली शून्य रही है। पटियाला में न कोई एफआईआर दर्ज हुई है और न ही नोडल या पर्यवेक्षी अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन, चार्जशीट, निलंबन या वार्निंग नोटिस जैसी कोई कार्रवाई की गई है।

गुरदासपुर में 2 और शहीद भगत सिंह नगर में 1 मामला दर्ज हुआ है। वहीं बरनाला, बठिंडा, फतेहगढ़ साहिब, फरीदकोट, फाजिल्का, जालंधर, कपूरथला, लुधियाना, मानसा, मोगा, मुक्तसर, पठानकोट, रूपनगर, एसएएस नगर, संगरूर और मलेरकोटला में इस सीजन में अब तक एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ है।

जुर्माने की वसूली में अंतर: प्रवर्तन पर सवाल

PPCB की रिपोर्ट के समग्र आंकड़े बताते हैं कि ₹35,000 के कुल लगाए गए जुर्माने में से केवल ₹10,000 ही वसूले जा सके हैं — यानी जुर्माने की वसूली दर मात्र 28.5% के आसपास है। यह अंतर यह संकेत देता है कि दर्ज और पुष्टि की गई घटनाओं के बावजूद, ज़मीनी स्तर पर आर्थिक दंड का असर अभी सीमित है। आलोचकों का कहना है कि बिना समयबद्ध वसूली और कड़ी जवाबदेही के, मुआवजा प्रणाली पूरी तरह प्रभावी नहीं बन पाती।

आगे क्या होगा

पंजाब में धान की कटाई का मुख्य सीजन अक्टूबर से शुरू होता है, जब पराली जलाने की घटनाओं में तेज़ी आने की आशंका होती है। PPCB की यह रिपोर्ट सीजन के शुरुआती आंकड़ों पर आधारित है और बोर्ड नियमित अंतराल पर एटीआर अपडेट जारी करता रहेगा। दिल्ली-एनसीआर और समूचे उत्तर भारत में वायु प्रदूषण पर सीधा असर डालने वाले इन आंकड़ों पर केंद्रीय और राज्य पर्यावरण एजेंसियों की निगाहें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब तक मुआवजा प्रणाली किसानों के व्यवहार को बदलने में सीमित रहेगी। गौरतलब है कि यह रिपोर्ट अक्टूबर के मुख्य कटाई सीजन से पहले की है, जब घटनाओं की संख्या तेज़ी से बढ़ सकती है। असली परीक्षा यह है कि क्या प्रशासन सीजन के चरम पर वसूली और जवाबदेही दोनों सुनिश्चित कर पाएगा।
RashtraPress
25 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब में इस सीजन पराली जलाने के कितने मामले दर्ज हुए हैं?
PPCB की 24 सितंबर 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में इस सीजन अब तक कुल 27 घटनाएं दर्ज हुई हैं। 21 खेतों का निरीक्षण हुआ और 10 जगहों पर पराली जलाने की पुष्टि हुई है।
PPCB ने पराली जलाने पर कितना जुर्माना लगाया और कितना वसूला गया?
7 मामलों में कुल ₹35,000 का पर्यावरण मुआवजा लगाया गया है। इनमें से अब तक केवल ₹10,000 की वसूली हो सकी है, जो कुल जुर्माने का 28.5% से भी कम है।
पटियाला में पराली जलाने के मामले में क्या कार्रवाई हुई?
पटियाला में एक मामला दर्ज हुआ, निरीक्षण में पुष्टि हुई और ₹5,000 का जुर्माना लगाया गया। हालांकि अभी तक जुर्माने की वसूली शून्य है और न कोई एफआईआर दर्ज हुई है, न ही नोडल या पर्यवेक्षी अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है।
किस जिले में पराली जलाने के सबसे ज्यादा मामले दर्ज हुए हैं?
अमृतसर में इस सीजन सबसे अधिक 13 मामले दर्ज हुए हैं। 11 खेतों का निरीक्षण हुआ, 4 जगहों पर पुष्टि हुई और एक मामले में ₹5,000 जुर्माना लगाकर वसूल भी कर लिया गया।
पराली जलाने की निगरानी कैसे की जाती है?
इसरो के मानक प्रोटोकॉल के तहत पराली जलाने की घटनाओं की निगरानी उपग्रहों (सैटेलाइट्स) के माध्यम से की जाती है। सैटेलाइट संकेत मिलने के बाद जिला अधिकारी मौके पर निरीक्षण करते हैं और पुष्टि होने पर पर्यावरण मुआवजा लगाया जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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