18 अगस्त 2026
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सेंसेक्स 365 अंक टूटा, निफ्टी 24,250 के नीचे; कच्चे तेल के 91 डॉलर पार और अमेरिका-ईरान तनाव से बाजार में लगातार छठी गिरावट

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सेंसेक्स 365 अंक टूटा, निफ्टी 24,250 के नीचे; कच्चे तेल के 91 डॉलर पार और अमेरिका-ईरान तनाव से बाजार में लगातार छठी गिरावट

सारांश

कच्चे तेल के 91 डॉलर पार और अमेरिका-ईरान तनाव के बीच भारतीय बाज़ार में लगातार छठे दिन बिकवाली — सेंसेक्स 365 अंक तक लुढ़का, निफ्टी 24,250 के नीचे। आईटी सेक्टर सबसे ज़्यादा दबाव में; DII की खरीदारी ही अब एकमात्र संभावित सहारा।

मुख्य बातें

सेंसेक्स मंगलवार के सत्र में 365 अंक यानी 0.47 प्रतिशत तक गिरा; इंट्राडे निम्न 77,362.19 रहा।
निफ्टी 50 24,250 के नीचे फिसला; यह लगातार छठा कारोबारी दिन है जब बाज़ार में बिकवाली दर्ज हुई।
ब्रेंट क्रूड 91 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर और WTI क्रूड 85.37 डॉलर पर — दोनों में तेज़ उछाल।
अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 4.73 प्रतिशत पर पहुँची, जिससे FII का उभरते बाज़ारों से रुझान घटा।
निफ्टी आईटी में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट; ऑटो और पीएसयू बैंक में मामूली बढ़त।
पश्चिम एशिया में तनाव कम न होने तक बाज़ार में उतार-चढ़ाव जारी रहने की आशंका।

बीएसई सेंसेक्स मंगलवार के कारोबारी सत्र में 365 अंक यानी 0.47 प्रतिशत तक लुढ़का और एनएसई निफ्टी 50 24,250 के नीचे फिसल गया — यह लगातार छठा कारोबारी दिन है जब भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली का दबाव देखने को मिला। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और ब्रेंट क्रूड के 91 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुँचने से निवेशकों की धारणा कमज़ोर पड़ी। वैश्विक बाजारों से मिले नकारात्मक संकेतों ने इस दबाव को और गहरा किया।

बाज़ार का ताज़ा हाल

सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 77,728.16 से 309.19 अंक की गिरावट के साथ 77,418.97 पर खुला। इंट्राडे सत्र में इसने 77,575.21 का उच्च और 77,362.19 का निम्न स्तर छुआ। खबर लिखे जाने तक यह 263.98 अंक यानी 0.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,464.18 पर कारोबार कर रहा था।

निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 24,287.65 से 0.26 प्रतिशत गिरकर 24,223.85 पर खुला और बाद में 42.40 अंक की गिरावट के साथ 24,245.25 के करीब ट्रेड करता दिखा। दिन के सत्र में इसने 24,211.10 का निम्न और 24,269.65 का उच्च स्तर बनाया।

सेक्टोरल प्रदर्शन

सेक्टोरल मोर्चे पर सबसे अधिक दबाव निफ्टी आईटी इंडेक्स में रहा, जो 1 प्रतिशत से अधिक टूटा। निफ्टी मिडस्मॉल आईटी एवं टेलीकॉम में 0.62 प्रतिशत और निफ्टी रियल्टी में करीब 0.40 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज, प्राइवेट बैंक, मीडिया, मेटल और एफएमसीजी शेयरों में भी बिकवाली का रुख बना रहा।

हालाँकि कुछ क्षेत्रों में खरीदारी भी देखी गई। निफ्टी ऑटो इंडेक्स करीब 0.40 प्रतिशत चढ़ा, जबकि पीएसयू बैंक इंडेक्स में 0.29 प्रतिशत की बढ़त रही। व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप 0.08 प्रतिशत गिरा, जबकि स्मॉलकैप में 0.27 प्रतिशत की मामूली वृद्धि दर्ज हुई।

कच्चा तेल और वैश्विक कारक

बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड पिछले बंद स्तर से करीब 0.60 प्रतिशत बढ़कर 91 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुँच गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 1 प्रतिशत से अधिक उछलकर 85.37 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। इसके साथ ही अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड बढ़कर 4.73 प्रतिशत पर पहुँच गई, जिससे विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के लिए उभरते बाज़ारों में निवेश कम आकर्षक हो गया।

गौरतलब है कि यह दबाव ऐसे समय आया है जब रिपोर्टों में संकेत मिले हैं कि ईरान अधिक आक्रामक रणनीति अपना सकता है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम व्यवस्था को आगे बढ़ाने की संभावना से इनकार किया है। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएँ फिर से गहरी हो गई हैं।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर

विश्लेषकों का मानना है कि भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है, इसलिए तेल कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर महंगाई, चालू खाते के घाटे और कॉरपोरेट लागत पर पड़ सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब घरेलू बाज़ार पहले से ही वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है।

आगे क्या होगा

विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) के पास पर्याप्त नकदी उपलब्ध है और बड़ी गिरावट की स्थिति में वे खरीदारी कर सकते हैं। साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था की मूलभूत मज़बूती और कॉरपोरेट आय में सुधार के संकेत बाज़ार को एक सीमा से नीचे जाने से रोक सकते हैं। जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और तेल बाज़ार में स्थिरता नहीं आती, तब तक उतार-चढ़ाव बना रहने की आशंका है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि DII की खरीदारी केवल अस्थायी तल बनाती है। आलोचकों का कहना है कि घरेलू ऊर्जा विविधीकरण की धीमी रफ़्तार ही इस चक्र को बार-बार दोहराती है। जब तक भारत की तेल आयात निर्भरता में संरचनात्मक कमी नहीं आती, पश्चिम एशिया का हर भू-राजनीतिक झटका मुंबई के बाज़ार में सीधे दर्ज होता रहेगा।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेंसेक्स आज कितना गिरा और क्यों?
मंगलवार के सत्र में सेंसेक्स इंट्राडे में 365 अंक यानी 0.47 प्रतिशत तक टूटा। इसकी मुख्य वजह ब्रेंट क्रूड का 91 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुँचना और पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव रहा, जिसने निवेशकों की धारणा को कमज़ोर किया।
निफ्टी 50 आज किस स्तर पर रहा?
निफ्टी 50 अपने पिछले बंद 24,287.65 से गिरकर 24,223.85 पर खुला और बाद में 24,245.25 के करीब ट्रेड करता दिखा। दिन का निम्नतम स्तर 24,211.10 रहा।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का भारत पर क्या असर होगा?
विश्लेषकों के अनुसार, ऊँचे तेल भाव से भारत में महंगाई बढ़ सकती है, चालू खाते का घाटा चौड़ा हो सकता है और कंपनियों की उत्पादन लागत ऊपर जा सकती है। भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है, इसलिए यह सीधा आर्थिक दबाव बनता है।
आज किन सेक्टरों में सबसे ज़्यादा गिरावट रही?
निफ्टी आईटी इंडेक्स में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट रही — यह सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र रहा। इसके अलावा निफ्टी मिडस्मॉल आईटी एवं टेलीकॉम, रियल्टी, फाइनेंशियल सर्विसेज, प्राइवेट बैंक, मीडिया, मेटल और एफएमसीजी में भी बिकवाली देखी गई।
क्या बाज़ार में आगे भी गिरावट जारी रह सकती है?
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और तेल कीमतें स्थिर नहीं होतीं, उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालाँकि DII के पास पर्याप्त नकदी है और भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियादी मज़बूती बड़ी गिरावट को सीमित कर सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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