5 अक्टूबर 2026
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राजभर का अखिलेश पर तीखा प्रहार: 'पहले अपनी पार्टी में अनुशासन लाओ, फिर 2027 की बात करो'

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राजभर का अखिलेश पर तीखा प्रहार: 'पहले अपनी पार्टी में अनुशासन लाओ, फिर 2027 की बात करो'

सारांश

राजभर का अखिलेश पर वार — गोरखपुर में थप्पड़, आगरा में लात-घूंसे, सहारनपुर में कुर्सी विवाद और कई जिला इकाइयाँ भंग। SBSP प्रमुख का सीधा सवाल: जो पार्टी अपने नेताओं को नहीं संभाल सकती, वह 2027 में यूपी कैसे संभालेगी?

मुख्य बातें

ओम प्रकाश राजभर ने 5 अक्टूबर 2026 को एक्स पर अखिलेश यादव और सपा पर तीखा हमला बोला।
गोरखपुर में थप्पड़ और मुकदमे के बाद जिला, महानगर और फ्रंटल संगठनों की इकाइयाँ भंग की गईं।
आगरा में सपा सांसद की मौजूदगी में मारपीट, दो नेताओं को पार्टी से निष्कासित किया गया।
एटा-कासगंज, आजमगढ़ और सहारनपुर में भी सपा कार्यकर्ताओं के बीच टकराव की घटनाएँ सामने आईं।
राजभर ने कहा — 'पहले अपने नेताओं को अनुशासन सिखाइए, चुनाव तो हमसे बाद में लड़िएगा।' सपा की ओर से इस बयान पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।

उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने 5 अक्टूबर 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। राजभर ने सपा के भीतर जारी आंतरिक कलह और हालिया संगठनात्मक कार्रवाइयों का हवाला देते हुए कहा कि जो पार्टी 2027 में सत्ता में आने का दावा करती है, उसे पहले अपनी जिला इकाइयाँ संभालने की क्षमता साबित करनी होगी।

एक्स पर बोला सीधा हमला

राजभर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि 'अखिलेश जी, आपको इंडी गठबंधन को एनडीए से लड़ना है और आपके नेता आपस में लड़ रहे हैं।' उन्होंने आगे लिखा, 'सपा लड़ रही कांग्रेस से, इकरा लड़ रहीं इमरान से, गौतम जी तो सबको निशाने पर लिए हुए हैं। बाकी संगठन वाले तो आ-हा-हा। ऐसे कैसे लड़ेंगे महाराज?' राजभर का यह कटाक्ष सपा के भीतर गहराते अंतर्विरोध की ओर इशारा करता है।

गोरखपुर से आगरा तक — हिंसा और भंग इकाइयाँ

राजभर ने एक के बाद एक घटनाओं की फेहरिस्त पेश की। उनके अनुसार, गोरखपुर में सपा नेताओं के बीच थप्पड़ तक चले और मुकदमा दर्ज हुआ, जिसके बाद जिला, महानगर और फ्रंटल संगठनों की इकाइयाँ भंग करनी पड़ीं। एटा-कासगंज में नेता अखिलेश यादव के सामने ही आपस में उलझ गए और दोनों जिलों की इकाइयाँ भंग हुईं। आगरा में सपा सांसद की मौजूदगी में मथुरा के पदाधिकारियों के बीच लात-घूंसे चले और बाद में दो नेताओं को पार्टी से बाहर किया गया।

इसके अलावा, आजमगढ़ में एक बूथ अध्यक्ष ने अपने ही विधायक के समर्थकों पर मारपीट का आरोप लगाया। सहारनपुर में प्रदेश अध्यक्ष की समीक्षा बैठक के दौरान कुर्सी और माइक को लेकर सपा कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए।

राजभर का सीधा सवाल — सरकार में आए तो जनता का क्या होगा?

राजभर ने तंज करते हुए कहा, 'सोचिए, आपके नेता सरकार आने के भ्रम में जिस तरह आपस में भिड़ रहे हैं, अगर गलती से सरकार में आ गए तो जनता को कितना पीटेंगे। हफ्ता वसूली करेंगे, गुंडा टैक्स वसूलेंगे।' यह बयान स्पष्ट रूप से 2027 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखकर दिया गया है, जिसमें सपा प्रमुख चुनौती बनकर उभरने का दावा कर रही है।

राजनीतिक संदर्भ और व्यापक परिदृश्य

गौरतलब है कि यह हमला ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ तेज़ हो रही हैं। NDA और INDIA गठबंधन दोनों अपनी-अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटे हैं। राजभर, जो खुद NDA का हिस्सा हैं, सपा की आंतरिक कमज़ोरियों को जनता के सामने उजागर कर भाजपा गठबंधन को बढ़त दिलाने की कोशिश में हैं। यह उनकी पार्टी SBSP की परंपरागत रणनीति के अनुरूप है — विपक्ष में संगठनात्मक दरारों को राजनीतिक मुद्दा बनाना।

राजभर का संदेश — अनुशासन पहले, चुनाव बाद में

राजभर ने अपने बयान का समापन करते हुए कहा, 'पहले अपने नेताओं को एक साथ बैठना सिखाइए, सभ्यता-संस्कार सिखाइए, अनुशासन सिखाइए, चुनाव तो हमसे बाद में लड़िएगा।' उनके इस संदेश के अंत में 'जय भारत, जय श्रीराम, जय श्रीकृष्ण, जय परशुराम, जय महाराजा सुहेलदेव!' लिखा था। सपा की ओर से इस हमले पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।

संपादकीय दृष्टिकोण

इसलिए उनकी अनुशासन-संबंधी नसीहत की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ सकता है। लेकिन तथ्य यह है कि सपा की एक साल में कई जिला इकाइयाँ भंग होना और सार्वजनिक मारपीट की घटनाएँ विपक्षी एकता की कमज़ोरी की वास्तविक कहानी है — जिसे राजभर ने कुशलता से भुनाया है। अगर सपा इन घटनाओं का जवाब तथ्यात्मक रूप से नहीं देती, तो यह बयान 2027 तक NDA के प्रचार का हिस्सा बना रहेगा।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर क्या आरोप लगाए?
राजभर ने आरोप लगाया कि सपा में आंतरिक कलह चरम पर है — गोरखपुर, आगरा, एटा-कासगंज, आजमगढ़ और सहारनपुर में पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच मारपीट और विवाद हुए। उन्होंने कहा कि जो पार्टी अपनी जिला इकाइयाँ नहीं संभाल सकती, वह 2027 में उत्तर प्रदेश की सरकार चलाने का दावा कैसे कर सकती है।
सपा में किन जिलों की इकाइयाँ भंग हुईं?
राजभर के बयान के अनुसार, गोरखपुर में थप्पड़ और मुकदमे के बाद जिला, महानगर और फ्रंटल इकाइयाँ भंग की गईं। एटा-कासगंज में भी दोनों जिलों की इकाइयाँ भंग हुईं और आगरा में मारपीट के बाद दो नेताओं को पार्टी से निकाला गया।
राजभर का यह बयान 2027 चुनाव से कैसे जुड़ा है?
राजभर NDA का हिस्सा हैं और उनका यह हमला 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले सपा को संगठनात्मक रूप से कमज़ोर दिखाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। उन्होंने सीधे कहा कि पहले अनुशासन सिखाओ, चुनाव बाद में लड़ो।
सपा ने राजभर के बयान पर क्या जवाब दिया?
राजभर के इस बयान पर समाजवादी पार्टी की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
ओम प्रकाश राजभर कौन हैं और उनका राजनीतिक रुख क्या है?
ओम प्रकाश राजभर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। वे फिलहाल NDA के घटक दल के रूप में भाजपा के साथ हैं और पिछड़े वर्गों, विशेषकर राजभर समुदाय के प्रमुख नेता माने जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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