कर्नाटक SIR विवाद: शिवकुमार का आरोप — BJP-JDS कार्यकर्ताओं ने 1 लाख से ज़्यादा फॉर्म-7 जलाए
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने 6 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में पत्रकारों के सामने गंभीर आरोप लगाए कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (सेक्युलर) (JDS) के कार्यकर्ताओं ने एफआईआर दर्ज होने के बाद बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) से वोटर-नाम हटाने वाले 'फॉर्म-7' के एक लाख से ज़्यादा आवेदन जबरदस्ती छीनकर जला दिए। शिवकुमार के अनुसार, यह सब स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के दौरान मतदाता सूची में हेरफेर करने की एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा था।
मुख्य आरोप: क्या बताया मुख्यमंत्री ने
मुख्यमंत्री शिवकुमार ने दावा किया कि निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर BJP और JDS कार्यकर्ताओं को 500 से 3,000 तक फॉर्म-7 आवेदन वितरित किए गए थे। उन्होंने कहा कि उनके चुनाव आयोग कार्यालय पहुँचने के बाद इन कार्यकर्ताओं ने BLO के पास जाकर पहले से जमा किए गए फॉर्म छीन लिए और उन्हें जला दिया। शिवकुमार के शब्दों में, 'सभी जगहों पर उन्होंने BLO को धमकाकर ऐसे एक लाख से ज़्यादा फॉर्म वापस ले लिए।'
मुख्यमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ फॉर्म-7 आवेदनों में जीवित मतदाताओं को मृत घोषित किया गया था और जिन लोगों ने फॉर्म पर हस्ताक्षर किए, उनमें से अनेक को यह भी नहीं पता था कि वे किस दस्तावेज़ पर साइन कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि कार्यकर्ताओं को मतदाताओं के नाम और अन्य चुनावी डेटा कहाँ से प्राप्त हुए।
SIR प्रक्रिया और फॉर्म-7 का संदर्भ
गौरतलब है कि 4 अक्टूबर 2026 तक SIR प्रक्रिया के दौरान कर्नाटक में 91,278 फॉर्म-7 आवेदन प्राप्त हुए थे। फॉर्म-7 वह दस्तावेज़ है जिसके ज़रिये किसी मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से हटाने की आपत्ति दर्ज की जाती है। यह ऐसे समय में आया है जब SIR को लेकर कर्नाटक में राजनीतिक तनाव पहले से ही चरम पर था।
शिवकुमार ने भालकी और बाबलेश्वर विधानसभा क्षेत्रों का विशेष रूप से उल्लेख किया, जहाँ कथित तौर पर BJP नेताओं ने फॉर्म-7 जमा करने की बात स्वीकार की और अनुरोध किया कि उनके खिलाफ कार्रवाई न हो। उन्होंने बेलगावी और मैसूरु से भी ऐसी घटनाओं का ज़िक्र किया।
चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया
कर्नाटक के मुख्य चुनाव अधिकारी वी. अंबुकुमार ने स्पष्ट किया कि अब तक फॉर्म-7 आपत्तियों के आधार पर किसी भी मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया गया है। उन्होंने बताया कि नाम हटाने का फैसला तभी होगा जब संबंधित चुनाव पंजीकरण अधिकारी नोटिस जारी करें, सुनवाई हो और दस्तावेज़ों की जाँच हो।
विरोध प्रदर्शन के बाद CEO ने चुनाव अधिकारियों को निर्देश दिया कि जाँच के उपरांत जानबूझकर गलत बयान देने वाले आवेदकों के खिलाफ तय प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई शुरू की जाए। आयोग ने योग्य मतदाताओं को 'फॉर्म-6' के ज़रिये नाम जोड़ने के लिए एक बड़े अभियान की भी अनुमति दी।
विपक्ष का पलटवार
BJP नेताओं ने शिवकुमार के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि बड़ी संख्या में फॉर्म-7 आवेदन जमा करना कानूनी रूप से प्रतिबंधित नहीं है और उनकी सत्यापन प्रक्रिया चुनाव अधिकारियों की जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने इसके जवाब में कहा कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया में जानबूझकर बाधाएँ उत्पन्न कर रहा है और उन्हें उनकी रणनीति की पूरी जानकारी है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और आगे क्या
शिवकुमार ने इस संदर्भ में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के हस्तक्षेप का भी उल्लेख किया, जिन्होंने कथित तौर पर आलंद और महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्रों में इस साजिश का पर्दाफाश किया। उन्होंने पहले हुए 'चिलुमे' विवाद का भी हवाला दिया और कहा कि विपक्ष पहले भी ऐसे हंगामे खड़े करता रहा है।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार SIR प्रक्रिया में सहयोग करती रहेगी, परन्तु तय प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी भी वास्तविक मतदाता का नाम हटाने की किसी भी कोशिश का कड़ा विरोध किया जाएगा। आने वाले दिनों में जाँच का दायरा और विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया इस विवाद की दिशा तय करेगी।