कर्नाटक SIR विवाद: CM शिवकुमार ने मांगा फॉर्म-7 का विधानसभावार डेटा, अल्पसंख्यक-दलित मतदाताओं को निशाना बनाने की आशंका
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने 30 सितंबर 2026 को मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान फॉर्म-7 के माध्यम से दर्ज आपत्तियों का विधानसभा क्षेत्रवार पूरा ब्योरा तलब किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हर वास्तविक मतदाता के मताधिकार की रक्षा होनी चाहिए और प्रक्रिया को प्रभावित करने की किसी भी व्यवस्थित कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री की माँगें और आशंकाएँ
शिवकुमार ने सोशल मीडिया पर जारी बयान में कहा कि उन्होंने CEO से उन आपत्तियों का विशेष ब्योरा माँगा है जिनमें मतदाताओं का नाम हटाने के लिए अनिवार्य कारण या निर्धारित जानकारी नहीं दी गई। इसके अलावा पहले से प्रिंट की गई मतदाता जानकारी के साथ दाखिल आपत्तियों की भी सूची माँगी गई है, जिन्हें मुख्यमंत्री ने 'संदिग्ध' करार दिया।
मुख्यमंत्री ने आशंका जताई कि बड़ी संख्या में एक साथ दर्ज कराई गई आपत्तियों का इस्तेमाल अल्पसंख्यक समुदायों, दलितों, आदिवासियों और अन्य पिछड़े वर्गों के मतदाताओं को लक्षित करने के लिए हो सकता है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में हेरफेर करने और इस प्रक्रिया को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश स्वीकार्य नहीं है।
एफआईआर और जवाबदेही की माँग
शिवकुमार ने निर्देश दिया कि SIR प्रक्रिया से जुड़ी आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने वाले लोगों के विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में दर्ज एफआईआर की प्रतियाँ राज्य के मुख्य सचिव को भेजी जाएँ, ताकि उच्चतम प्रशासनिक स्तर पर निगरानी सुनिश्चित हो सके।
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री पहले भी कर्नाटक में SIR प्रक्रिया को रद्द करने की माँग कर चुके हैं। यह बयान उसी सिलसिले में एक और कड़ी है।
सिटिजंस वोटर वॉच कमेटी की मुलाकात
इसी दिन बहुभाषी अभिनेता एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज के नेतृत्व में सिटिजंस वोटर वॉच कमेटी और SIR विपक्षी गठबंधन के एक प्रतिनिधिमंडल ने बेंगलुरु के सदाशिवनगर स्थित मुख्यमंत्री आवास पर शिवकुमार से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को एक 'SIR ऑडिट रिपोर्ट' भी सौंपी।
इस बैठक में नूर श्रीधर, एम. लक्ष्मण, वीरसंगय्या और अन्य सदस्य उपस्थित रहे। ऑडिट रिपोर्ट में कथित तौर पर बड़े पैमाने पर संदिग्ध आपत्तियों के दस्तावेज़ी साक्ष्य हैं।
फॉर्म-7 और SIR प्रक्रिया क्या है
फॉर्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची से किसी व्यक्ति का नाम हटाने के लिए आपत्ति दर्ज कराने हेतु किया जाता है। चुनावी नियमों के तहत ऐसी प्रत्येक आपत्ति की जाँच और सत्यापन अनिवार्य है।
मौजूदा विवाद मुख्यतः बड़ी संख्या में एक साथ दाखिल फॉर्म-7 आपत्तियों से जुड़ा है, जिनके बारे में आशंका है कि ये वास्तविक मतदाताओं को सूची से बाहर करने का साधन बन सकती हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ पृष्ठभूमि में चल रही हैं।
आगे की राह
अब सबकी नज़रें मुख्य निर्वाचन अधिकारी की प्रतिक्रिया और CEO कार्यालय द्वारा विधानसभावार डेटा साझा करने की समयसीमा पर हैं। चुनाव आयोग की सत्यापन प्रक्रिया और इन आपत्तियों पर उसकी कार्रवाई इस पूरे विवाद के केंद्र में बनी रहेगी। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद राज्य में FIR दर्ज होने की स्थिति में यह विवाद और गहरा सकता है।