पंजाब में पराली जलाने के 32 मामले, इसरो सैटेलाइट से निगरानी; 5 FIR दर्ज, ₹40,000 का पर्यावरण जुर्माना
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं पर इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) के सैटेलाइट प्रोटोकॉल के ज़रिए निगरानी की जा रही है, और 26 सितंबर 2026 तक कुल 32 घटनाएँ दर्ज की गई हैं। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के आँकड़ों के अनुसार, इनमें से 25 मामलों का ज़मीनी स्तर पर निरीक्षण किया गया और 12 स्थानों पर आग की मौके पर पुष्टि भी हुई।
मुख्य कार्रवाई और जुर्माने का ब्यौरा
आयोग ने 8 मामलों में पर्यावरणीय मुआवज़ा लगाया है, जिसकी कुल राशि ₹40,000 है। इनमें से अब तक ₹10,000 की वसूली हो चुकी है, जबकि शेष राशि की वसूली प्रक्रिया जारी बताई जा रही है। इसके साथ ही पराली जलाने के मामलों में 5 प्राथमिकियाँ (FIR) भी दर्ज की गई हैं।
इसके अतिरिक्त, 4 मामलों में संबंधित नोडल एवं पर्यवेक्षी अधिकारियों को चेतावनी नोटिस जारी किए गए हैं, जो यह दर्शाता है कि आयोग केवल किसानों पर नहीं, बल्कि निगरानी में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई कर रहा है।
जिलावार स्थिति: अमृतसर सबसे आगे
अमृतसर में सबसे अधिक 18 मामले दर्ज हुए हैं। इनमें से 11 मामलों का फील्ड निरीक्षण किया गया और 4 की मौके पर पुष्टि हुई। आयोग ने इन मामलों में ₹5,000 का पर्यावरणीय मुआवज़ा लगाया और वसूल भी किया।
तरनतारन जिले में 5 मामले सामने आए, जिनमें 2 की मौके पर पुष्टि हुई। इन दोनों मामलों में कुल ₹10,000 का मुआवज़ा वसूल किया गया है और 2 FIR भी दर्ज की गई हैं।
फिरोजपुर जिले में 4 मामले आए और सभी का निरीक्षण तथा पुष्टि की गई। इनमें 3 मामलों में कुल ₹15,000 का पर्यावरणीय मुआवज़ा लगाया गया, जिसमें से ₹5,000 वसूल किए जा चुके हैं। फिरोजपुर में 3 FIR दर्ज हुई हैं और 4 चेतावनी नोटिस जारी किए गए हैं।
अन्य जिलों की स्थिति
सैटेलाइट प्रोटोकॉल के अंतर्गत गुरदासपुर जिले में 2 मामले दर्ज हुए, जबकि होशियारपुर, पटियाला और एसबीएस नगर में एक-एक मामला सामने आया। होशियारपुर और पटियाला में पुष्टि के बाद प्रत्येक मामले में ₹5,000 का पर्यावरणीय मुआवज़ा लगाया गया है।
पटियाला जिले की घटना का निरीक्षण किया गया और मौके पर पुष्टि भी हुई, लेकिन आयोग की रिपोर्ट के अनुसार अभी तक ₹5,000 के लगाए गए मुआवज़े की वसूली शून्य दर्ज है।
पराली प्रबंधन की व्यापक चुनौती
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर भारत में खरीफ फसल की कटाई का मौसम शुरू होने वाला है और अक्टूबर-नवंबर में पराली जलाने की घटनाओं में तेज़ वृद्धि देखी जाती रही है। गौरतलब है कि दिल्ली-NCR की वायु गुणवत्ता पर पंजाब की पराली जलाने की घटनाओं का सीधा असर पड़ता है, जिसे लेकर सर्वोच्च न्यायालय भी चिंता व्यक्त कर चुका है। CAQM की यह कार्रवाई यह संकेत देती है कि इस बार निगरानी तंत्र पहले से सक्रिय किया गया है।