फॉर्म-7 विवाद: येदियुरप्पा की चेतावनी — भाजपा कार्यकर्ताओं पर FIR वापस नहीं हुई तो कर्नाटक भर में प्रदर्शन
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की केंद्रीय संसदीय समिति के सदस्य बी.एस. येदियुरप्पा ने शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि फॉर्म-7 आवेदन मामले में भाजपा कार्यकर्ताओं के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी (FIR) वापस नहीं ली गईं, तो पार्टी कर्नाटक के सभी जिलों में व्यापक प्रदर्शन करेगी। येदियुरप्पा ने बेंगलुरु में पुलिस महानिदेशक एवं महानिरीक्षक एम.ए. सलीम से मुलाकात कर उन्हें ज्ञापन सौंपा।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह मामला कर्नाटक में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान उपजा है, जब बड़ी संख्या में फॉर्म-7 आवेदन जमा किए जाने के आरोप सामने आए। फॉर्म-7 चुनाव आयोग का वह आधिकारिक फॉर्म है, जिसके ज़रिए मतदाता सूची से किसी व्यक्ति का नाम हटाने का अनुरोध किया जाता है।
गुरुवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने बेंगलुरु स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के बाहर धरना दिया और कथित तौर पर अल्पसंख्यक, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के पात्र मतदाताओं के नाम हटाने की कथित साजिश की जाँच एवं FIR दर्ज करने की माँग की।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी की कार्रवाई
मुख्यमंत्री के धरने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अनबुकुमार ने राज्य की सभी 224 विधानसभा सीटों के निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिया कि जानबूझकर गलत जानकारी के साथ फॉर्म-7 समेत मतदाता सूची से जुड़े आवेदन जमा करने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए। इसके बाद पुलिस ने भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं सहित कई लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कीं।
येदियुरप्पा का रुख और भाजपा की माँग
येदियुरप्पा ने राज्य सरकार पर भाजपा कार्यकर्ताओं के विरुद्ध झूठे आरोप लगाने और पुलिस के माध्यम से उन्हें प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, 'मुख्यमंत्री की बातों को सुनकर आप हमारे पार्टी कार्यकर्ताओं पर झूठे आरोप लगा रहे हैं और उन्हें परेशान कर रहे हैं। इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। इसे आज यहीं रोकना होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो हम पूरे राज्य में प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं।'
येदियुरप्पा ने यह भी स्पष्ट किया कि भाजपा यह नहीं माँग रही कि उसके कार्यकर्ताओं द्वारा जमा किए गए सभी फॉर्म-7 स्वीकार किए जाएँ। उनके अनुसार, सही आवेदन स्वीकार किए जाएँ और गलत खारिज किए जाएँ, किंतु कार्यकर्ताओं को झूठे मुकदमों में फँसाना अस्वीकार्य है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
येदियुरप्पा ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री शिवकुमार और मंत्रियों द्वारा चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किए जाने के बाद पुलिस सरकार के दबाव में कार्य कर रही है। उन्होंने शिवकुमार के धरने और सत्याग्रह की आलोचना करते हुए कहा कि इस राजनीतिक दबाव के कारण ही भाजपा कार्यकर्ताओं पर FIR दर्ज हुईं।
शनिवार को भाजपा नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने डीजी-आईजीपी एम.ए. सलीम से मिलकर FIR की समीक्षा और आगे की कार्रवाई रोकने की माँग की। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी भाजपा के बीच मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर तनाव चरम पर है।
आगे क्या होगा
भाजपा ने राज्यव्यापी प्रदर्शन की समयसीमा स्पष्ट नहीं की है, लेकिन यह संकेत दिया है कि यदि FIR वापस नहीं ली गईं तो आंदोलन तेज होगा। SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची की शुद्धता और राजनीतिक दुरुपयोग के आरोप दोनों पक्षों की ओर से लगाए जा रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में यह विवाद और गहराने की आशंका है।