30 अक्टूबर 2026
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एसआईआर विवाद: कर्नाटक मंत्री सतीश जारकीहोली ने एक्स पर दिया स्पष्टीकरण, बोले — 'बयान का गलत अर्थ निकाला गया'

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एसआईआर विवाद: कर्नाटक मंत्री सतीश जारकीहोली ने एक्स पर दिया स्पष्टीकरण, बोले — 'बयान का गलत अर्थ निकाला गया'

सारांश

कर्नाटक के PWD मंत्री सतीश जारकीहोली ने एक्स पर सफाई दी कि SIR पर उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया — वे BJP की साजिश को नाकाम करने की बात कर रहे थे, न कि SIR का समर्थन। BJP ने उनके वीडियो को राहुल गांधी के रुख के विरुद्ध बताया था।

मुख्य बातें

कर्नाटक PWD मंत्री सतीश जारकीहोली ने 30 अक्टूबर 2026 को एक्स पर SIR पर अपने बयान का स्पष्टीकरण दिया।
उन्होंने कहा कि उनका आशय 'फॉर्म 7' के जरिए मतदाता नाम हटाने की BJP की साजिश को नाकाम करने से था।
BJP ने उनका वीडियो साझा कर दावा किया था कि उन्होंने लगभग एक करोड़ नाम हटाए जाने को उचित ठहराया।
जारकीहोली ने कहा, वे राहुल गांधी के साथ मतदाता अधिकारों की रक्षा में 'मजबूती से खड़े हैं।' बेलगावी जिले से शुरू हुई इस लड़ाई को कर्नाटक में सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने का दावा उन्होंने किया।

कर्नाटक सरकार के लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री सतीश जारकीहोली ने 30 अक्टूबर 2026 को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट जारी कर स्पष्ट किया कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर उनके बयान का 'गलत अर्थ' लगाया गया है। उनका यह स्पष्टीकरण उस वीडियो के बाद आया, जिसे भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने एक्स पर साझा करते हुए दावा किया था कि मंत्री ने SIR प्रक्रिया का बचाव किया।

मंत्री ने क्या कहा

अपनी एक्स पोस्ट में जारकीहोली ने कहा, 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के संबंध में मीडिया के सामने दिए गए मेरे बयान का गलत अर्थ निकाला गया है। मेरा आशय यह था कि अन्य राज्यों की तुलना में हमने कर्नाटक में अपने राष्ट्रीय नेता राहुल गांधी के नेतृत्व और मुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार के मार्गदर्शन में 'फॉर्म 7' के जरिए मतदाता सूची से कांग्रेस समर्थकों के नाम हटाने की BJP की साजिश को नाकाम कर दिया है।'

उन्होंने यह भी जोड़ा, 'मैंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया, जिससे यह लगे कि एसआईआर प्रक्रिया सही है।' मंत्री ने स्पष्ट किया कि बेलगावी जिले से शुरू होकर कर्नाटक में 'फॉर्म 7' के माध्यम से पात्र मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिशों को उनकी पार्टी ने सफलतापूर्वक विफल किया।

भाजपा का आरोप और विवाद की पृष्ठभूमि

BJP ने एक्स पर जारकीहोली का एक वीडियो पोस्ट करते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने SIR प्रक्रिया के तहत लगभग एक करोड़ नाम हटाए जाने को उचित ठहराया — यह कहते हुए कि इनमें डुप्लिकेट, मृत और स्थानांतरित मतदाता शामिल थे। BJP ने इसे कांग्रेस नेता राहुल गांधी के SIR-विरोधी रुख के विपरीत बताया और कहा कि इससे कांग्रेस की 'लोकतंत्र-विरोधी राजनीति' बेनकाब होती है।

गौरतलब है कि SIR पर राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस की स्थिति मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाने का विरोध करने की रही है। ऐसे में एक कैबिनेट मंत्री के बयान को समर्थन के रूप में प्रस्तुत किए जाने से पार्टी के भीतर और बाहर राजनीतिक हलचल स्वाभाविक थी।

मंत्री का पक्ष: मतदाता अधिकारों पर दृढ़ रुख

जारकीहोली ने अपनी पोस्ट में कहा, 'मैं मतदाता सूची से पात्र मतदाताओं के नाम अवैध रूप से हटाने के किसी भी प्रयास का कड़ा विरोध करता हूं। लोकतांत्रिक मूल्यों और मतदान के अधिकार की रक्षा के लिए मैं अपने नेता राहुल गांधी के साथ मजबूती से खड़ा हूं।'

उन्होंने मीडिया और विपक्ष दोनों से अपील की कि उनके बयान को 'सही संदर्भ में समझा जाए।' यह ऐसे समय में आया है जब SIR प्रक्रिया राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बहस का केंद्र बनी हुई है।

आगे क्या

जारकीहोली के स्पष्टीकरण के बाद यह देखना बाकी है कि BJP इस पर अपनी प्रतिक्रिया जारी रखती है या नहीं। कर्नाटक में SIR को लेकर चल रहा यह विवाद आने वाले दिनों में मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया पर नई बहस को जन्म दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह केवल राजनीतिक दावेबाजी है। मतदाता सूची की शुद्धता और मतदाता अधिकारों का संरक्षण — ये दोनों एक साथ साधे जाने चाहिए, लेकिन इस बहस में दोनों पक्ष इसे विशुद्ध राजनीतिक चश्मे से देख रहे हैं।
RashtraPress
30 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सतीश जारकीहोली ने SIR पर क्या स्पष्टीकरण दिया?
मंत्री जारकीहोली ने कहा कि मीडिया में दिए गए उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया — उनका आशय SIR प्रक्रिया का समर्थन करना नहीं, बल्कि 'फॉर्म 7' के जरिए कांग्रेस समर्थकों के नाम हटाने की BJP की साजिश को विफल करने की बात कहना था। उन्होंने एक्स पर पोस्ट जारी कर यह सफाई दी।
BJP ने जारकीहोली के बयान पर क्या आरोप लगाया?
BJP ने जारकीहोली का एक वीडियो एक्स पर साझा करते हुए दावा किया कि उन्होंने SIR प्रक्रिया के तहत लगभग एक करोड़ नाम हटाए जाने को सही ठहराया, और कहा कि इससे राहुल गांधी का SIR-विरोधी रुख कमजोर पड़ता है।
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) क्या है?
SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन मतदाता सूचियों के विशेष पुनरीक्षण की एक प्रक्रिया है, जिसमें डुप्लिकेट, मृत और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं। कर्नाटक सहित कई राज्यों में इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद उठा है कि कहीं पात्र मतदाताओं के नाम भी न हटाए जाएँ।
जारकीहोली ने 'फॉर्म 7' विवाद में बेलगावी का ज़िक्र क्यों किया?
मंत्री ने कहा कि कर्नाटक में 'फॉर्म 7' के माध्यम से पात्र मतदाताओं के नाम हटाने के प्रयासों के खिलाफ उनकी पार्टी ने बेलगावी जिले से यह लड़ाई शुरू की और उसे प्रभावी ढंग से रोका। बेलगावी उनका गृह ज़िला भी है।
इस विवाद का आगे क्या असर हो सकता है?
जारकीहोली के स्पष्टीकरण के बाद भी BJP और कांग्रेस के बीच SIR को लेकर राजनीतिक तनाव बना रहने की संभावना है। यह मुद्दा कर्नाटक में मतदाता सूची की शुद्धता और विपक्षी दलों के अधिकारों की व्यापक बहस को और तेज कर सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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