26 अक्टूबर 2026
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आजमगढ़ में 29 नवंबर को सुभासपा की महारैली, राजभर बोले — अखिलेश का 'गढ़' अब ढहेगा

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आजमगढ़ में 29 नवंबर को सुभासपा की महारैली, राजभर बोले — अखिलेश का 'गढ़' अब ढहेगा

सारांश

अखिलेश यादव के राजनीतिक प्रभाव क्षेत्र माने जाने वाले आजमगढ़ में सुभासपा की महारैली महज एक कार्यक्रम नहीं — यह 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पूर्वांचल के गैर-यादव ओबीसी समीकरण को नए सिरे से परिभाषित करने की कोशिश है। राजभर का दाँव है कि पीडीए की काट गैर-यादव एकता से होगी।

मुख्य बातें

ओम प्रकाश राजभर ने 29 नवंबर 2026 को आजमगढ़ के आईटीआई मैदान में सुभासपा की सामाजिक समरसता महारैली का ऐलान किया।
राजभर ने अखिलेश यादव पर तंज कसते हुए कहा कि कन्नौज के बाद अब आजमगढ़ में भी उनका 'काल्पनिक गढ़' ढहेगा।
महारैली का लक्ष्य राजभर, निषाद, चौहान, प्रजापति, पटेल, पाल समेत गैर-यादव पिछड़ी जातियों की एकजुटता दिखाना है।
राजभर ने पीडीए फॉर्मूले को 'वास्तविकता से परे' बताते हुए उसकी असलियत रैली में उजागर करने का दावा किया।
रैली 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच पूर्वांचल में जातीय समीकरण साधने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।

उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के नेता ओम प्रकाश राजभर ने 26 अक्टूबर 2026 को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को सीधी चुनौती देते हुए घोषणा की कि 29 नवंबर को आजमगढ़ के आईटीआई मैदान में एक विशाल सामाजिक समरसता महारैली आयोजित की जाएगी। राजभर ने दावा किया कि इस रैली के ज़रिए पूर्वांचल में गैर-यादव पिछड़े और बहुजन समाज की एकजुटता का प्रदर्शन किया जाएगा।

मुख्य घटनाक्रम

राजभर ने अखिलेश यादव पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि उनके 'काल्पनिक गढ़' एक के बाद एक ढह रहे हैं। उनके अनुसार, कन्नौज के बाद अब आजमगढ़ में भी समाजवादी पार्टी की राजनीतिक पकड़ कमज़ोर पड़ने वाली है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि रैली की वीडियो रिकॉर्डिंग कराकर देख लें कि उनका किला किस तरह ढह रहा है।

गौरतलब है कि आजमगढ़ को अखिलेश यादव के राजनीतिक प्रभाव क्षेत्र के रूप में लंबे समय से देखा जाता रहा है। यह वही ज़िला है जहाँ से अखिलेश यादव स्वयं सांसद रह चुके हैं। ऐसे में इसी क्षेत्र में विरोधी खेमे की महारैली एक सुविचारित राजनीतिक संदेश है।

गैर-यादव पिछड़ों की एकजुटता का संदेश

राजभर ने स्पष्ट किया कि इस महारैली का उद्देश्य राजभर, निषाद, चौहान, प्रजापति, पटेल और पाल समेत अन्य गैर-यादव पिछड़ी जातियों की सामूहिक शक्ति को सामने लाना है। उन्होंने कहा कि पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) के नाम पर राजनीति करने वालों को इन समुदायों की ताकत का अहसास करना होगा।

उनका आरोप है कि इन जातियों को केवल चुनाव के समय याद किया जाता रहा है और वह राजनीतिक दौर अब समाप्त हो रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ सभी दलों में शुरू हो चुकी हैं।

सपा पर सीधा निशाना

राजभर ने पीडीए के दावों को 'वास्तविकता से परे' बताते हुए कहा कि 29 नवंबर को आजमगढ़ में ही उनकी असलियत उजागर हो जाएगी। उनके अनुसार, पूर्वांचल के दलित और पिछड़े समुदाय अब स्वतंत्र राजनीतिक पहचान के साथ खड़े होने के लिए तैयार हैं।

यह पहली बार नहीं है जब राजभर ने समाजवादी पार्टी के गढ़ों में सेंध लगाने की कोशिश की है। सुभासपा पहले सपा के साथ गठबंधन में भी रह चुकी है, लेकिन बाद में रास्ते अलग हो गए। अब यह पार्टी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

उत्तर प्रदेश की जातीय राजनीति में गैर-यादव ओबीसी जातियों की भूमिका हमेशा निर्णायक रही है। आलोचकों का कहना है कि इन जातियों के वोट बैंक को लेकर सभी प्रमुख दल सक्रिय हैं — चाहे वह सपा का पीडीए फॉर्मूला हो या भाजपा-सुभासपा का गैर-यादव पिछड़ा गठजोड़।

राजभर ने अपने संबोधन का समापन 'जय भारत, जय श्रीराम, जय परशुराम, जय श्रीकृष्ण और जय महाराज सुहेलदेव' के उद्घोष के साथ किया, जो उनकी सामाजिक-सांस्कृतिक राजनीति का हिस्सा है।

आगे क्या

29 नवंबर की महारैली में जुटने वाली भीड़ का आकार राजनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण होगा, क्योंकि यह पूर्वांचल में सुभासपा की वास्तविक ज़मीनी ताकत की परीक्षा होगी। रैली के बाद 2027 विधानसभा चुनाव के लिए गठबंधन और सीट-बँटवारे की बातचीत और तेज़ होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह केवल मंच की राजनीति है। पिछले चुनावों में गैर-यादव ओबीसी वोट एकमुश्त किसी एक दल को नहीं मिले — वे बिखरे। रैली की भीड़ और उसके बाद का राजनीतिक अनुवाद ही बताएगा कि यह चुनौती केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस की बयानबाज़ी थी या असली ज़मीनी ताकत का प्रदर्शन।
RashtraPress
26 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुभासपा की आजमगढ़ महारैली कब और कहाँ होगी?
सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) की सामाजिक समरसता महारैली 29 नवंबर 2026 को आजमगढ़ के आईटीआई मैदान में आयोजित की जाएगी। ओम प्रकाश राजभर ने इसकी घोषणा 26 अक्टूबर 2026 को की।
ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव को किस आधार पर चुनौती दी?
राजभर ने अखिलेश यादव के पीडीए फॉर्मूले को 'वास्तविकता से परे' बताते हुए कहा कि आजमगढ़ में महारैली के ज़रिए गैर-यादव पिछड़े और बहुजन समाज की एकजुटता दिखाई जाएगी। उनका दावा है कि कन्नौज के बाद अब आजमगढ़ में भी सपा की पकड़ कमज़ोर होगी।
इस महारैली में कौन-सी जातियों को लामबंद करने की कोशिश है?
राजभर ने राजभर, निषाद, चौहान, प्रजापति, पटेल और पाल समेत कई गैर-यादव पिछड़ी जातियों को एकजुट करने का लक्ष्य रखा है। ये वे जातियाँ हैं जिन्हें सपा के पीडीए गठबंधन का हिस्सा बताया जाता है।
सुभासपा और समाजवादी पार्टी का आपसी राजनीतिक इतिहास क्या रहा है?
सुभासपा और समाजवादी पार्टी कभी गठबंधन में रही हैं, लेकिन बाद में रास्ते अलग हो गए। अब सुभासपा भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा है और ओम प्रकाश राजभर उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री हैं।
2027 विधानसभा चुनाव के संदर्भ में यह महारैली कितनी अहम है?
2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ सभी दलों में जोर पकड़ चुकी हैं। पूर्वांचल में गैर-यादव ओबीसी मतदाताओं की संख्या निर्णायक है और सुभासपा की यह रैली उस समीकरण को भाजपा गठबंधन के पक्ष में साधने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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