फॉर्म-7 विवाद: कर्नाटक BJP अध्यक्ष विजयेंद्र का सीएम शिवकुमार पर पलटवार, मतदाता सूची में गड़बड़ी के आरोप
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक भाजपा (BJP) अध्यक्ष और विधायक बीवाई विजयेंद्र ने 1 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के उन आरोपों पर तीखा पलटवार किया, जिनमें शिवकुमार ने BJP नेताओं पर फॉर्म-7 आवेदनों के ज़रिए अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्गों, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटवाने की कोशिश का आरोप लगाया था। बेंगलुरु में पत्रकारों से बात करते हुए विजयेंद्र ने कहा कि भारत निर्वाचन आयोग के समक्ष कथित अनियमितताओं को उठाना पूरी तरह उचित और वैध है।
मुख्य घटनाक्रम
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर BJP और अन्य राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में निर्वाचन आयोग से संपर्क कर रहे हैं। विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के दौरान कुछ स्थानों पर मुस्लिम मतदाताओं को मस्जिदों में इकट्ठा किया गया और कथित तौर पर अवैध रूप से नाम जोड़ने की सुविधा के लिए वहाँ सरकारी अधिकारियों को तैनात किया गया।
उन्होंने दावा किया कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी ऐसी घटनाओं की खबरें सामने आई हैं, हालाँकि इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
BJP का बचाव और तर्क
विजयेंद्र ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'जिन नामों को अवैध रूप से मतदाता सूची में जोड़े जाने का संदेह है, उन्हें हटाने के लिए निर्वाचन आयोग से अनुरोध करने में क्या गलत है? अगर नाम सही हैं तो आयोग उन्हें सूची में बनाए रखेगा और अगर वे अवैध हैं तो उन्हें हटा दिया जाएगा।' उनके अनुसार, अंतिम निर्णय निर्वाचन आयोग का है, न कि किसी राजनीतिक दल का।
उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे को उठाने पर FIR दर्ज होने या किसी धमकी का भय उन्हें नहीं है। कथित बांग्लादेशी प्रवासियों के नाम मतदाता सूची में जोड़े जाने का आरोप लगाते हुए विजयेंद्र ने पूछा कि उस समय शासन में बैठे लोगों की चिंता कहाँ थी।
KPSC सुधार की माँग
मतदाता सूची विवाद के साथ-साथ विजयेंद्र ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) में कथित अनियमितताओं पर भी राज्य सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि KPSC को बंद करने से समस्या हल नहीं होगी; बजाय इसके, सरकार को भर्ती प्रक्रिया में वर्षों से जारी गड़बड़ियों को दूर कर पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए।
उन्होंने युवाओं की पीड़ा का ज़िक्र करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में कई साल लगाने वाले युवाओं को परीक्षा व्यवस्था की अनियमितताओं के कारण उनकी मेहनत के अनुरूप परिणाम नहीं मिल पाता। KPSC में सुधार और रोज़गार के अवसर बढ़ाना उनकी प्राथमिक माँग रही।
राजनीतिक संदर्भ
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब कर्नाटक में आगामी चुनावी तैयारियों के बीच मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया जोरों पर है। गौरतलब है कि SIR प्रक्रिया के तहत नाम जोड़ने और हटाने, दोनों के लिए निर्धारित फॉर्म भरे जाते हैं, और यह एक नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया है। विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि जो लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का मुकाबला नहीं कर पा रहे, वे चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं।
क्या होगा आगे
फिलहाल यह मामला निर्वाचन आयोग के समक्ष है और आयोग ही इन शिकायतों पर अंतिम निर्णय लेगा। दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच कर्नाटक में राजनीतिक तापमान चढ़ा हुआ है, और आने वाले दिनों में निर्वाचन आयोग की प्रतिक्रिया इस विवाद की दिशा तय करेगी।