9 अक्टूबर 2026
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सेंसेक्स 452 अंक चढ़ा, 72,046 के पास कारोबार; आईटी शेयरों में 3% से ज़्यादा की तेजी

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सेंसेक्स 452 अंक चढ़ा, 72,046 के पास कारोबार; आईटी शेयरों में 3% से ज़्यादा की तेजी

सारांश

गिरावट के बाद शुक्रवार को बाज़ार ने वापसी की — सेंसेक्स 452 अंक चढ़ा और निफ्टी आईटी में 3% से अधिक की उछाल आई। लेकिन एफआईआई की ₹36,210 करोड़ की अक्तूबर बिकवाली और 103 डॉलर से ऊपर कच्चा तेल अभी भी बड़े जोखिम बने हुए हैं।

मुख्य बातें

बीएसई सेंसेक्स शुक्रवार को 452.95 अंक (0.63%) की बढ़त के साथ 72,046 के करीब कारोबार करता नज़र आया।
निफ्टी 50 167.05 अंक (0.75%) उछलकर 22,398 के स्तर पर रहा।
निफ्टी आईटी इंडेक्स में 3 प्रतिशत से अधिक की सबसे तेज़ सेक्टोरल बढ़त दर्ज हुई; टीसीएस, इंफोसिस, एचसीएल टेक शीर्ष लाभार्थी रहे।
एफआईआई ने गुरुवार को ₹12,943 करोड़ के शेयर बेचे; अक्तूबर 2026 में कुल बिकवाली ₹36,210 करोड़ पहुँची।
ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है; मध्य पूर्व तनाव से आपूर्ति-जोखिम प्रीमियम बहाल।
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए 22,140 अहम समर्थन और 22,600 अगला लक्ष्य।

बीएसई सेंसेक्स शुक्रवार, 9 अक्तूबर को पिछले सत्र की गिरावट से उबरते हुए 452.95 अंक (0.63 प्रतिशत) की बढ़त के साथ 72,046 के करीब कारोबार करता नज़र आया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 भी 167.05 अंक (0.75 प्रतिशत) उछलकर 22,398 के स्तर पर पहुँच गया। सप्ताह के अंतिम कारोबारी सत्र में निफ्टी आईटी इंडेक्स 3 प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ सबसे बड़ा लाभार्थी रहा।

बाज़ार का ताज़ा हाल

सेंसेक्स 183.43 अंक (0.26 प्रतिशत) की बढ़त के साथ 71,776.67 पर खुला, जबकि निफ्टी 83.15 अंक (0.37 प्रतिशत) चढ़कर 22,314.95 पर खुला। कारोबार के दौरान दोनों सूचकांकों में तेजी और बढ़ती गई।

व्यापक बाज़ार में भी सकारात्मक संकेत रहे — निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स करीब 1 प्रतिशत चढ़ा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.01 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज हुई।

सेक्टरवार प्रदर्शन

सेक्टरवार नज़रिए से देखें तो निफ्टी आईटी में सबसे तेज उछाल (3 प्रतिशत से अधिक) देखा गया। इसके अलावा निफ्टी मीडिया, निफ्टी पीएसयू बैंक, निफ्टी एफएमसीजी और निफ्टी प्राइवेट बैंक में भी 1 प्रतिशत से ज़्यादा की बढ़त रही। दूसरी ओर, निफ्टी फार्मा और निफ्टी ऑयल एंड गैस सूचकांक दबाव में रहे।

निफ्टी50 के शीर्ष लाभार्थियों में टीसीएस, इंफोसिस, एचडीएफसी लाइफ, आयशर मोटर्स, अपोलो हॉस्पिटल्स और एचसीएल टेक शामिल रहे। वहीं बीईएल, रिलायंस, सिप्ला, बीएसई और कोल इंडिया के शेयरों में सबसे ज़्यादा गिरावट दर्ज हुई।

वैश्विक संकेत और कच्चे तेल का दबाव

वैश्विक मोर्चे पर संकेत अभी भी मिश्रित बने हुए हैं। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण आपूर्ति-जोखिम प्रीमियम बहाल होने से ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, ऊँची कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड अभी भी निवेशकों के लिए चिंता का विषय हैं। उनका कहना है कि इन परिस्थितियों में निकट भविष्य में बाज़ार की संरचना 'रैली पर बिकवाली' वाली बनी रह सकती है।

हालाँकि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई कुछ नरमी से बाज़ार को सीमित राहत मिली है और कारोबारी धारणा को थोड़ा सहारा मिला है।

एफआईआई की बिकवाली और डीआईआई की खरीद

विश्लेषकों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली ने बाज़ार पर दबाव बनाए रखा है — यहाँ तक कि मजबूत बुनियादी वाली कंपनियों के शेयरों में भी बिकवाली हो रही है। गुरुवार को एफआईआई ने ₹12,943 करोड़ के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने ₹10,703 करोड़ की खरीदारी कर बाज़ार को आंशिक समर्थन दिया।

गौरतलब है कि अक्तूबर 2026 में अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाज़ार से ₹36,210 करोड़ निकाल चुके हैं, जो बाज़ार पर लगातार दबाव का प्रमुख कारण है।

तकनीकी स्तर और आगे की संभावनाएँ

तकनीकी विश्लेषकों के मुताबिक, 22,050 का स्तर निफ्टी के लिए करीबी समर्थन बना हुआ है। निफ्टी के निचले बोलिंजर बैंड के आसपास होने से अल्पकालिक रिकवरी की संभावना भी बनती है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि निफ्टी 22,290–22,350 के दायरे के ऊपर टिकता है, तो 22,440 से 22,600 तक की तेजी देखी जा सकती है। नीचे की ओर 22,140 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है।

बाज़ार का इतिहास बताता है कि बड़े सुधार अक्सर दीर्घकालिक निवेशकों के लिए अवसर लेकर आते हैं — विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा उतार-चढ़ाव के माहौल में गुणवत्ता वाले शेयरों में चरणबद्ध निवेश के अवसर बन रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसे राहत की साँस से ज़्यादा नहीं समझना चाहिए — अक्तूबर में एफआईआई की ₹36,210 करोड़ की निकासी बताती है कि विदेशी पूँजी अभी भारतीय बाज़ार को लेकर आश्वस्त नहीं है। 103 डॉलर से ऊपर का कच्चा तेल भारत के चालू खाते के घाटे और मुद्रास्फीति दोनों पर असर डालेगा, जिसका असर आम उपभोक्ता तक पहुँचता है। डीआईआई की खरीद बाज़ार को थामे ज़रूर है, लेकिन घरेलू पूँजी के भरोसे टिकी तेजी तब तक कमज़ोर मानी जाती है जब तक वैश्विक संकेत नहीं बदलते। असली परीक्षा यह है कि क्या निफ्टी 22,350 के ऊपर टिक पाएगा — अगर नहीं, तो 'रैली पर बिकवाली' का चक्र जारी रहेगा।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

9 अक्तूबर को सेंसेक्स कितना चढ़ा?
9 अक्तूबर को बीएसई सेंसेक्स 452.95 अंक (0.63 प्रतिशत) की बढ़त के साथ 72,046 के करीब कारोबार करता नज़र आया। निफ्टी 50 भी 167.05 अंक (0.75 प्रतिशत) उछलकर 22,398 के स्तर पर रहा।
आज आईटी शेयरों में इतनी तेजी क्यों आई?
निफ्टी आईटी इंडेक्स में 3 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज हुई, जिसमें टीसीएस, इंफोसिस और एचसीएल टेक सबसे आगे रहे। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई कुछ नरमी से आईटी कंपनियों के शेयरों को राहत मिली, क्योंकि ये कंपनियाँ अमेरिकी बाज़ार पर बड़े पैमाने पर निर्भर हैं।
एफआईआई अक्तूबर में कितने शेयर बेच चुके हैं?
अक्तूबर 2026 में अब तक विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) भारतीय शेयर बाज़ार से ₹36,210 करोड़ निकाल चुके हैं। गुरुवार को अकेले एफआईआई ने ₹12,943 करोड़ के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने ₹10,703 करोड़ की खरीदारी से बाज़ार को आंशिक सहारा दिया।
कच्चे तेल की ऊँची कीमतें बाज़ार को कैसे प्रभावित कर रही हैं?
ब्रेंट क्रूड 103 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है, जिसका कारण मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव और आपूर्ति-जोखिम प्रीमियम का बहाल होना है। बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार ऊँची कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड मिलकर विदेशी निवेशकों की बिकवाली को बढ़ावा दे रहे हैं और बाज़ार की धारणा को कमज़ोर कर रहे हैं।
निफ्टी के लिए अगले प्रमुख तकनीकी स्तर क्या हैं?
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए 22,140 अहम समर्थन स्तर है। यदि निफ्टी 22,290–22,350 के दायरे के ऊपर टिकता है, तो 22,440 से 22,600 तक की तेजी संभव है। नीचे की ओर 22,050 का स्तर करीबी समर्थन माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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