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सेंसेक्स 138 अंक गिरकर 72,633 पर खुला; कच्चा तेल $106 के पार, वैश्विक दबाव में बाजार

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सेंसेक्स 138 अंक गिरकर 72,633 पर खुला; कच्चा तेल $106 के पार, वैश्विक दबाव में बाजार

सारांश

कच्चे तेल के $106 पार और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 5.23% पर पहुँचने से भारतीय बाजार दबाव में खुले। सेंसेक्स 138 अंक गिरा, FII तीसरे सत्र में भी बिकवाल रहे। फार्मा शेयरों में राहत, बाकी सेक्टर लाल निशान में।

मुख्य बातें

सेंसेक्स मंगलवार को 138.04 अंक (0.19%) गिरकर 72,633.68 पर और निफ्टी 47.80 अंक (0.21%) टूटकर 22,732.45 पर खुला।
ब्रेंट क्रूड $106.87 प्रति बैरल और WTI क्रूड $93.99 प्रति बैरल पर — दोनों में 1% से अधिक की बढ़त।
FII लगातार तीसरे सत्र में नेट सेलर; सोमवार को ₹5,353 करोड़ के शेयर बेचे।
DII ने ₹5,189 करोड़ की खरीदारी कर बाजार को सहारा दिया।
निफ्टी फार्मा और निफ्टी 500 हेल्थकेयर में लगभग 1% की बढ़त; ऑटो, मीडिया, FMCG और सीमेंट दबाव में।
निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 22,650–22,700 और रेजिस्टेंस 22,950–23,000 पर।

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को 138.04 अंक यानी 0.19 प्रतिशत की गिरावट के साथ 72,633.68 पर खुला, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी 47.80 अंक यानी 0.21 प्रतिशत टूटकर 22,732.45 पर खुला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $106 प्रति बैरल के पार जाने और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेज बढ़ोतरी के कारण वैश्विक माहौल इक्विटी निवेशकों के लिए प्रतिकूल बना हुआ है।

सेक्टर वार प्रदर्शन

मंगलवार के शुरुआती कारोबार में निफ्टी ऑटो, निफ्टी मीडिया, निफ्टी एफएमसीजी और निफ्टी सीमेंट में 0.64 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, मेटल और केमिकल इंडेक्स भी नकारात्मक क्षेत्र में कारोबार करते नजर आए।

हालाँकि, स्वास्थ्य क्षेत्र में राहत रही — निफ्टी फार्मा और निफ्टी 500 हेल्थकेयर इंडेक्स में लगभग 1 प्रतिशत तक की बढ़त दर्ज हुई। यह ऐसे समय में आया है जब बाकी अधिकांश सेक्टर दबाव में हैं, जो संकेत देता है कि निवेशक रक्षात्मक शेयरों की ओर रुख कर रहे हैं।

वैश्विक मैक्रो दबाव

बाजार जानकारों के अनुसार, ग्लोबल मैक्रो माहौल इक्विटी के लिए अनुकूल नहीं है। ब्रेंट क्रूड 1 प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ $106.87 प्रति बैरल पर और यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 1 प्रतिशत से ज्यादा उछलकर $93.99 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।

विशेषज्ञों ने कहा, "ब्रेंट क्रूड के $106 से ऊपर रहने और अमेरिकी 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड के 5.23 प्रतिशत पर होने के कारण ग्लोबल मैक्रो स्थिति इक्विटी बाजारों के लिए प्रतिकूल बनी हुई है।" गौरतलब है कि उच्च कच्चे तेल की कीमतें आयात बिल बढ़ाकर भारत के चालू खाते के घाटे पर सीधा दबाव डालती हैं।

FII और DII का रुख

एक्सचेंज के शुरुआती आँकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार तीसरे सत्र में नेट सेलर बने रहे और सोमवार को ₹5,353 करोड़ से अधिक के शेयर बेचे। यह विदेशी पूँजी की निरंतर निकासी का संकेत है।

वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने बाजार को सहारा दिया और ₹5,189 करोड़ के शेयर खरीदे। DII की यह खरीदारी बाजार की बड़ी गिरावट को रोकने में सहायक रही।

एशियाई और अमेरिकी बाजारों का हाल

एशियाई बाजार भी सोमवार रात के अमेरिकी संकेतों के बाद दबाव में रहे। जापान का निक्केई, हांगकांग का हैंग सेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी (KOSPI) शुरुआती कारोबार में 1 प्रतिशत तक गिरे। सोमवार रात अमेरिकी बाजारों में भी बिकवाली रही — S&P 500 में 0.77 प्रतिशत और नैस्डैक में 0.92 प्रतिशत की गिरावट आई।

तकनीकी स्तर और आगे की राह

विशेषज्ञों के अनुसार, 23,000 के स्तर से नीचे आने के बाद निफ्टी की शॉर्ट टर्म स्थिति मंदी वाली (बेयरिश) बनी हुई है और डेरिवेटिव्स डेटा भी बढ़ती सावधानी का संकेत दे रहा है। तत्काल सपोर्ट 22,650–22,700 के दायरे में और रेजिस्टेंस 22,950–23,000 के स्तर पर देखा गया है।

हालाँकि, जानकारों ने यह भी कहा कि मौजूदा दबाव के बावजूद लार्ज कैप ग्रोथ शेयरों के आकर्षक वैल्यूएशन दीर्घकालिक निवेशकों को चुनिंदा खरीदारी के अवसर दे सकते हैं। आने वाले सत्रों में वैश्विक कच्चे तेल की दिशा और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का रुझान बाजार की चाल तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

अमेरिकी 10 वर्षीय यील्ड 5.23% पर, और FII की लगातार तीसरे सत्र में बिकवाली। भारत एक प्रमुख तेल आयातक है और ऊँची क्रूड कीमतें न केवल कंपनियों की लागत बढ़ाती हैं, बल्कि मुद्रास्फीति और चालू खाते के घाटे पर भी दोहरा प्रहार करती हैं। DII की खरीदारी तात्कालिक सहारा दे रही है, लेकिन यह संरचनात्मक समाधान नहीं है — जब तक वैश्विक कमोडिटी दबाव और डॉलर की मजबूती नहीं थमती, घरेलू खरीदारी एक सीमा तक ही बाजार को थाम सकती है।
RashtraPress
29 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

29 सितंबर 2026 को सेंसेक्स और निफ्टी कितने गिरे?
सेंसेक्स मंगलवार को 138.04 अंक यानी 0.19 प्रतिशत गिरकर 72,633.68 पर खुला और निफ्टी 47.80 अंक यानी 0.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,732.45 पर खुला। यह गिरावट कच्चे तेल की ऊँची कीमतों और कमजोर वैश्विक संकेतों के कारण आई।
कच्चे तेल की कीमतें शेयर बाजार को कैसे प्रभावित कर रही हैं?
ब्रेंट क्रूड $106.87 प्रति बैरल और WTI $93.99 प्रति बैरल पर पहुँच गया है, जिससे भारत का आयात बिल बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऊँची कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिकी 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड का 5.23 प्रतिशत पर होना इक्विटी बाजारों के लिए प्रतिकूल माहौल बना रहा है।
FII और DII ने मंगलवार को बाजार में क्या किया?
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार तीसरे सत्र में नेट सेलर रहे और सोमवार को ₹5,353 करोड़ से अधिक के शेयर बेचे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने ₹5,189 करोड़ की खरीदारी कर बाजार को आंशिक सहारा दिया।
निफ्टी के लिए आज का सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर क्या है?
विशेषज्ञों के अनुसार, निफ्टी के लिए तत्काल सपोर्ट 22,650–22,700 के दायरे में और रेजिस्टेंस 22,950–23,000 के स्तर पर है। 23,000 के नीचे आने के बाद शॉर्ट टर्म रुझान मंदी वाला (बेयरिश) बना हुआ है।
क्या मौजूदा बाजार गिरावट में निवेश का कोई अवसर है?
विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा दबाव के बावजूद लार्ज कैप ग्रोथ शेयरों के आकर्षक वैल्यूएशन दीर्घकालिक निवेशकों को चुनिंदा खरीदारी के अवसर दे सकते हैं। हालाँकि, शॉर्ट टर्म नजरिए से सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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