आजमगढ़ में 29 नवंबर की महारैली से सपा को बड़ा झटका लगेगा: ओम प्रकाश राजभर
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने 20 अक्टूबर 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर सीधा हमला बोला। राजभर ने दावा किया कि 29 नवंबर को आजमगढ़ के आईटीआई मैदान में आयोजित होने वाली 'सामाजिक समरसता महारैली' अखिलेश के 'गढ़' की दीवारें हिला देगी।
महारैली का उद्देश्य और दावे
राजभर ने कहा, '29 नवंबर को आईटीआई मैदान में लोगों का भ्रम पूरी तरह खत्म कर देंगे। किसी को पता भी नहीं चलेगा कि समाजवादी पार्टी कहाँ चली गई।' उनके अनुसार जिसे अखिलेश यादव सपा का अभेद्य गढ़ बताते हैं, वह महारैली के बाद एक अलग ही राजनीतिक रंग में दिखेगा। सुभासपा द्वारा आयोजित यह 'सामाजिक समरसता महारैली' पिछड़े और वंचित समुदायों को एकजुट करने के उद्देश्य से रखी गई है।
सपा के घोषणापत्र पर निशाना
राजभर ने अखिलेश यादव की 2027 विधानसभा चुनाव के लिए घोषणापत्र तैयार करने की कवायद पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि चाहे सपा कोई भी घोषणापत्र जारी करे, प्रदेश में उनकी सरकार नहीं बनने वाली। राजभर के अनुसार सपा के पुराने और नए घोषणापत्रों में कोई खास फर्क नहीं होगा और 'जनता अब इनके बहकावे में नहीं आने वाली।'
सपा सरकार के कार्यकाल पर आरोप
राजभर ने आरोप लगाया कि सपा सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में दंगे और गुंडागर्दी हुई, जिससे आम जनता परेशान हो गई थी। उनका कहना है कि इसी कारण अखिलेश यादव जनता का विश्वास नहीं जीत सके और उनकी पार्टी लंबे समय से सत्ता से बाहर है। गौरतलब है कि ये आरोप सपा लगातार नकारती रही है।
आजम खान मुलाकात और मुस्लिम मतदाता
राजभर ने अखिलेश यादव के 22 अक्टूबर को रामपुर जेल में आजम खान से मिलने के प्रस्तावित दौरे पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि चुनाव नज़दीक आने पर ही सपा प्रमुख को आजम खान की याद आई। राजभर के अनुसार इस पहल का मकसद उन मुस्लिम मतदाताओं को पार्टी से जोड़े रखना है जो धीरे-धीरे सपा से दूर जा रहे हैं। उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी की बढ़ती लोकप्रियता और मुस्लिम समुदाय में बढ़ती राजनीतिक जागरूकता को भी अखिलेश की रणनीतिक मजबूरी का कारण बताया।
2027 चुनाव पर नज़र
राजभर ने कन्नौज में हुए हालिया कार्यक्रम का हवाला देते हुए कहा कि वहाँ की जनता ने अखिलेश यादव को 'नकारना शुरू कर दिया है' और इसका असर 2027 के विधानसभा चुनाव में साफ दिखेगा। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब उत्तर प्रदेश की राजनीति भारतीय जनता पार्टी (BJP), सपा और क्षेत्रीय दलों के बीच त्रिकोणीय संघर्ष की दिशा में बढ़ रही है। 29 नवंबर की महारैली इस राजनीतिक तस्वीर में सुभासपा की हैसियत तय करने की कोशिश है।