30 अक्टूबर 2026
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पंजाब में पराली जलाने के 1,007 मामले दर्ज, तरनतारन 397 घटनाओं के साथ सबसे आगे

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पंजाब में पराली जलाने के 1,007 मामले दर्ज, तरनतारन 397 घटनाओं के साथ सबसे आगे

सारांश

पंजाब में पराली जलाने का संकट गहराया — 29 अक्टूबर तक 1,007 घटनाएँ, तरनतारन अकेले 39% मामलों का केंद्र। ₹17.50 लाख जुर्माना और 246 FIR के बावजूद CAQM की धारा 14 के तहत एक भी चार्जशीट नहीं।

मुख्य बातें

पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) के अनुसार 29 अक्टूबर 2026 तक राज्य में पराली जलाने की कुल 1,007 घटनाएँ दर्ज।
तरनतारन में सर्वाधिक 397 मामले — राज्य के कुल मामलों का लगभग 39% ; अमृतसर (171) और फिरोजपुर (104) का स्थान क्रमशः दूसरा और तीसरा।
राज्य भर में 349 मामलों में ₹17.50 लाख जुर्माना निर्धारित; ₹13.15 लाख वसूल हुए।
246 FIR दर्ज और 297 खेतों के राजस्व रिकॉर्ड में 'रेड एंट्री'।
CAQM अधिनियम की धारा 14 के तहत चार्जशीट, कानूनी कार्रवाई और निलंबन की संख्या अब तक शून्य ।
मानसा जिले में पराली जलाने का एक भी मामला दर्ज नहीं।

पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 29 अक्टूबर 2026 तक पराली जलाने की कुल 1,007 घटनाएँ दर्ज की गई हैं। इनमें तरनतारन जिला सर्वाधिक 397 मामलों के साथ सूची में शीर्ष पर है, जो कि राज्य के कुल मामलों का लगभग 39 प्रतिशत है। धान की कटाई के मौसम में यह आँकड़ा वायु गुणवत्ता और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज़ से गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।

जिला-वार स्थिति: तीन जिलों में ही 672 घटनाएँ

पीपीसीबी की 29 अक्टूबर तक की जिला-वार रिपोर्ट के अनुसार, तरनतारन में 397, अमृतसर में 171 और फिरोजपुर में 104 मामले सामने आए हैं। इन तीन जिलों में मिलाकर 672 घटनाएँ दर्ज हुई हैं, जो राज्य की कुल संख्या के दो-तिहाई से भी अधिक है।

गुरदासपुर में 72, कपूरथला में 63, बठिंडा में 31, फाजिल्का में 28, जालंधर में 22 और फरीदकोट में 21 मामले दर्ज किए गए। पटियाला और होशियारपुर में क्रमशः 16 और 12 घटनाएँ रिकॉर्ड की गईं, जबकि संगरूर में भी 12 और फतेहगढ़ साहिब में 11 मामले सामने आए।

मुक्तसर में 9, मोगा, बरनाला और एसएएस नगर में 7-7, लुधियाना में 6, मलेरकोटला में 5, एसबीएस नगर में 3, रूपनगर में 2 और पठानकोट में 1 घटना दर्ज हुई। रिपोर्ट के अनुसार, मानसा जिले में पराली जलाने का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ।

पटियाला में कार्रवाई: ₹35,000 जुर्माना, ₹20,000 वसूली

पटियाला जिले में अब तक 16 मामले सामने आए हैं। अधिकारियों ने 14 स्थानों का निरीक्षण किया, जिनमें से 7 स्थानों पर पराली जलाए जाने की पुष्टि हुई। 6 मामलों में पर्यावरण मुआवज़ा लगाया गया, जो कुल ₹35,000 है, जिसमें से ₹20,000 की वसूली हो चुकी है।

राज्य-स्तरीय कार्रवाई: जुर्माना, FIR और रेड एंट्री

पीपीसीबी के अनुसार, राज्य भर में दर्ज 1,007 घटनाओं में से अधिकारियों ने 778 स्थानों का निरीक्षण किया और 379 जगहों पर पराली जलाने की पुष्टि की। इसके अतिरिक्त, नोडल अधिकारियों को 26 खेतों में पराली जलाने के निशान मिले।

कार्रवाई के तहत 349 मामलों में पर्यावरण मुआवज़ा लगाया गया। कुल ₹17.50 लाख का जुर्माना निर्धारित किया गया था, जिसमें से ₹13.15 लाख की वसूली हो चुकी है। इस संबंध में 246 FIR दर्ज की गई हैं और 297 खेतों के राजस्व रिकॉर्ड में 'रेड एंट्री' की गई है। नोडल व पर्यवेक्षी अधिकारियों को 426 चेतावनियाँ और 'कारण बताओ नोटिस' जारी किए गए हैं।

CAQM कानून के तहत बड़ी कार्रवाई अभी शून्य

गौरतलब है कि 'कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट' (CAQM) अधिनियम की धारा 14 के तहत चार्जशीट दाखिल करने, कानूनी कार्रवाई और अधिकारियों को निलंबित करने के मामलों की संख्या अब तक शून्य रही है। यह स्थिति तब है जब राज्य में पराली जलाने की घटनाएँ तेज़ी से बढ़ रही हैं और यह ऐसे समय में आया है जब दिल्ली-NCR की वायु गुणवत्ता सूचकांक पहले से ही 'गंभीर' श्रेणी में दर्ज हो रहा है।

आगामी दिनों में प्रशासन पर यह दबाव और बढ़ सकता है कि वह न केवल मुआवज़ा वसूली बल्कि निवारक उपायों को भी अधिक प्रभावी बनाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

007 घटनाएँ और ₹17.50 लाख जुर्माने के बावजूद CAQM की धारा 14 के तहत एक भी चार्जशीट दाखिल न होना यह बताता है कि सख्त कानून होना और उसे लागू करना दो अलग-अलग बातें हैं। तरनतारन में राज्य के लगभग 40% मामले सिमटे होना भी स्थानीय प्रशासनिक विफलता का संकेत है, न कि महज़ भौगोलिक संयोग। जुर्माना-और-FIR मॉडल अब तक पराली जलाने की प्रवृत्ति को नहीं तोड़ पाया है; जब तक निवारक प्रोत्साहन — जैसे खड़ी फसल प्रबंधन के लिए सब्सिडी — और जवाबदेही एक साथ नहीं चलेंगे, यह आँकड़ा हर साल नई सुर्खी बनता रहेगा।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंजाब में पराली जलाने की कितनी घटनाएँ दर्ज हुई हैं?
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार 29 अक्टूबर 2026 तक राज्य में पराली जलाने की कुल 1,007 घटनाएँ दर्ज की गई हैं। इनमें तरनतारन जिला 397 मामलों के साथ सबसे ऊपर है।
तरनतारन में पराली जलाने के इतने मामले क्यों हैं?
पीपीसीबी की रिपोर्ट के अनुसार तरनतारन में राज्य के कुल मामलों का लगभग 39% दर्ज हुआ है, जो इसे सबसे अधिक प्रभावित जिला बनाता है। इसके बाद अमृतसर (171) और फिरोजपुर (104) का स्थान है।
पराली जलाने पर कितना जुर्माना लगाया गया है?
राज्य भर में 349 मामलों में पर्यावरण मुआवज़े के रूप में कुल ₹17.50 लाख जुर्माना लगाया गया है, जिसमें से ₹13.15 लाख की वसूली हो चुकी है। इसके अलावा 246 FIR दर्ज की गई हैं और 297 खेतों के राजस्व रिकॉर्ड में 'रेड एंट्री' की गई है।
CAQM अधिनियम की धारा 14 के तहत पंजाब में क्या कार्रवाई हुई है?
रिपोर्ट के अनुसार CAQM अधिनियम की धारा 14 के तहत चार्जशीट दाखिल करने, औपचारिक कानूनी कार्रवाई और अधिकारियों के निलंबन की संख्या अब तक शून्य रही है। यह तथ्य कानून की कड़ाई पर सवाल उठाता है।
किस जिले में पराली जलाने का एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ?
पीपीसीबी की रिपोर्ट के अनुसार मानसा जिले में 29 अक्टूबर 2026 तक पराली जलाने की एक भी घटना दर्ज नहीं की गई। यह राज्य के बाकी जिलों की तुलना में उल्लेखनीय स्थिति है।
राष्ट्र प्रेस
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