सेंसेक्स 429 अंक टूटा, 72,638 पर बंद; मेटल और रियल्टी शेयरों में भारी बिकवाली
सारांश
मुख्य बातें
BSE सेंसेक्स बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 को 429.11 अंक (0.59 प्रतिशत) की गिरावट के साथ 72,638.70 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 50 173.05 अंक (0.76 प्रतिशत) की कमज़ोरी के साथ 22,603.05 पर आ गया। मेटल और रियल्टी सेक्टरों में तेज़ बिकवाली के दबाव, RBI के नीतिगत रुख में बदलाव और अमेरिकी डॉलर की मज़बूती ने मिलकर बाज़ार पर दोहरी मार की।
किन सेक्टरों में रहा सबसे ज़्यादा दबाव
निफ्टी मेटल -2.33 प्रतिशत की गिरावट के साथ सबसे बड़े नुकसान में रहा। इसके बाद निफ्टी रियल्टी -1.77 प्रतिशत, निफ्टी ऑटो -1.58 प्रतिशत, निफ्टी कमोडिटीज़ -1.43 प्रतिशत, निफ्टी इंडिया डिफेंस -1.41 प्रतिशत, निफ्टी आईटी -1.34 प्रतिशत और निफ्टी पीएसई -1.22 प्रतिशत की कमज़ोरी के साथ लाल निशान में बंद हुए।
गौरतलब है कि यह व्यापक बिकवाली किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं रही — ऑटो से लेकर डिफेंस तक, लगभग सभी चक्रीय सेक्टर दबाव में थे।
बैंकिंग शेयरों ने दिखाई राहत
व्यापक बाज़ार की कमज़ोरी के बीच, निफ्टी पीएसयू बैंक 1 प्रतिशत, निफ्टी मीडिया 0.69 प्रतिशत और निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.08 प्रतिशत की बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुए। कोटक महिंद्रा बैंक, भारती एयरटेल, आईसीआईसीआई बैंक और बजाज फाइनेंस सेंसेक्स पैक में लाभ में रहे।
जानकारों के अनुसार, ऊँची ब्याज दरों के माहौल में मार्जिन विस्तार की उम्मीद में बैंकिंग शेयरों ने बाज़ार की कमज़ोरी के विपरीत बेहतर प्रदर्शन किया।
लाल निशान में रहे प्रमुख शेयर
टाइटन, BEL, एशियन पेंट्स, इन्फोसिस, L&T, टाटा स्टील, M&M, HCL टेक, पावर ग्रिड, NTPC, इंडिगो, HUL, सन फार्मा, मारुति सुज़ुकी, अल्ट्राटेक सीमेंट और टेक महिंद्रा लाल निशान में बंद हुए।
मिडकैप-स्मॉलकैप में मिला-जुला कारोबार
निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 378.60 अंक (0.63 प्रतिशत) की कमज़ोरी के साथ 59,382.60 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 58.25 अंक (0.30 प्रतिशत) की मामूली बढ़त के साथ 19,506.95 पर बंद हुआ — जो लार्जकैप की तुलना में स्मॉलकैप सेगमेंट में कुछ हद तक रक्षात्मक मुद्रा का संकेत देता है।
विशेषज्ञों का विश्लेषण: RBI नीति और डॉलर का असर
बाज़ार विश्लेषकों के अनुसार, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) द्वारा अपेक्षित ब्याज दर वृद्धि के बाद नीतिगत रुख को 'न्यूट्रल' से 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' की ओर ले जाने पर बाज़ार ने तीखी प्रतिक्रिया दी — यह ब्याज दर चक्र में बदलाव का महत्वपूर्ण संकेत है।
यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी FOMC की बैठक से पहले US यील्ड में बढ़ोतरी और मज़बूत डॉलर के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने रुपये पर भी दबाव बनाए रखा। इन वैश्विक कारकों ने घरेलू बाज़ार की गिरावट को और गहरा किया।
आगे चलकर, FOMC के निर्णय और RBI के अगले नीतिगत संकेत बाज़ार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।