22 अक्टूबर 2026
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सेंसेक्स 366 अंक टूटा, निफ्टी 22,687 पर खुला; कच्चे तेल और अमेरिकी यील्ड से बाज़ार पर दबाव

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सेंसेक्स 366 अंक टूटा, निफ्टी 22,687 पर खुला; कच्चे तेल और अमेरिकी यील्ड से बाज़ार पर दबाव

सारांश

कच्चे तेल के 110 डॉलर के करीब पहुँचने और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के ऊँचे बने रहने ने गुरुवार को घरेलू बाज़ार की शुरुआत लाल निशान में कराई। सेंसेक्स 366 अंक टूटा और निफ्टी 22,590 के अहम सपोर्ट की परीक्षा ले रहा है। विशेषज्ञों की सलाह है कि महँगे मिड-कैप से लार्ज-कैप की ओर रोटेशन ही अभी की सही रणनीति है।

मुख्य बातें

BSE सेंसेक्स गुरुवार को 366.36 अंक (0.50%) टूटकर 73,343.33 पर खुला; इंट्राडे में 73,005.11 का निम्न स्तर छुआ।
निफ्टी 50 123.60 अंक (0.54%) गिरकर 22,687.75 पर खुला; दिन का निम्न 22,554.85 रहा।
निफ्टी मिडकैप में 1.04% और निफ्टी स्मॉलकैप में 0.91% की गिरावट; ऑटो, मेटल, हेल्थकेयर सर्वाधिक प्रभावित।
ब्रेंट क्रूड 1% से अधिक उछलकर करीब 110 डॉलर प्रति बैरल पर पहुँचा — महँगाई की चिंता बढ़ी।
बुधवार को FII ने ₹1,022 करोड़ और DII ने ₹1,614 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की।
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए 22,590 अहम सपोर्ट; तेजी के लिए 22,840 से ऊपर जाना ज़रूरी।

BSE सेंसेक्स गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को शुरुआती कारोबार में 366.36 अंक यानी 0.50 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,343.33 के स्तर पर खुला, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 123.60 अंक यानी 0.54 प्रतिशत टूटकर 22,687.75 पर कारोबार की शुरुआत हुई। एशियाई बाज़ारों में व्यापक कमज़ोरी, ब्रेंट क्रूड का 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुँचना और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का ऊँचे स्तर पर बने रहना इस गिरावट के प्रमुख कारण रहे।

दिन का निम्नतम स्तर और व्यापक बाज़ार

इंट्राडे कारोबार में सेंसेक्स ने 73,005.11 का दिन का निम्नतम स्तर छुआ, वहीं निफ्टी 50 एक समय 22,554.85 तक फिसल गया। व्यापक बाज़ार में भी दबाव रहा — निफ्टी मिडकैप में 1.04 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप में 0.91 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। यह ऐसे समय में आया है जब मिड और स्मॉल-कैप शेयरों के ऊँचे वैल्यूएशन को लेकर बाज़ार विशेषज्ञ पहले से आगाह कर रहे थे।

सेक्टरवार प्रदर्शन

सेक्टरवार देखें तो लगभग सभी सूचकांक लाल निशान में रहे। शुरुआती कारोबार में निफ्टी ऑटो, निफ्टी मेटल और निफ्टी हेल्थकेयर पर सबसे अधिक दबाव रहा — तीनों में 0.98 प्रतिशत तक की गिरावट आई। निफ्टी फार्मा भी 0.78 प्रतिशत कमज़ोर रहा। इसके अलावा FMCG, रियल्टी, सीमेंट और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों में भी व्यापक बिकवाली देखी गई।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, हाल के महीनों में व्यापक बाज़ार की मज़बूती मुख्य रूप से तरलता (लिक्विडिटी) के दम पर रही है, न कि कंपनियों की वास्तविक कमाई के बल पर। उनका कहना है कि इससे एक असंतुलन पैदा हुआ है, जहाँ कई मिड और स्मॉल-कैप शेयर महँगे वैल्यूएशन पर कारोबार कर रहे हैं जबकि लार्ज-कैप शेयर अपेक्षाकृत आकर्षक स्तरों पर उपलब्ध हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, 'यह असंतुलन धीरे-धीरे सुधर रहा है और यह रुझान आगे भी जारी रह सकता है।'

तकनीकी विश्लेषकों ने चेताया कि निफ्टी में 22,700 के स्तर का टूटना बाज़ार में गहरे करेक्शन की आशंका बढ़ाता है। उनके अनुसार 22,590 का स्तर निफ्टी के लिए महत्वपूर्ण समर्थन है और मज़बूत तेजी की पुष्टि के लिए निफ्टी को 22,840 के ऊपर वापस लौटना होगा। विशेषज्ञों ने मौजूदा परिस्थितियों में उचित वैल्यूएशन वाले लार्ज-कैप शेयरों की ओर सेक्टोरल रोटेशन को सबसे उपयुक्त निवेश रणनीति बताया है।

संस्थागत निवेशकों की गतिविधि

बुधवार के कारोबार में विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) शुद्ध खरीदार रहे और उन्होंने लगभग ₹1,022 करोड़ के शेयर खरीदे। घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने भी लगभग ₹1,614 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की। गौरतलब है कि संस्थागत खरीदारी के बावजूद कच्चे तेल और अमेरिकी यील्ड की चिंताओं के चलते कई ट्रेडर शॉर्ट पोजिशन बनाए हुए हैं।

वैश्विक संकेत और आगे की राह

एशियाई बाज़ारों में भी भारी दबाव रहा — जापान का निक्केई, हांगकांग का हैंगसेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी शुरुआती कारोबार में 2 प्रतिशत तक गिरे। दूसरी ओर, बुधवार को अमेरिकी बाज़ारों में सकारात्मक रुख रहा — नैस्डैक लगभग 1 प्रतिशत और S&P 500 में 0.58 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जिसे AI से जुड़े शेयरों के बेहतर कॉरपोरेट नतीजों का सहारा मिला। ब्रेंट क्रूड वायदा में 1 प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ यह 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुँचा, जिससे महँगाई संबंधी चिंताएँ और गहरी हो गई हैं। बाज़ार की नज़र अब आगामी घरेलू तिमाही नतीजों और वैश्विक मैक्रो संकेतों पर टिकी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। गौरतलब यह भी है कि FII और DII दोनों खरीदार हैं, फिर भी बाज़ार टिक नहीं पा रहा — यह बताता है कि खुदरा और डेरिवेटिव ट्रेडर की शॉर्ट पोजिशन कितनी भारी है। जब तक वैश्विक मैक्रो परिदृश्य — खासकर अमेरिकी यील्ड और कच्चे तेल — स्थिर नहीं होते, घरेलू खरीदारी का सकारात्मक प्रभाव सीमित रहेगा।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आज सेंसेक्स और निफ्टी में इतनी गिरावट क्यों आई?
एशियाई बाज़ारों में कमज़ोरी, ब्रेंट क्रूड का 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुँचना और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का ऊँचे स्तर पर बने रहना आज की गिरावट के मुख्य कारण रहे। इन वैश्विक कारकों ने निवेशकों की धारणा को कमज़ोर किया और व्यापक बिकवाली देखी गई।
निफ्टी के लिए अहम तकनीकी स्तर कौन से हैं?
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी के लिए 22,590 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन (सपोर्ट) है। यदि यह स्तर टिका रहता है तो रिकवरी संभव है, लेकिन मज़बूत तेजी की पुष्टि के लिए निफ्टी को 22,840 के ऊपर बंद होना ज़रूरी होगा।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का शेयर बाज़ार पर क्या असर पड़ता है?
ब्रेंट क्रूड के ऊँचे रहने से भारत का आयात बिल बढ़ता है, जिससे महँगाई की चिंताएँ गहरी होती हैं और कंपनियों की लागत बढ़ती है। इससे निवेशकों की धारणा कमज़ोर होती है और शॉर्ट पोजिशन बढ़ती है, जो बाज़ार पर अतिरिक्त दबाव बनाती है।
FII और DII ने बुधवार को क्या किया?
बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने लगभग ₹1,022 करोड़ और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने लगभग ₹1,614 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की। संस्थागत स्तर पर खरीदारी के बावजूद वैश्विक चिंताओं के चलते बाज़ार पर दबाव बना रहा।
अभी निवेशकों के लिए सबसे उपयुक्त रणनीति क्या है?
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा समय में उचित वैल्यूएशन वाले लार्ज-कैप शेयरों की ओर सेक्टोरल रोटेशन सबसे उपयुक्त रणनीति है। महँगे मिड और स्मॉल-कैप शेयरों से दूरी बनाकर अपेक्षाकृत आकर्षक लार्ज-कैप में निवेश बेहतर रिटर्न दे सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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