सेंसेक्स लगातार दूसरे दिन 243 अंक टूटा, निफ्टी 22,716 पर बंद; कच्चे तेल और बॉन्ड यील्ड का दबाव
सारांश
मुख्य बातें
बीएसई सेंसेक्स मंगलवार, 29 सितंबर को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ 242.65 अंक यानी 0.33 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ 72,529.07 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी50 64.05 अंक यानी 0.28 प्रतिशत फिसलकर 22,716.20 पर आ गया। ऊँची कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ती अस्थिरता निवेशकों को जोखिम से दूर रखने का प्रमुख कारण रहीं। शुरुआती कारोबार में दोनों प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स एक-एक प्रतिशत तक लुढ़के थे, हालाँकि बाद में कुछ रिकवरी देखने को मिली।
मुख्य घटनाक्रम
सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 72,771.72 से 138 अंक नीचे 72,633.68 पर खुला और इंट्रा-डे कारोबार में एक समय 708 अंक यानी 0.97 प्रतिशत तक गिरकर 72,064 के दिन के निचले स्तर को छू गया। निफ्टी50 अपने पिछले बंद 22,780.25 से 0.20 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 22,732.45 पर खुला और दिन में 210.6 अंक यानी 0.92 प्रतिशत गिरकर 22,569.65 के निचले स्तर तक पहुँचा।
व्यापक बाज़ार भी दबाव में रहा — निफ्टी मिडकैप में 0.99 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप में 0.81 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई, जो दर्शाता है कि बिकवाली का दायरा केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं था।
सेक्टरवार प्रदर्शन
सेक्टरों में सबसे अधिक नुकसान निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स (2.71 प्रतिशत), निफ्टी केमिकल (2.31 प्रतिशत) और निफ्टी रियल्टी (2 प्रतिशत) को उठाना पड़ा। निफ्टी आईटी, निफ्टी ऑटो और निफ्टी एफएमसीजी में भी 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट रही।
इसके विपरीत, निफ्टी मेटल, निफ्टी फार्मा और निफ्टी मीडिया ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी50 में सबसे अधिक बढ़त अदाणी इंटरप्राइजेज (5 प्रतिशत) और अदाणी पोर्ट्स (4.4 प्रतिशत) के शेयरों में रही। डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, सन फार्मा, इन्फोसिस और कोटक बैंक भी हरे निशान में बंद हुए। दूसरी ओर, टाइटन, विप्रो, एचसीएल टेक, अपोलो हॉस्पिटल, टेक महिंद्रा, बजाज ऑटो और टीसीएस के शेयरों में सबसे अधिक गिरावट देखी गई।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
बाज़ार विश्लेषकों के अनुसार, 23,500–23,600 के स्तर पर भी खरीदारी में ख़ास उत्साह नहीं दिखा, जिससे रिकवरी की कोशिशें धीमी रहीं। ऊपर की तरफ़ 22,750–22,800 का दायरा तत्काल प्रतिरोध क्षेत्र बना हुआ है।
एक बाज़ार विशेषज्ञ ने कहा, 'नीचे की तरफ, 22,550–22,600 का स्तर मुख्य तत्काल सपोर्ट ज़ोन है, जबकि 22,500 के नीचे जाने पर बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और इंडेक्स 22,300–22,000 के स्तर तक जा सकता है।' विश्लेषकों का यह भी कहना है कि अमेरिका-ईरान संघर्ष में उल्लेखनीय कमी आने पर बेहतर जोखिम-भावना के कारण ज़बरदस्त राहत रैली आ सकती है।
आम जनता और निवेशकों पर असर
बाज़ार जानकारों का कहना है कि ऊर्जा की बढ़ती कीमतें और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव निवेश के नज़रिए को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे निवेशक बचाव का रुख अपना रहे हैं। मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में हिस्सेदारी घटाने की प्रवृत्ति दर्शाती है कि खुदरा निवेशकों की पूँजी पर भी असर पड़ रहा है।
इस बीच, कच्चे तेल की हालिया ऊँचाई से कुछ मुनाफावसूली देखी गई, जिससे रुपया 95.97 के आसपास लगभग सपाट रहा और इसमें करीब 0.10 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज हुई। विशेषज्ञों के अनुसार रुपये की चाल 95.65–96.15 की सीमा में रह सकती है।
क्या होगा आगे
विश्लेषकों का मानना है कि बाज़ार का ध्यान अब धीरे-धीरे Q2 तिमाही नतीजों की ओर खिसक रहा है, और Q1 की तुलना में कमाई की उम्मीदें पहले ही कम हो चुकी हैं। भू-राजनीतिक तनाव निकट भविष्य में बाज़ार की धारणा को प्रभावित करते रहेंगे। तब तक निवेशकों के चुनिंदा रुख अपनाने की संभावना है — व्यापक बाज़ार एक्सपोज़र के बजाय मज़बूत बुनियादी तत्वों और कमाई की स्पष्टता वाले शेयरों को प्राथमिकता दी जाएगी।