सेंसेक्स 299 अंक उछला, 74,828 पर बंद; फ्लैश PMI और तेल स्थिरता से बाजार में तेजी
सारांश
मुख्य बातें
BSE सेंसेक्स बुधवार, 23 सितंबर 2026 को 299.17 अंक यानी 0.40 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,828.25 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी50 117.80 अंक यानी 0.50 प्रतिशत उछलकर 23,446.80 पर पहुँचा। अमेरिका-ईरान वार्ता की उम्मीदों के बीच कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के आसपास स्थिर रहीं और सितंबर के फ्लैश PMI के उम्मीद से बेहतर आँकड़ों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया।
मुख्य सूचकांकों का प्रदर्शन
व्यापक बाजारों में भी मजबूती देखी गई। निफ्टी मिडकैप 0.70 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 0.89 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए, जो दर्शाता है कि केवल बड़े शेयरों तक सीमित न रहकर बाजार में व्यापक भागीदारी रही। पिछले सत्र की गिरावट से उबरते हुए बाजार ने दिनभर उतार-चढ़ाव के बावजूद हरे निशान में बंद होने में सफलता पाई।
सेक्टरवार प्रदर्शन
निफ्टी मेटल ने 2.4 प्रतिशत की उछाल के साथ सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। इसके अलावा निफ्टी एफएमसीजी, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी सीमेंट ने भी 1 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की।
दूसरी ओर, निफ्टी आईटी और निफ्टी मीडिया क्रमशः 0.87 प्रतिशत और 0.50 प्रतिशत की गिरावट के साथ सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले सेक्टर रहे। आईटी शेयरों की इस सुस्ती के चलते बेंचमार्क इंडेक्स की बढ़त ऊपरी स्तरों पर सीमित रही।
टॉप गेनर्स और लूज़र्स
निफ्टी50 में बजाज फाइनेंस, हिंडाल्को, टाटा स्टील, अपोलो हॉस्पिटल्स और JSW स्टील शीर्ष लाभार्थी रहे। ग्रासिम, नेस्ले इंडिया, ITC, L&T, पावरग्रिड और अदाणी पोर्ट्स में भी अच्छी तेजी दर्ज हुई।
विपरीत पक्ष में HCL टेक, टाइटन, इंफोसिस, कोल इंडिया, TCS, विप्रो, NTPC, BEL और ट्रेंट सबसे अधिक दबाव में रहे।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, दिनभर के उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय बाजार ने कच्चे तेल की अंतरदिवसीय तेजी को नजरअंदाज किया और घरेलू विकास की मजबूती पर ध्यान केंद्रित रखा। यह ऐसे समय में आया है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा में भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के कारण तेल में 'रिस्क प्रीमियम' बना रहा, जिससे मजबूत होते अमेरिकी डॉलर के बीच भारतीय रुपए पर कुछ दबाव पड़ा।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि सितंबर के फ्लैश PMI के उम्मीद से बेहतर रहने से यह भरोसा मिला कि महंगाई का दबाव बढ़े बिना आर्थिक गतिविधियाँ मजबूत बनी हुई हैं। इस सकारात्मक समष्टि-आर्थिक माहौल ने एशियाई बाजारों की बढ़त के अनुरूप घरेलू शेयरों में व्यापक खरीदारी को प्रोत्साहित किया।
आगे की दिशा
बाजार विश्लेषकों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व के भविष्य के संकेतों और अमेरिका-ईरान वार्ता के नतीजों पर टिकी है, जिनका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और रुपए पर पड़ेगा। घरेलू स्तर पर PMI के मजबूत आँकड़े और मेटल व बैंकिंग सेक्टर की अगुवाई में बाजार में तेजी बनाए रखने की क्षमता दिख रही है, लेकिन आईटी सेक्टर की कमजोरी पर नजर बनाए रखना होगा।