सेंसेक्स 206 अंक उछला, 74,357 के उच्च पर; ट्रेंट 5.8% चढ़ा, तेल और भू-राजनीति से दबाव
सारांश
मुख्य बातें
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को कमज़ोर वैश्विक संकेतों के बीच सपाट शुरुआत के बाद इंट्राडे में 206.51 अंक यानी 0.27 प्रतिशत की बढ़त दर्ज कर 74,357.55 का उच्चतम स्तर छुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी 0.25 प्रतिशत की तेज़ी के साथ 22,994.70 पर पहुँचा। कच्चे तेल की तेज़ कीमतों और अमेरिका-ईरान भू-राजनीतिक तनाव की छाया के बावजूद घरेलू खरीदारी ने बाज़ार को सहारा दिया।
बाज़ार का शुरुआती रुख
सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 74,151.04 के मुकाबले 48.65 अंक की मामूली बढ़त के साथ 74,199.69 पर खुला, जबकि निफ्टी 50 पिछले बंद 22,936.75 से 27.75 अंक यानी 0.12 प्रतिशत चढ़कर 22,964.50 पर खुला। सपाट शुरुआत के बाद आईटी और फार्मा शेयरों में आई खरीदारी ने सूचकांकों को ऊपर धकेला।
शीर्ष लाभ और हानि वाले शेयर
निफ्टी 50 इंडेक्स में ट्रेंट सबसे बड़ा लाभार्थी रहा, जिसके शेयर 5.8 प्रतिशत उछले। इसके पीछे इंडिगो, सन फार्मा, इंफोसिस, इटरनल और टीसीएस का स्थान रहा।
दूसरी तरफ, कोल इंडिया, बीईएल और श्रीराम फाइनेंस के शेयरों में सबसे ज़्यादा गिरावट दर्ज की गई। व्यापक बाज़ार में निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 क्रमशः 0.54 प्रतिशत और 0.86 प्रतिशत नीचे आए।
सेक्टरवार प्रदर्शन
निफ्टी आईटी और निफ्टी फार्मा में 1 प्रतिशत से अधिक की तेज़ी देखी गई, जो इस सत्र के सबसे मज़बूत सेक्टर रहे। इसके विपरीत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में सबसे तीव्र गिरावट रही।
निफ्टी मेटल, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी ऑटो, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी रियल्टी में भी दबाव बना रहा। बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों के अपेक्षा से कमज़ोर तिमाही नतीजों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बढ़ते खर्च को लेकर चिंताओं ने एशियाई बाज़ारों पर भी दबाव बनाए रखा।
कच्चा तेल और भू-राजनीतिक दबाव
विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल बाज़ार की सबसे बड़ी चुनौती कच्चे तेल की ऊँची कीमतें हैं। ब्रेंट क्रूड $117 प्रति बैरल के पार पहुँच चुका है, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) $104.99 प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार, 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई फिर शुरू होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे ऊर्जा बाज़ारों में अनिश्चितता बनी हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें स्थिर रखने की घोषणा के अगले दिन अमेरिकी बाज़ार भी गिरावट के साथ बंद हुए थे।
FII-DII प्रवाह और विशेषज्ञ राय
गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने ₹943 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की, जिससे उनकी लगातार दो सत्रों की खरीदारी का सिलसिला टूट गया। दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने लगातार दूसरे दिन ₹1,924 करोड़ के शेयर खरीदे।
विश्लेषकों के मुताबिक, पिछले सप्ताह मार्जिन फंडिंग पर आधारित लंबी पोज़िशनों की जबरन बिकवाली के बाद स्मॉलकैप शेयरों में आई तेज़ गिरावट के बाद अब उस सेगमेंट में कुछ रिकवरी दिख रही है। FII की बिकवाली के चलते कई लार्जकैप शेयर आकर्षक मूल्यांकन पर उपलब्ध हो गए हैं और वहाँ वैल्यू-बायिंग के अवसर बन रहे हैं। यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊँची बनी रहीं, तो आने वाले सत्रों में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है।