भारतीय शेयर बाजार में हरे निशान की लगातार बढ़त, सेंसेक्स ने 850 अंकों का लाभ हासिल किया
सारांश
Key Takeaways
- भारतीय शेयर बाजार ने लगातार दूसरे दिन हरे निशान में शुरुआत की।
- सेंसेक्स में 850 अंकों की बढ़त हुई।
- Nifty मिडकैप और स्मॉलकैप में भी तेजी दर्ज की गई।
- विशेषज्ञों ने सतर्क रहने की सलाह दी है।
- कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर बाजार पर पड़ सकता है।
मुंबई, 25 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिकी-ईरान शांति वार्ता की ताज़ा ख़बरों के बीच वैश्विक बाजार से मिले सकारात्मक संकेतों के चलते भारतीय शेयर बाजार ने लगातार दूसरे दिन बुधवार को भी मजबूत बढ़त के साथ हरे निशान में शुरुआत की।
इस बीच, 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 74,068.45 से 583.56 अंक (0.79 प्रतिशत) चढ़कर 74,652.01 पर खुला, जबकि एनएसई निफ्टी अपने पिछले बंद 22,912.40 से 152 अंकों (0.66 प्रतिशत) की उछाल के साथ 23,064.40 पर खुला।
हालांकि, जब खबर लिखी जा रही थी (सुबह 9.27 बजे के करीब), सेंसेक्स 886.30 अंकों यानी 1.20 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 74,954.75 पर कारोबार कर रहा था, और निफ्टी50 भी 304.35 (1.33 प्रतिशत) अंकों की बढ़त के साथ 23,216.75 पर ट्रेड कर रहा था।
व्यापक बाजार ने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप में 2.04 प्रतिशत की बढ़त मिली, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप में 2.29 प्रतिशत की उछाल आई।
सेक्टरवार दृष्टिकोण से, निफ्टी रियल्टी में सबसे ज्यादा 3.55 प्रतिशत की बढ़त देखी गई। इसके अलावा, निफ्टी मेटल में 2.51 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया में 2.29 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो में 2.20 प्रतिशत और निफ्टी पीएसयू बैंक में 2 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली। निफ्टी एफएमसीजी (1.26 प्रतिशत) और निफ्टी फार्मा (1.23 प्रतिशत) भी तेजी के साथ ट्रेड करते नजर आए।
निफ्टी50 में श्रीराम फाइनेंस (4.36 प्रतिशत), ट्रेंट (3.64 प्रतिशत), अदाणी इंटरप्राइजेज (3.17 प्रतिशत), ग्रासिम (3.13 प्रतिशत), अदाणी पोर्ट्स (2.92 प्रतिशत) और अल्ट्राटेक सीमेंट (2.80 प्रतिशत) के शेयरों में सबसे अधिक तेजी देखने को मिली।
बुधवार को रुपये की स्थिति अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 8 पैसे गिरकर 93.95 पर खुली, जबकि मंगलवार को यह 93.87 रुपए प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
यह ध्यान देने योग्य है कि पिछले तीन से चार हफ्तों में अमेरिका-ईरान संघर्ष के कारण ऊर्जा की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आया है, जिससे विकास और महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में बाजार की दिशा तय करने में मैक्रोइकोनॉमिक संकेतों के साथ-साथ कंपनियों से संबंधित समाचार महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। हालांकि वैश्विक संकेतों ने बाजार को समर्थन दिया है, लेकिन बाजार की संरचना पूरी तरह से मजबूत नहीं मानी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में लगातार बढ़त के लिए आवश्यक है कि निफ्टी महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस स्तरों को मजबूती से पार करे। यदि ऐसा नहीं होता है, तो 'उच्च स्तर पर बिकवाली' की रणनीति हावी रह सकती है। ऐसे में निवेशकों को सतर्क और चयनात्मक निवेश रणनीति अपनाने की सलाह दी गई है।
वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। सीजफायर की उम्मीदों के चलते ब्रेंट क्रूड लगभग 7 प्रतिशत गिरकर 97.18 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड 6 प्रतिशत से अधिक गिरकर 86.72 डॉलर पर पहुंच गया।