राजभर का अखिलेश पर बड़ा हमला: 'पीडीए हाथ से सरक गया, 2027 में मुख्य विपक्ष बनने लायक नहीं बचेंगे'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने मंगलवार, 28 जुलाई को समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला। राजभर ने दावा किया कि सपा का पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) गठजोड़ अब कमज़ोर पड़ चुका है और पार्टी अपने पारंपरिक मुस्लिम वोट बैंक को भी बचाने में संघर्ष कर रही है। यह बयान लखनऊ से आया और सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर अखिलेश यादव को सीधे टैग करते हुए पोस्ट किया गया।
एक्स पर राजभर का सीधा संदेश
राजभर ने एक्स पर अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए लिखा कि उन्हें लड़ना एनडीए से है, लेकिन इस बार उन्हें 'अपनों' से भी लड़ना पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि ज़मीनी रिपोर्ट के आधार पर पीडीए समीकरण सपा के हाथ से निकल चुका है और अब स्थिति एमवाई (मुस्लिम-यादव) गठजोड़ बचाने तक सिमट आई है।
राजभर ने इशारों में कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी का 'पंजा' सपा के मुस्लिम वोट बैंक पर 'झपट्टा मार रहा है', और दूसरी तरफ असदुद्दीन ओवैसी भी उसी वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश में हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे ओवैसी की बात कर रहे हैं।
माफिया और जंगलराज का आरोप
राजभर ने आरोप लगाया कि गाँव-गाँव में सपा की पहचान 'गुंडे और माफिया वाली पार्टी' के रूप में बन चुकी है। उन्होंने कहा कि जब भी सपा सत्ता में आती है तो 'जंगलराज का पूरा पैकेज' साथ लाती है — जिसमें गैर-यादव पिछड़ों और बहुजनों पर अत्याचार, थाने-तहसीलों का पार्टी कार्यालय में तब्दील होना और हर ज़िले में माफिया का पोषण शामिल है। उन्होंने इसे 'सैफई सिंडिकेट' की संज्ञा दी।
राजभर ने यह भी दावा किया कि इन्हीं कारणों से अब मुस्लिम मतदाता भी सपा से दूरी बनाने लगे हैं।
2027 विधानसभा चुनाव पर चेतावनी
राजभर ने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा 'मुख्य विपक्षी दल बनने लायक भी नहीं बचेगी।' उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में अखिलेश यादव को 'ज़मीन पर आने' और 'अपनों से सावधान रहने' की सलाह दी — यह कहते हुए कि वे यह सलाह इसलिए दे रहे हैं ताकि 2027 में एक मज़बूत विपक्ष मिल सके।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि ओम प्रकाश राजभर पहले सपा के सहयोगी रह चुके हैं और बाद में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल हो गए। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ तेज़ हो रही हैं और सभी दल अपने जातीय समीकरण मज़बूत करने में जुटे हैं। पीडीए फॉर्मूले को लेकर सपा और उसके आलोचकों के बीच बयानबाज़ी का यह नया दौर राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर सकता है।