फॉर्म 7 विवाद: कर्नाटक गृह मंत्री प्रियांक खड़गे की BJP को चेतावनी, 'कानून तोड़ने पर होगी कार्रवाई'
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने 5 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में पत्रकारों से बात करते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि फॉर्म 7 का दुरुपयोग कर योग्य मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटवाने की कोशिश करने वालों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर कर्नाटक में छिड़े सियासी संग्राम के बीच यह बयान सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच टकराव को और तेज़ करता है।
मुख्य घटनाक्रम
गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने सवाल उठाया कि BJP पदाधिकारियों के पास बड़ी संख्या में पहले से छपे हुए फॉर्म 7 आवेदन कहाँ से आ रहे हैं। उनका कहना था, 'अगर आप फॉर्म 7 का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, अगर आपके पास बड़ी संख्या में पहले से छपे हुए फॉर्म 7 हैं, अगर आप जिंदा लोगों को मृत और यहाँ रहने वाले लोगों को गैर निवासी बताते हैं, तो क्या हमें आपको सम्मानित करना चाहिए?'
खड़गे के अनुसार, चिक्कमगलुरु, बीदर और भुवनेश्वर के तहसीलदारों सहित अधिकारियों से संपर्क कर कुछ लोगों ने पहले जमा किए गए फॉर्म 7 आवेदनों को वापस लेने की माँग की। उनका आरोप है कि इन व्यक्तियों को गलत जानकारी दी गई थी कि संबंधित मतदाता या तो मर चुके हैं या अब उस क्षेत्र के निवासी नहीं रहे।
BJP पर लक्षित आरोप
खड़गे ने सीधे तौर पर BJP नेताओं, पूर्व विधायकों, उम्मीदवारों और बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) पर आरोप लगाते हुए कहा कि जनता को परेशान करने के आरोपों में मामले दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, 'अगर आप कानून का पालन नहीं कर रहे हैं, तो मैं आपको सिखाऊँगा कि इसका पालन कैसे किया जाता है।'
गृह मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि फॉर्म 7 जमा करने के जरिए मुस्लिम, ईसाई और दलित समुदायों के मतदाताओं को खासतौर पर निशाना बनाया जा रहा था। उन्होंने कहा, 'ऐसा क्यों है कि सिर्फ मुसलमानों, ईसाइयों और दलितों को निशाना बनाया जा रहा है? BJP को इसका जवाब देना चाहिए।'
एसआईआर पर तीखी टिप्पणी
खड़गे ने व्यंग्यात्मक लहजे में एसआईआर यानी 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' की परिभाषा पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, 'यह एक स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन होना चाहिए था। यह तो "संघ इंटेंसिव रिवीजन" बन गया है, है ना?' यह टिप्पणी सत्तारूढ़ कांग्रेस के उस व्यापक आरोप का हिस्सा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया को राजनीतिक रूप से हथियार बनाया जा रहा है।
चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं पर स्थिति
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता फारूक अब्दुल्ला की चुनाव आयोग पर की गई टिप्पणी के संदर्भ में खड़गे ने कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और इसे उसी भावना से कार्य करना चाहिए जो डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने संविधान सभा में व्यक्त की थी। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा मुख्य चुनाव आयुक्त ने 'अपनी आत्मा BJP को बेच दी है' — यह एक गंभीर राजनीतिक आरोप है जिसका BJP की तरफ से खंडन अपेक्षित है।
हिंदू धर्म और आरएसएस पर खड़गे की राय
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की सनातन धर्म और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर टिप्पणी का बचाव करते हुए खड़गे ने कहा कि हिंदू धर्म और हिंदुत्व में बुनियादी अंतर है। उन्होंने तर्क दिया, 'हिंदू धर्म 3,000 साल से है। हिंदुत्व की शुरुआत RSS समूह ने की थी। इसलिए हमें उनसे कुछ भी सीखने की जरूरत नहीं है।' उन्होंने दिग्विजय सिंह को 'एक मजबूत व्यक्ति' बताते हुए कहा कि वह सनातन के खिलाफ नहीं हैं।
आगे क्या होगा
खड़गे ने कहा कि सरकार को अलग अलग शिकायतें मिल रही हैं और रिटर्निंग ऑफिसर तथा मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) इस मामले की जाँच कर सकते हैं। उन्होंने BJP नेताओं से आग्रह किया कि वे CEO के पास जाकर स्पष्ट करें कि उन्हें पहले से छपे हुए फॉर्म 7 कैसे मिले। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारी की पृष्ठभूमि में मतदाता सूची की विश्वसनीयता राजनीतिक दलों के बीच केंद्रीय मुद्दा बन चुकी है।