1 अक्टूबर 2026
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वोटर लिस्ट से नाम हटाने की साजिश: कर्नाटक CM शिवकुमार ने BJP पर लगाया फॉर्म 7 के दुरुपयोग का आरोप

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वोटर लिस्ट से नाम हटाने की साजिश: कर्नाटक CM शिवकुमार ने BJP पर लगाया फॉर्म 7 के दुरुपयोग का आरोप

सारांश

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने BJP पर SIR प्रक्रिया में फॉर्म 7 का दुरुपयोग कर SC/ST और अल्पसंख्यक मतदाताओं के नाम हटाने का आरोप लगाया है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को बूथ-स्तर पर सतर्क रहने और जानकारी जुटाने का निर्देश दिया है — आरोप गंभीर हैं, पर स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी।

मुख्य बातें

शिवकुमार ने 1 अक्टूबर 2026 को BJP पर फॉर्म 7 के जरिए वोटर लिस्ट से नाम हटाने की साजिश का आरोप लगाया।
कथित तौर पर निशाने पर हैं — अल्पसंख्यक, पिछड़ी जातियाँ, SC और ST वर्ग के मतदाता।
प्रभावित क्षेत्रों में बेलगावी, भालकी, मुदिगेरे, मैसूर और आलंद विधानसभा क्षेत्र शामिल बताए गए।
शिवकुमार ने पुलिस, जिला उपायुक्तों और मुख्य चुनाव अधिकारी से जानकारी माँगी है।
इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है; BJP की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 1 अक्टूबर 2026 को कांग्रेस के बूथ-लेवल एजेंटों (BLA), पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) प्रक्रिया के दौरान फॉर्म 7 के जरिए वोटर लिस्ट से नाम हटाने की कथित साजिश की जानकारी उनके कार्यालय को दें। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता बड़ी तादाद में फर्जी फॉर्म 7 आवेदन जमा कर रहे हैं — हालाँकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री शिवकुमार ने सोशल मीडिया पर दो वीडियो शेयर कर BLA, BLA-1, BLA-2 और पार्टी के अन्य नेताओं से कहा कि वे बूथ-लेवल अधिकारियों (BLO) के साथ मिलकर जाँचें कि उनके विधानसभा क्षेत्रों और पोलिंग बूथों में वोटरों के खिलाफ कोई आपत्ति दर्ज है या नहीं। उन्होंने पार्टी नेताओं से यह जानकारी गुरुवार दोपहर से पहले उनके कार्यालय और ईमेल पर भेजने को कहा।

शिवकुमार ने कहा कि उन्हें बेलगावी, भालकी, मुदिगेरे, मैसूर और राज्य के कई अन्य इलाकों से ऐसी घटनाओं की सूचना मिली है — इनमें कांग्रेस विधायकों वाले विधानसभा क्षेत्र भी शामिल हैं। आलंद विधानसभा क्षेत्र में फॉर्म 7 के कथित दुरुपयोग का विशेष उल्लेख करते हुए उन्होंने दावा किया कि इस तरीके से कांग्रेस को चुनावी स्तर पर कमज़ोर करने की कोशिश की जा रही है।

किसे बताया जा रहा है निशाना

शिवकुमार का कथित तौर पर आरोप है कि इन आवेदनों के जरिए खास तौर पर अल्पसंख्यक समुदाय, पिछड़ी जातियाँ, अनुसूचित जातियाँ (SC) और अनुसूचित जनजातियाँ (ST) को वोटर लिस्ट से हटाने का प्रयास किया जा रहा है। गौरतलब है कि ये वर्ग परंपरागत रूप से कांग्रेस के वोट आधार का अहम हिस्सा रहे हैं।

यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ धीरे-धीरे शुरू होने लगी हैं और SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता सूचियों का नवीनीकरण जारी है।

सरकार की प्रतिक्रिया और कार्रवाई

मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने पहले ही पुलिस अधिकारियों, जिला उपायुक्तों और कर्नाटक के मुख्य चुनाव अधिकारी से इन आवेदनों और कथित गड़बड़ियों के बारे में जानकारी माँगी है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि इस मामले में सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि कोई भी योग्य मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न हो।

शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक जुड़ाव, धर्म या सामाजिक पृष्ठभूमि से परे हर असली मतदाता का नाम वोटर लिस्ट में बना रहना चाहिए।

फॉर्म 7 क्या है और विवाद क्यों है

फॉर्म 7 का इस्तेमाल चुनावी नामावली से किसी मतदाता का नाम हटाने के लिए दावा या आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है। चुनाव नियमों के तहत ऐसे आवेदनों की जाँच होती है और मतदाता को सुनवाई का अवसर दिया जाता है। कर्नाटक में मौजूदा विवाद इस आशंका पर केंद्रित है कि बड़ी संख्या में एक साथ आवेदन दाखिल करके योग्य मतदाताओं को प्रक्रिया में उलझाया जा सकता है।

यह पहली बार नहीं है जब देश में SIR प्रक्रिया के दौरान थोक में फॉर्म 7 दाखिल होने के आरोप उठे हों — कई राज्यों में इस तरह की शिकायतें पहले भी सामने आई हैं, जिससे चुनाव आयोग को दिशा-निर्देश जारी करने पड़े थे।

आगे क्या होगा

पार्टी कार्यकर्ताओं से जानकारी इकट्ठा होने के बाद शिवकुमार के कार्यालय द्वारा इसे चुनाव आयोग के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की संभावना है। यदि आरोप साबित होते हैं, तो संबंधित आवेदनों को रद्द करने और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की माँग उठ सकती है। BJP की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन अभी तक वे एकतरफा राजनीतिक बयानबाजी की श्रेणी में हैं — स्वतंत्र सत्यापन का अभाव उनकी विश्वसनीयता को सीमित करता है। असली सवाल यह है कि SIR जैसी नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया को राज्यों में बार-बार राजनीतिक रंग क्यों मिल जाता है, और चुनाव आयोग इस पर समय रहते संज्ञान क्यों नहीं लेता। यदि थोक में फॉर्म 7 जमा करना सच है, तो यह सिर्फ कांग्रेस का मुद्दा नहीं — यह लोकतंत्र की बुनियाद पर हमला है। लेकिन अगर यह चुनावी आख्यान निर्माण है, तो मीडिया को दोनों पक्षों की जवाबदेही समान रूप से सुनिश्चित करनी चाहिए।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फॉर्म 7 क्या होता है और इसका दुरुपयोग कैसे हो सकता है?
फॉर्म 7 वह आधिकारिक प्रपत्र है जिसके जरिए कोई भी व्यक्ति किसी मतदाता के नाम को चुनावी सूची से हटाने के लिए आपत्ति दर्ज कर सकता है। चुनाव नियमों के तहत इन आवेदनों की जाँच होती है, लेकिन बड़ी संख्या में एक साथ आवेदन करने से प्रशासनिक प्रक्रिया बाधित हो सकती है और योग्य मतदाताओं के नाम कट सकते हैं।
CM शिवकुमार ने किन इलाकों में फॉर्म 7 के दुरुपयोग का आरोप लगाया है?
शिवकुमार ने बेलगावी, भालकी, मुदिगेरे, मैसूर और आलंद विधानसभा क्षेत्र समेत कर्नाटक के कई हिस्सों का नाम लिया है। इनमें कांग्रेस विधायकों वाले क्षेत्र भी शामिल बताए गए हैं।
कर्नाटक सरकार इस मामले में क्या कार्रवाई कर रही है?
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने पुलिस अधिकारियों, जिला उपायुक्तों और मुख्य चुनाव अधिकारी से जानकारी माँगी है। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को बूथ-स्तर पर डेटा इकट्ठा कर गुरुवार दोपहर तक उनके कार्यालय भेजने का निर्देश दिया।
क्या BJP ने इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
अभी तक BJP की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। साथ ही, शिवकुमार द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि भी नहीं हुई है।
SIR प्रक्रिया क्या है जिसके दौरान यह विवाद उठा है?
'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूचियों को अद्यतन करने की एक नियमित प्रक्रिया है, जिसमें नए नाम जोड़ने, पुराने हटाने और सुधार करने का काम होता है। इसी प्रक्रिया के दौरान फॉर्म 7 के जरिए आपत्तियाँ दर्ज की जाती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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