पंजाब में पराली जलाने के 1,007 मामले दर्ज, तरनतारन 397 घटनाओं के साथ सबसे आगे
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 29 अक्टूबर 2026 तक पराली जलाने की कुल 1,007 घटनाएँ दर्ज की गई हैं। इनमें तरनतारन जिला सर्वाधिक 397 मामलों के साथ सूची में शीर्ष पर है, जो कि राज्य के कुल मामलों का लगभग 39 प्रतिशत है। धान की कटाई के मौसम में यह आँकड़ा वायु गुणवत्ता और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज़ से गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।
जिला-वार स्थिति: तीन जिलों में ही 672 घटनाएँ
पीपीसीबी की 29 अक्टूबर तक की जिला-वार रिपोर्ट के अनुसार, तरनतारन में 397, अमृतसर में 171 और फिरोजपुर में 104 मामले सामने आए हैं। इन तीन जिलों में मिलाकर 672 घटनाएँ दर्ज हुई हैं, जो राज्य की कुल संख्या के दो-तिहाई से भी अधिक है।
गुरदासपुर में 72, कपूरथला में 63, बठिंडा में 31, फाजिल्का में 28, जालंधर में 22 और फरीदकोट में 21 मामले दर्ज किए गए। पटियाला और होशियारपुर में क्रमशः 16 और 12 घटनाएँ रिकॉर्ड की गईं, जबकि संगरूर में भी 12 और फतेहगढ़ साहिब में 11 मामले सामने आए।
मुक्तसर में 9, मोगा, बरनाला और एसएएस नगर में 7-7, लुधियाना में 6, मलेरकोटला में 5, एसबीएस नगर में 3, रूपनगर में 2 और पठानकोट में 1 घटना दर्ज हुई। रिपोर्ट के अनुसार, मानसा जिले में पराली जलाने का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ।
पटियाला में कार्रवाई: ₹35,000 जुर्माना, ₹20,000 वसूली
पटियाला जिले में अब तक 16 मामले सामने आए हैं। अधिकारियों ने 14 स्थानों का निरीक्षण किया, जिनमें से 7 स्थानों पर पराली जलाए जाने की पुष्टि हुई। 6 मामलों में पर्यावरण मुआवज़ा लगाया गया, जो कुल ₹35,000 है, जिसमें से ₹20,000 की वसूली हो चुकी है।
राज्य-स्तरीय कार्रवाई: जुर्माना, FIR और रेड एंट्री
पीपीसीबी के अनुसार, राज्य भर में दर्ज 1,007 घटनाओं में से अधिकारियों ने 778 स्थानों का निरीक्षण किया और 379 जगहों पर पराली जलाने की पुष्टि की। इसके अतिरिक्त, नोडल अधिकारियों को 26 खेतों में पराली जलाने के निशान मिले।
कार्रवाई के तहत 349 मामलों में पर्यावरण मुआवज़ा लगाया गया। कुल ₹17.50 लाख का जुर्माना निर्धारित किया गया था, जिसमें से ₹13.15 लाख की वसूली हो चुकी है। इस संबंध में 246 FIR दर्ज की गई हैं और 297 खेतों के राजस्व रिकॉर्ड में 'रेड एंट्री' की गई है। नोडल व पर्यवेक्षी अधिकारियों को 426 चेतावनियाँ और 'कारण बताओ नोटिस' जारी किए गए हैं।
CAQM कानून के तहत बड़ी कार्रवाई अभी शून्य
गौरतलब है कि 'कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट' (CAQM) अधिनियम की धारा 14 के तहत चार्जशीट दाखिल करने, कानूनी कार्रवाई और अधिकारियों को निलंबित करने के मामलों की संख्या अब तक शून्य रही है। यह स्थिति तब है जब राज्य में पराली जलाने की घटनाएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं और यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली-NCR की वायु गुणवत्ता सूचकांक पहले से ही 'गंभीर' श्रेणी में दर्ज हो रहा है।
आगामी दिनों में प्रशासन पर यह दबाव और बढ़ सकता है कि वह न केवल मुआवज़ा वसूली बल्कि निवारक उपायों को भी अधिक प्रभावी बनाए।