26 अक्टूबर 2026
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सेंसेक्स 609 अंक टूटा, लगातार पाँचवें दिन गिरावट; फेड बैठक और क्रूड तेल से बाजार पर दबाव

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सेंसेक्स 609 अंक टूटा, लगातार पाँचवें दिन गिरावट; फेड बैठक और क्रूड तेल से बाजार पर दबाव

सारांश

लगातार पाँचवें कारोबारी दिन भी भारतीय शेयर बाजार में गिरावट जारी रही। सेंसेक्स इंट्राडे में 609 अंक टूटा और निफ्टी 50 भी 212 अंक फिसला। फेड की नीतिगत बैठक और क्रूड तेल की ऊँची कीमतें निवेशकों को सतर्क बनाए हुए हैं।

मुख्य बातें

BSE सेंसेक्स ने 26 अक्टूबर को इंट्राडे में 609.25 अंक (0.83%) की गिरावट के साथ 72,514.57 का निम्नतम स्तर छुआ।
NSE निफ्टी 50 भी 212.65 अंक (0.94%) फिसलकर 22,387.35 पर पहुँचा।
यह लगातार पाँचवाँ कारोबारी सत्र है जब भारतीय बाजार के प्रमुख बेंचमार्कों में गिरावट दर्ज हुई।
निफ्टी मिड-कैप 100 में 0.81% और स्मॉल-कैप में 0.91% की गिरावट; निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.49% चढ़ा।
FII ने 23 अक्टूबर को ₹887 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की; DII ने ₹3,236 करोड़ की इक्विटी खरीदी।
ब्रेंट क्रूड 2% से अधिक गिरकर लगभग $114 प्रति बैरल पर; WTI क्रूड $100.70 प्रति बैरल पर।

BSE सेंसेक्स सोमवार, 26 अक्टूबर को इंट्राडे कारोबार में 609.25 अंक यानी 0.83 प्रतिशत गिरकर 72,514.57 के दिन के निम्नतम स्तर तक पहुँचा, जबकि NSE निफ्टी 50 भी 212.65 अंक या 0.94 प्रतिशत फिसलकर 22,387.35 पर आ गया। यह लगातार पाँचवाँ कारोबारी सत्र है जब घरेलू बाजार के प्रमुख बेंचमार्कों में गिरावट दर्ज की गई है।

बाजार का उद्घाटन और शुरुआती संकेत

सेंसेक्स 72,990.04 पर खुला, जो पिछले बंद भाव 73,123.83 से 133.79 अंक यानी 0.18 प्रतिशत नीचे था। निफ्टी 50 भी पिछले बंद 22,600.00 से 75.59 अंक या 0.33 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,524.40 पर खुला।

व्यापक बाजार पर भी दबाव स्पष्ट रहा। निफ्टी मिड-कैप 100 में 0.81 प्रतिशत और स्मॉल-कैप सूचकांक में 0.91 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

सेक्टरवार प्रदर्शन

NSE पर अधिकांश सेक्टोरल सूचकांकों में बिकवाली देखी गई। निफ्टी PSU बैंक, निफ्टी FMCG, निफ्टी ऑटो, निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज और निफ्टी IT शीर्ष गिरावट वाले सूचकांकों में रहे, जिनमें से कुछ में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई।

हालाँकि, निजी बैंकिंग शेयरों ने बाजार को कुछ सहारा दिया। निफ्टी प्राइवेट बैंक लगभग 0.49 प्रतिशत चढ़ा और फार्मा एवं हेल्थकेयर सेगमेंट ने भी अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया।

वैश्विक कारक और संस्थागत गतिविधि

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की 27-28 अक्टूबर को होने वाली नीतिगत बैठक पर टिकी है। व्यापक रूप से यह उम्मीद जताई जा रही है कि फेड ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा, लेकिन भविष्य की नीतिगत दिशा पर उसका मार्गदर्शन अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड, डॉलर और उभरते बाजारों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) प्रवाह को प्रभावित कर सकता है।

कमोडिटी मोर्चे पर, ब्रेंट क्रूड 2 प्रतिशत से अधिक गिरकर लगभग $114 प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखा, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 2 प्रतिशत से अधिक टूटकर $100.70 प्रति बैरल पर आ गया। यह उल्लेखनीय है कि क्रूड की कीमतें अभी भी ऊँचे स्तर पर बनी हुई हैं।

संस्थागत प्रवाह के मोर्चे पर, पिछले कारोबारी सत्र 23 अक्टूबर को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने ₹887 करोड़ के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की थी, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने लगातार चौथे सत्र में खरीदारी जारी रखते हुए ₹3,236 करोड़ की इक्विटी खरीदी।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले सप्ताह मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में आई तेज गिरावट का प्रमुख कारण मार्जिन फंडिंग पर आधारित ट्रेडों का अनवाइंड होना रहा। आलोचकों का कहना है कि हालिया करेक्शन के बाद कुछ चुनिंदा उच्च-विकास वाले क्षेत्रों में निवेश के नए अवसर उभर सकते हैं, लेकिन कच्चे तेल की ऊँची कीमतों से जुड़े व्यापक आर्थिक जोखिमों को नजरअंदाज करना महँगा पड़ सकता है।

एशियाई बाजारों में भी निवेशकों का रुख सतर्क रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) थीम में आई ठंडक भारत के लिए तुलनात्मक रूप से सकारात्मक संकेत हो सकती है, क्योंकि हाल के महीनों में दक्षिण कोरिया और ताइवान से FPI की निकासी भारत की तुलना में अधिक रही है।

आगे क्या

सितंबर तिमाही के कॉर्पोरेट नतीजे और फेड की नीतिगत बैठक इस सप्ताह बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि AI-आधारित बाजार रैली की आगे की दिशा इन्हीं घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि महज एक दिन की उथल-पुथल। जो बात मुख्यधारा की कवरेज अक्सर चूक जाती है वह यह है कि DII की ₹3,236 करोड़ की खरीदारी दरअसल एक महत्वपूर्ण नीचे की सीमा बना रही है — घरेलू संस्थाएँ वह तकिया हैं जो गिरावट को मुक्त पतन में बदलने से रोक रही हैं। असली जोखिम फेड का निर्णय नहीं, बल्कि फेड के बाद का संकेत है: यदि 'उच्च दरें लंबे समय तक' की भाषा मजबूत होती है, तो उभरते बाजारों से FPI निकासी तेज हो सकती है और रुपये पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

26 अक्टूबर को सेंसेक्स कितना गिरा?
26 अक्टूबर को BSE सेंसेक्स इंट्राडे कारोबार में 609.25 अंक यानी 0.83 प्रतिशत गिरकर 72,514.57 के निम्नतम स्तर पर पहुँचा। यह लगातार पाँचवाँ कारोबारी सत्र था जब प्रमुख बेंचमार्कों में गिरावट दर्ज की गई।
भारतीय शेयर बाजार में लगातार गिरावट के क्या कारण हैं?
वैश्विक अनिश्चितताएँ, अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की 27-28 अक्टूबर को होने वाली नीतिगत बैठक और क्रूड तेल की ऊँची कीमतें प्रमुख कारण हैं। इसके साथ ही मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में मार्जिन फंडिंग पर आधारित ट्रेडों के अनवाइंड होने से भी बिकवाली का दबाव बढ़ा है।
फेडरल रिज़र्व की बैठक का भारतीय बाजार पर क्या असर होगा?
फेड के 27-28 अक्टूबर की बैठक में ब्याज दरें अपरिवर्तित रहने की व्यापक उम्मीद है, लेकिन भविष्य की नीतिगत दिशा पर दिया जाने वाला संकेत अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड, डॉलर और भारत सहित उभरते बाजारों में FPI प्रवाह को प्रभावित कर सकता है।
FII और DII ने बाजार में क्या रुख अपनाया?
23 अक्टूबर के पिछले कारोबारी सत्र में FII ने ₹887 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की थी, जबकि DII ने लगातार चौथे सत्र में भी खरीदारी जारी रखते हुए ₹3,236 करोड़ की इक्विटी खरीदी। घरेलू संस्थाओं की यह खरीदारी बाजार को बड़ी गिरावट से बचाने में सहायक रही।
किन सेक्टरों में सबसे ज़्यादा गिरावट रही और किनमें राहत मिली?
निफ्टी PSU बैंक, FMCG, ऑटो, फाइनेंशियल सर्विसेज और IT सूचकांकों में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई। वहीं निफ्टी प्राइवेट बैंक लगभग 0.49 प्रतिशत चढ़ा और फार्मा एवं हेल्थकेयर सेगमेंट ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया।
राष्ट्र प्रेस
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