सेंसेक्स लगातार चौथे दिन 571 अंक टूटा, 71,909 पर बंद; निफ्टी ऑटो में 3% से ज़्यादा की गिरावट
सारांश
मुख्य बातें
बीएसई सेंसेक्स बुधवार, 1 अक्टूबर 2026 को 570.59 अंक यानी 0.79 प्रतिशत गिरकर 71,909.70 पर बंद हुआ — यह लगातार चौथा सत्र है जब भारतीय शेयर बाज़ार लाल निशान में बंद हुआ। एनएसई निफ्टी 50 भी 198.50 अंक यानी 0.88 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,421.95 पर आ गया। बॉन्ड यील्ड में अस्थिरता, ऊँची कच्चे तेल की कीमतें और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका ने निवेशकों की धारणा को कमज़ोर किया है।
इंट्राडे में कैलेंडर वर्ष का नया निचला स्तर
दिन के कारोबार में सेंसेक्स में 1,280 अंकों का उतार-चढ़ाव देखा गया — यह 72,573 के उच्च से गिरकर 71,293 के निम्न तक पहुँचा। इस प्रक्रिया में सूचकांक 2 अप्रैल 2026 को बने पिछले कैलेंडर वर्ष के न्यूनतम स्तर 71,545 को भी तोड़ गया, जो निवेशकों के लिए चिंताजनक संकेत है।
निफ्टी 50 इंट्राडे में 1.7 प्रतिशत यानी 394 अंक टूटकर 22,217 के निम्न स्तर तक गया, जो अप्रैल में बने कैलेंडर वर्ष के न्यूनतम 22,183 के काफी करीब है। दिन का उच्चतम स्तर 22,611 रहा।
सर्वाधिक गिरावट और बढ़त वाले शेयर
निफ्टी 50 में सबसे ज़्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में बजाज ऑटो, मारुति सुज़ुकी, श्रीराम फाइनेंस, टाटा स्टील, ग्रासिम इंडस्ट्रीज, आयशर मोटर्स और महिंद्रा एंड महिंद्रा शामिल रहे।
दूसरी तरफ, इन्फोसिस, एचडीएफसी लाइफ, एचडीएफसी बैंक, एसबीआई लाइफ, मैक्स हेल्थ और टीसीएस के शेयरों में तेज़ी रही, जो दर्शाता है कि निवेशक ऑटो और मेटल से हटकर आईटी और फाइनेंशियल सर्विसेज़ की ओर रुख कर रहे हैं।
सेक्टरवार प्रदर्शन
सेक्टरवार नज़रिए से देखें तो निफ्टी ऑटो में 3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट सबसे चौंकाने वाली रही। इसके अलावा निफ्टी मेटल, निफ्टी मीडिया और निफ्टी एफएमसीजी भी दबाव में रहे।
व्यापक बाज़ार भी इस गिरावट से अछूता नहीं रहा — निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 क्रमशः 1.01 प्रतिशत और 0.97 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। एकमात्र राहत निफ्टी आईटी की तरफ से आई, जो हरे निशान में बंद हुआ।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
एक बाज़ार विशेषज्ञ के अनुसार, इस गिरावट के पीछे मुख्यतः बाहरी कारण हैं। बॉन्ड यील्ड कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुँच गई है और कच्चे तेल की कीमतें भी ऊँची बनी हुई हैं, जिससे 2026-27 के आर्थिक परिदृश्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।
घरेलू मोर्चे पर, निवेशक दूसरी तिमाही (Q2) के कॉर्पोरेट नतीजों और अगले हफ्ते होने वाली भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समीक्षा का इंतज़ार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि Q2 की कमाई Q1 की तुलना में कमज़ोर रह सकती है, क्योंकि पहली तिमाही में ऑपरेटिंग कॉस्ट के अनुकूल आधार का लाभ मिला था।
विशेषज्ञ ने कहा, RBI — जो पिछली नीति में अपेक्षाकृत उदार रुख में था — अब वैश्विक मुद्रास्फीति के दबाव और रुपये को समर्थन देने की आवश्यकता को देखते हुए अपने रुख में बदलाव पर विचार कर सकता है।
निवेशकों के लिए सलाह
विशेषज्ञों के अनुसार, दीर्घकालिक निवेशक अपने निवेश बनाए रख सकते हैं और बाज़ार की कमज़ोरी का लाभ उठाकर धीरे-धीरे अतिरिक्त निवेश कर सकते हैं। वहीं, अल्पकालिक निवेशकों के लिए 'प्रतीक्षा करो और देखो' की रणनीति उचित बताई गई है — जब तक वैश्विक वित्तीय बाज़ारों में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और सरकारों के ठोस कदमों से स्थिरता न आ जाए।
गौरतलब है कि भारत की अर्थव्यवस्था की बुनियाद अभी भी मज़बूत मानी जा रही है, और विशेषज्ञों का कहना है कि देश इन बाहरी चुनौतियों का सामना करने की बेहतर स्थिति में है। आने वाले दिनों में RBI की नीति और Q2 नतीजे बाज़ार की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएँगे।