सेंसेक्स 364 अंक टूटा, निफ्टी 23,869 पर बंद; कच्चे तेल की आग में लगातार चौथे दिन बाज़ार धराशायी
सारांश
मुख्य बातें
BSE सेंसेक्स गुरुवार, 23 जुलाई को 363.66 अंक यानी 0.47 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,391.39 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी50 126.65 अंक यानी 0.53 प्रतिशत फिसलकर 23,869.60 पर आ गया। मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष के चलते कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुँचने से निवेशकों की धारणा लगातार कमज़ोर बनी रही और यह चार कारोबारी सत्रों की लगातार गिरावट की श्रृंखला में एक और कड़ी बन गई।
मुख्य घटनाक्रम
सेंसेक्स अपने पिछले बंद स्तर 76,755.05 से 0.31 प्रतिशत गिरकर 76,515.10 पर खुला और दिन के कारोबार में एक समय 0.78 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,151.98 के इंट्रा-डे निचले स्तर तक लुढ़का। इसी तरह निफ्टी50 पिछले बंद 23,996.25 से 0.38 प्रतिशत गिरकर 23,904.80 पर खुला और दिन में 23,807.20 तक नीचे आया।
गौरतलब है कि इन चार सत्रों में सेंसेक्स कुल 1,760 अंक यानी 2.3 प्रतिशत टूट चुका है, जबकि निफ्टी में 465 अंक यानी लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट आई है।
निवेशकों पर असर
केवल गुरुवार के एक सत्र में ही निवेशकों को ₹3 लाख करोड़ से अधिक का नुकसान उठाना पड़ा। BSE पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाज़ार पूंजीकरण पिछले सत्र के ₹480 लाख करोड़ से घटकर ₹477 लाख करोड़ से नीचे आ गया। चार दिनों की इस गिरावट में निवेशकों की कुल संपत्ति में ₹4 लाख करोड़ की कमी आई है — पिछले शुक्रवार 17 जुलाई को बाज़ार पूंजीकरण ₹481 लाख करोड़ था।
सेक्टर-वार प्रदर्शन
निफ्टी रियल्टी सबसे बुरी तरह प्रभावित रहा, जिसमें 1.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। इसके बाद निफ्टी ऑयल एंड गैस, इंफ्रास्ट्रक्चर, पीएसयू बैंक और निफ्टी एनर्जी में 1 प्रतिशत तक की गिरावट आई। निफ्टी मेटल 0.7 प्रतिशत, निफ्टी फार्मा और निफ्टी एफएमसीजी 0.4 प्रतिशत नीचे रहे। व्यापक बाज़ारों में निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 दोनों में 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
हालाँकि, निफ्टी ऑटो इंडेक्स मज़बूत तिमाही नतीजों के बल पर 0.7 प्रतिशत की बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ। निफ्टी मीडिया में भी 0.22 प्रतिशत की मामूली तेज़ी देखी गई।
निफ्टी50 के सर्वाधिक नुकसान झेलने वाले शेयरों में नेस्ले इंडिया, श्रीराम फाइनेंस, ग्रासिम, बजाज फाइनेंस, इंडिगो, सिप्ला, JSW स्टील, टाटा स्टील और रिलायंस शामिल रहे। वहीं, SBI लाइफ, बजाज ऑटो, M&M, TCS, टाटा कंज्यूमर और आइशर मोटर्स शीर्ष लाभ पाने वाले शेयरों में रहे।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुँचना वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में और अधिक व्यवधान की आशंकाओं को दर्शाता है। इससे महंगाई बढ़ने का जोखिम बना है और कंपनियों के मुनाफे पर पड़ने वाले संभावित असर का बाज़ार दोबारा आकलन कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि ऊँची ऊर्जा कीमतों ने वैश्विक स्तर पर ब्याज दरें लंबे समय तक ऊँची बने रहने की संभावना को और पुख्ता किया है, जिसका सीधा असर उभरते बाज़ारों में निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता पर पड़ रहा है। हालिया थोक मूल्य सूचकांक (WPI) में बढ़ोतरी और कारोबारी गतिविधियों में नरमी यह संकेत देती है कि भू-राजनीतिक तनाव का असर अब घरेलू अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है।
आगे क्या
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक बाज़ार भी दबाव में हैं और मध्य पूर्व में संघर्ष-विराम के कोई स्पष्ट संकेत नहीं हैं। बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं आती और भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता, तब तक घरेलू बाज़ारों में दबाव बना रह सकता है। हालाँकि, ऑटो सेक्टर के मज़बूत तिमाही नतीजे यह संकेत देते हैं कि निवेशक अभी भी मज़बूत आय वाली कंपनियों को प्राथमिकता दे रहे हैं।