29 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सेंसेक्स 1,124 अंक टूटा, निफ्टी 22,780 पर बंद; ट्रम्प-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों ने बाजार को झकझोरा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सेंसेक्स 1,124 अंक टूटा, निफ्टी 22,780 पर बंद; ट्रम्प-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों ने बाजार को झकझोरा

सारांश

एक ही झटके में निवेशकों की ₹8 लाख करोड़ की संपत्ति डूब गई। सेंसेक्स 1,124 अंक लुढ़का, ब्रेंट क्रूड 106.6 डॉलर पर — और इसकी जड़ में है ट्रम्प का ईरानी प्रस्ताव ठुकराना। भारत जैसे बड़े तेल आयातक के लिए यह महँगाई और घाटे की दोहरी मार की चेतावनी है।

मुख्य बातें

बीएसई सेंसेक्स 28 सितंबर 2026 को 1,124.02 अंक गिरकर 72,771.72 पर बंद हुआ।
निफ्टी50 360.25 अंक यानी 1.56 प्रतिशत फिसलकर 22,780.25 पर आया।
ब्रेंट क्रूड 2.2% उछलकर 106.6 डॉलर प्रति बैरल ; अमेरिकी WTI क्रूड 93.76 डॉलर पर।
राष्ट्रपति ट्रम्प ने होर्मुज जलडमरूमध्य और युद्धविराम पर ईरान के प्रस्ताव को खारिज किया।
BSE में सूचीबद्ध कंपनियों का बाजार पूँजीकरण एक दिन में ₹8 लाख करोड़ घटा।
निफ्टी मिडकैप 100 1.63% और निफ्टी स्मॉलकैप 100 1.85% नीचे बंद हुए।

बीएसई सेंसेक्स सोमवार, 28 सितंबर 2026 को 1,124.02 अंक यानी 1.52 प्रतिशत की भारी गिरावट के साथ 72,771.72 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी50 360.25 अंक यानी 1.56 प्रतिशत फिसलकर 22,780.25 पर आ गया। भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की उछलती कीमतों और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में उछाल ने निवेशकों की धारणा को बुरी तरह प्रभावित किया, जिससे बाजार सप्ताह के पहले ही कारोबारी दिन लाल निशान में बंद हुआ।

बाजार का प्रदर्शन: प्रमुख आँकड़े

सेंसेक्स अपने पिछले बंद 73,895.74 से 73,734.83 पर खुला और दिन के कारोबार में एक समय 72,716.23 के निचले स्तर तक लुढ़क गया — जो पिछले बंद से 1,179.51 अंक यानी 1.59 प्रतिशत नीचे था। निफ्टी50 भी अपने पिछले बंद 23,140.50 से 23,064.90 पर खुला और दिन का निचला स्तर 22,762.20 रहा।

व्यापक बाजार में भी बिकवाली का दबाव बना रहा। निफ्टी मिडकैप 100 1.63 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 1.85 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए, जो दर्शाता है कि बिकवाली का दायरा केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं था।

सेक्टरवार असर: बैंकिंग सबसे कमज़ोर

निफ्टी पीएसयू बैंक सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा। निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी बैंक का प्रदर्शन भी निराशाजनक रहा। इसके विपरीत, निफ्टी आईटी ने अपेक्षाकृत कम गिरावट दर्ज की और बेहतर स्थिति में रहा।

निफ्टी50 के घटकों में डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, इन्फोसिस और एचडीएफसी लाइफ को छोड़कर लगभग सभी शेयर लाल निशान में बंद हुए। सबसे अधिक नुकसान टीएमपीवी, जियो फाइनेंशियल सर्विसेज, पावरग्रिड और एलएंडटी के शेयरों को उठाना पड़ा।

बाजार गिरावट के कारण: ट्रम्प-ईरान तनाव और तेल की आग

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने होर्मुज जलडमरूमध्य को पुनः खोलने और युद्धविराम के ईरान के प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। ईरान ने दोहराया कि केवल कूटनीति ही अमेरिका और इजरायल के साथ उसके टकराव का हल निकाल सकती है। इस भू-राजनीतिक गतिरोध का सीधा असर वैश्विक शेयर, तेल और बॉन्ड बाजारों पर पड़ा।

पश्चिम एशिया संकट के बने रहने से आपूर्ति संबंधी चिंताओं ने तेल की कीमतों को ऊँचा बनाए रखा। ब्रेंट क्रूड वायदा 2.2 प्रतिशत उछलकर 106.6 डॉलर प्रति बैरल हो गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड 1.45 प्रतिशत बढ़कर 93.76 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँच गया। गौरतलब है कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए कच्चे तेल की ऊँची कीमतें यहाँ मुद्रास्फीति और चालू खाता घाटे दोनों को प्रभावित कर सकती हैं।

एशियाई बाजारों पर वैश्विक असर

भारतीय बाजार अकेले नहीं गिरे — अधिकांश एशियाई बाजारों में भी बिकवाली देखी गई। दक्षिण कोरिया का प्रमुख सूचकांक 2 प्रतिशत गिरा, जापान का निक्केई 0.10 प्रतिशत नीचे रहा और चीनी बाजार 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुए। तेल की बढ़ती कीमतों और मुद्रास्फीति की आशंकाओं के बीच वैश्विक बॉन्ड बाजारों में भी नई बिकवाली का दौर शुरू हो गया।

बाजार पूँजीकरण में भारी नुकसान

बीएसई में सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल बाजार पूँजीकरण शुक्रवार के करीब ₹482 लाख करोड़ से घटकर ₹474 लाख करोड़ रह गया — एक ही दिन में निवेशकों की संपत्ति से करीब ₹8 लाख करोड़ स्वाहा हो गए। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का माहौल पहले से गहरा है और घरेलू निवेशक सतर्क मुद्रा अपनाए हुए हैं। आने वाले कारोबारी सत्रों में पश्चिम एशिया की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों की दिशा पर बाजार की नज़र टिकी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

124 अंक की गिरावट महज एक कारोबारी दिन की उथल-पुथल नहीं है — यह उस गहरे संकट की अभिव्यक्ति है जो पश्चिम एशिया में धधकती आग और अमेरिकी नीति की कठोरता से जन्म ले रहा है। ब्रेंट क्रूड का 106.6 डॉलर तक पहुँचना भारत के लिए दोहरी चुनौती है — महँगाई और चालू खाता घाटा, दोनों एक साथ। विडंबना यह है कि जब वैश्विक कूटनीति विफल होती है, तो उसकी सबसे तीखी कीमत उन देशों को चुकानी पड़ती है जो इन संघर्षों में भागीदार भी नहीं हैं। भारतीय नीति-निर्माताओं और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के लिए यह संकेत है कि तेल की कीमतें यदि इसी स्तर पर बनी रहीं, तो मौद्रिक नीति पर दबाव और बढ़ेगा।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

28 सितंबर को सेंसेक्स और निफ्टी में इतनी बड़ी गिरावट क्यों आई?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा ईरान के युद्धविराम प्रस्ताव को ठुकराने के बाद वैश्विक बॉन्ड यील्ड उछली और कच्चे तेल की कीमतें बढ़ीं, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगा गया। इसी कारण सेंसेक्स 1,124 अंक और निफ्टी 360 अंक गिरकर बंद हुए।
आज के बाजार भूचाल से निवेशकों को कितना नुकसान हुआ?
BSE में सूचीबद्ध सभी कंपनियों का कुल बाजार पूँजीकरण एक ही दिन में करीब ₹8 लाख करोड़ घट गया — शुक्रवार के ₹482 लाख करोड़ से गिरकर ₹474 लाख करोड़ रह गया।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का भारत पर क्या असर होगा?
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है, इसलिए ब्रेंट क्रूड के 106.6 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँचने से घरेलू मुद्रास्फीति और चालू खाता घाटा दोनों बढ़ सकते हैं। इससे RBI पर मौद्रिक नीति को लेकर दबाव और गहरा हो सकता है।
किन सेक्टरों को सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ?
निफ्टी पीएसयू बैंक सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा, इसके बाद निफ्टी प्राइवेट बैंक और निफ्टी बैंक भी दबाव में रहे। निफ्टी आईटी ने तुलनात्मक रूप से कम गिरावट दर्ज की।
क्या अन्य एशियाई बाजारों में भी गिरावट आई?
हाँ, अधिकांश एशियाई बाजार नीचे बंद हुए — दक्षिण कोरिया का सूचकांक 2 प्रतिशत, जापान का निक्केई 0.10 प्रतिशत और चीनी बाजार 1 प्रतिशत से अधिक गिरे। वैश्विक बॉन्ड बाजारों में भी नई बिकवाली का दौर देखा गया।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 23 घंटे पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 4 महीने पहले
  8. 4 महीने पहले