30 अक्टूबर 2026
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सेंसेक्स 206 अंक उछला, 74,357 के उच्च पर; ट्रेंट 5.8% चढ़ा, तेल और भू-राजनीति से दबाव

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सेंसेक्स 206 अंक उछला, 74,357 के उच्च पर; ट्रेंट 5.8% चढ़ा, तेल और भू-राजनीति से दबाव

सारांश

वैश्विक दबाव के बावजूद भारतीय शेयर बाज़ार ने शुक्रवार को पलटवार किया — सेंसेक्स 206 अंक उछलकर 74,357 के इंट्राडे उच्च पर पहुँचा। ट्रेंट 5.8% उछला, आईटी-फार्मा में एक फीसदी से ज़्यादा की बढ़त रही, लेकिन ब्रेंट क्रूड का $117 पार जाना और अमेरिका-ईरान तनाव बाज़ार की मुख्य चिंता बने हुए हैं।

मुख्य बातें

BSE सेंसेक्स ने 30 अक्टूबर 2026 को इंट्राडे में 206.51 अंक (0.27%) की बढ़त के साथ 74,357.55 का उच्चतम स्तर छुआ।
NSE निफ्टी 50 0.25% उछलकर 22,994.70 पर पहुँचा; बाज़ार 74,199.69 पर खुला था।
ट्रेंट निफ्टी 50 का शीर्ष लाभार्थी रहा, शेयर 5.8% उछले; कोल इंडिया , बीईएल , श्रीराम फाइनेंस शीर्ष हारने वाले।
निफ्टी आईटी और निफ्टी फार्मा में 1% से अधिक की बढ़त; निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 क्रमशः 0.54% और 0.86% नीचे।
FII ने गुरुवार को ₹943 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की; DII ने ₹1,924 करोड़ की खरीदारी की।
ब्रेंट क्रूड $117 प्रति बैरल पार; WTI $104.99 प्रति बैरल पर — ऊर्जा कीमतें बाज़ार के लिए बड़ा जोखिम।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 को कमज़ोर वैश्विक संकेतों के बीच सपाट शुरुआत के बाद इंट्राडे में 206.51 अंक यानी 0.27 प्रतिशत की बढ़त दर्ज कर 74,357.55 का उच्चतम स्तर छुआ। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी 0.25 प्रतिशत की तेज़ी के साथ 22,994.70 पर पहुँचा। कच्चे तेल की तेज़ कीमतों और अमेरिका-ईरान भू-राजनीतिक तनाव की छाया के बावजूद घरेलू खरीदारी ने बाज़ार को सहारा दिया।

बाज़ार का शुरुआती रुख

सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 74,151.04 के मुकाबले 48.65 अंक की मामूली बढ़त के साथ 74,199.69 पर खुला, जबकि निफ्टी 50 पिछले बंद 22,936.75 से 27.75 अंक यानी 0.12 प्रतिशत चढ़कर 22,964.50 पर खुला। सपाट शुरुआत के बाद आईटी और फार्मा शेयरों में आई खरीदारी ने सूचकांकों को ऊपर धकेला।

शीर्ष लाभ और हानि वाले शेयर

निफ्टी 50 इंडेक्स में ट्रेंट सबसे बड़ा लाभार्थी रहा, जिसके शेयर 5.8 प्रतिशत उछले। इसके पीछे इंडिगो, सन फार्मा, इंफोसिस, इटरनल और टीसीएस का स्थान रहा।

दूसरी तरफ, कोल इंडिया, बीईएल और श्रीराम फाइनेंस के शेयरों में सबसे ज़्यादा गिरावट दर्ज की गई। व्यापक बाज़ार में निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 क्रमशः 0.54 प्रतिशत और 0.86 प्रतिशत नीचे आए।

सेक्टरवार प्रदर्शन

निफ्टी आईटी और निफ्टी फार्मा में 1 प्रतिशत से अधिक की तेज़ी देखी गई, जो इस सत्र के सबसे मज़बूत सेक्टर रहे। इसके विपरीत, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में सबसे तीव्र गिरावट रही।

निफ्टी मेटल, निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी ऑटो, निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी रियल्टी में भी दबाव बना रहा। बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों के अपेक्षा से कमज़ोर तिमाही नतीजों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बढ़ते खर्च को लेकर चिंताओं ने एशियाई बाज़ारों पर भी दबाव बनाए रखा।

कच्चा तेल और भू-राजनीतिक दबाव

विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल बाज़ार की सबसे बड़ी चुनौती कच्चे तेल की ऊँची कीमतें हैं। ब्रेंट क्रूड $117 प्रति बैरल के पार पहुँच चुका है, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) $104.99 प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है।

रिपोर्टों के अनुसार, 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई फिर शुरू होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे ऊर्जा बाज़ारों में अनिश्चितता बनी हुई है। यह ऐसे समय में आया है जब फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें स्थिर रखने की घोषणा के अगले दिन अमेरिकी बाज़ार भी गिरावट के साथ बंद हुए थे।

FII-DII प्रवाह और विशेषज्ञ राय

गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने ₹943 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की, जिससे उनकी लगातार दो सत्रों की खरीदारी का सिलसिला टूट गया। दूसरी ओर घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने लगातार दूसरे दिन ₹1,924 करोड़ के शेयर खरीदे।

विश्लेषकों के मुताबिक, पिछले सप्ताह मार्जिन फंडिंग पर आधारित लंबी पोज़िशनों की जबरन बिकवाली के बाद स्मॉलकैप शेयरों में आई तेज़ गिरावट के बाद अब उस सेगमेंट में कुछ रिकवरी दिख रही है। FII की बिकवाली के चलते कई लार्जकैप शेयर आकर्षक मूल्यांकन पर उपलब्ध हो गए हैं और वहाँ वैल्यू-बायिंग के अवसर बन रहे हैं। यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊँची बनी रहीं, तो आने वाले सत्रों में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली तस्वीर मिड और स्मॉलकैप के 0.5–0.9% टूटने में छिपी है — जो बताती है कि बाज़ार की यह तेज़ी चुनिंदा शेयरों तक सीमित है, व्यापक नहीं। ब्रेंट क्रूड का $117 पार जाना और अमेरिका-ईरान की तनातनी भारत के आयात बिल और चालू खाते के घाटे पर सीधा असर डालती है, जिसकी चर्चा बाज़ार विश्लेषण में प्रायः कम होती है। DII की ₹1,924 करोड़ की खरीदारी निश्चित रूप से बफर है, लेकिन FII की वापसी तब तक टिकाऊ नहीं मानी जा सकती जब तक वैश्विक जोखिम-धारणा स्थिर न हो।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

30 अक्टूबर 2026 को सेंसेक्स कितना बढ़ा?
30 अक्टूबर 2026 को BSE सेंसेक्स ने इंट्राडे में 206.51 अंक (0.27%) की बढ़त दर्ज कर 74,357.55 का उच्चतम स्तर छुआ। बाज़ार 74,199.69 पर खुला था, जबकि पिछला बंद 74,151.04 था।
आज निफ्टी 50 में सबसे ज़्यादा बढ़त किस शेयर में रही?
निफ्टी 50 में ट्रेंट के शेयर 5.8% उछलकर सबसे बड़े लाभार्थी रहे। इसके बाद इंडिगो, सन फार्मा, इंफोसिस, इटरनल और टीसीएस का स्थान रहा।
कच्चे तेल की कीमतें भारतीय बाज़ार को कैसे प्रभावित कर रही हैं?
ब्रेंट क्रूड $117 प्रति बैरल के ऊपर पहुँच चुका है और WTI $104.99 प्रति बैरल पर है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि ये कीमतें लंबे समय तक ऊँची बनी रहीं तो भारतीय बाज़ारों में उतार-चढ़ाव और बढ़ सकता है, क्योंकि इससे आयात बिल और महँगाई दोनों पर दबाव पड़ता है।
FII और DII ने इस सत्र में क्या किया?
गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने ₹943 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की, जिससे लगातार दो सत्रों की खरीदारी का सिलसिला टूटा। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने लगातार दूसरे दिन ₹1,924 करोड़ के शेयर खरीदे।
अमेरिका-ईरान तनाव का भारतीय बाज़ार पर क्या असर है?
रिपोर्टों के अनुसार, 3 नवंबर को होने वाले अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई फिर शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। इससे ऊर्जा बाज़ारों में अनिश्चितता बनी हुई है और कच्चे तेल की कीमतें ऊँचे स्तर पर बनी हैं, जो भारतीय बाज़ार के लिए बड़ा जोखिम माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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