सेंसेक्स 365 अंक टूटा, निफ्टी 24,250 के नीचे; कच्चे तेल के 91 डॉलर पार और अमेरिका-ईरान तनाव से बाजार में लगातार छठी गिरावट
सारांश
मुख्य बातें
बीएसई सेंसेक्स मंगलवार के कारोबारी सत्र में 365 अंक यानी 0.47 प्रतिशत तक लुढ़का और एनएसई निफ्टी 50 24,250 के नीचे फिसल गया — यह लगातार छठा कारोबारी दिन है जब भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव देखने को मिला। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ब्रेंट क्रूड के 91 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुँचने से निवेशकों की धारणा कमज़ोर पड़ी। वैश्विक बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों ने इस दबाव को और गहरा किया।
बाज़ार का ताज़ा हाल
सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 77,728.16 से 309.19 अंक की गिरावट के साथ 77,418.97 पर खुला। इंट्राडे सत्र में इसने 77,575.21 का उच्च और 77,362.19 का निम्न स्तर छुआ। खबर लिखे जाने तक यह 263.98 अंक यानी 0.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,464.18 पर कारोबार कर रहा था।
निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 24,287.65 से 0.26 प्रतिशत गिरकर 24,223.85 पर खुला और बाद में 42.40 अंक की गिरावट के साथ 24,245.25 के करीब ट्रेड करता दिखा। दिन के सत्र में इसने 24,211.10 का निम्न और 24,269.65 का उच्च स्तर बनाया।
सेक्टोरल प्रदर्शन
सेक्टोरल मोर्चे पर सबसे अधिक दबाव निफ्टी आईटी इंडेक्स में रहा, जो 1 प्रतिशत से अधिक टूटा। निफ्टी मिडस्मॉल आईटी एवं टेलीकॉम में 0.62 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी में करीब 0.40 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, प्राइवेट बैंक, मीडिया, मेटल और एफएमसीजी शेयरों में भी बिकवाली का रुख बना रहा।
हालाँकि कुछ क्षेत्रों में खरीदारी भी देखी गई। निफ्टी ऑटो इंडेक्स करीब 0.40 प्रतिशत चढ़ा, जबकि पीएसयू बैंक इंडेक्स में 0.29 प्रतिशत की बढ़त रही। व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप 0.08 प्रतिशत गिरा, जबकि स्मॉलकैप में 0.27 प्रतिशत की मामूली वृद्धि दर्ज हुई।
कच्चा तेल और वैश्विक कारक
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड पिछले बंद स्तर से करीब 0.60 प्रतिशत बढ़कर 91 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुँच गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 1 प्रतिशत से अधिक उछलकर 85.37 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। इसके साथ ही अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड बढ़कर 4.73 प्रतिशत पर पहुँच गई, जिससे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के लिए उभरते बाज़ारों में निवेश कम आकर्षक हो गया।
गौरतलब है कि यह दबाव ऐसे समय आया है जब रिपोर्टों में संकेत मिले हैं कि ईरान अधिक आक्रामक रणनीति अपना सकता है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम व्यवस्था को आगे बढ़ाने की संभावना से इनकार किया है। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएँ फिर से गहरी हो गई हैं।
भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर
विश्लेषकों का मानना है कि भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है, इसलिए तेल कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर महंगाई, चालू खाते के घाटे और कॉरपोरेट लागत पर पड़ सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब घरेलू बाज़ार पहले से ही वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।
आगे क्या होगा
विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) के पास पर्याप्त नकदी उपलब्ध है और बड़ी गिरावट की स्थिति में वे खरीदारी कर सकते हैं। साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था की मूलभूत मज़बूती और कॉरपोरेट आय में सुधार के संकेत बाज़ार को एक सीमा से नीचे जाने से रोक सकते हैं। जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और तेल बाज़ार में स्थिरता नहीं आती, तब तक उतार-चढ़ाव बना रहने की आशंका है।