कर्नाटक भाजपा का डीजीपी-आईजीपी को पत्र, फॉर्म-7 एफआईआर रद्द न हुई तो राज्यव्यापी आंदोलन की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक भाजपा अध्यक्ष एवं विधायक बी.वाई. विजयेंद्र ने 3 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में पुलिस महानिदेशक एवं महानिरीक्षक (डीजी-आईजीपी) एम.ए. सलीम से मुलाकात कर माँग की कि फॉर्म-7 आवेदन जमा करने के सिलसिले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ताओं के विरुद्ध दर्ज एफआईआर तत्काल वापस ली जाएँ। विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि ये मामले राज्य सरकार के दबाव में दर्ज किए गए हैं, जो पुलिस विभाग का राजनीतिक दुरुपयोग है।
प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन थे
इस उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विजयेंद्र ने किया। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा की केंद्रीय संसदीय समिति के सदस्य बी.एस. येदियुरप्पा, विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक, विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलावादी नारायणस्वामी, पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं भाजपा विधायक सी.एन. अश्वथ नारायण, विधायक बायराथी बसवराज, एस.आर. विश्वनाथ, के. गोपालाैयाह, सांसद पी.सी. मोहन और अन्य वरिष्ठ नेता शामिल थे। पार्टी की इस एकजुटता को विशेषज्ञ विपक्ष की संगठनात्मक ताकत के प्रदर्शन के रूप में देख रहे हैं।
फॉर्म-7 और कानूनी पहलू
डीजी-आईजीपी से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में विजयेंद्र ने स्पष्ट किया कि फॉर्म-7 जमा करना भारत निर्वाचन आयोग के नियमों के तहत प्रत्येक नागरिक को प्राप्त एक वैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा, 'अगर वोटर लिस्ट में अयोग्य या गलत नाम हैं, तो कोई भी व्यक्ति फॉर्म-7 जमा कर सकता है। चुनाव आयोग आवेदन की जाँच करता है और अगर आपत्ति सही पाई जाती है तो कार्रवाई करता है। अगर आपत्ति सही नहीं होती है, तो उसे खारिज कर दिया जाता है। यह चुनावी प्रक्रिया का एक सामान्य हिस्सा है।'
विजयेंद्र ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार इस कानूनी प्रावधान के उपयोग पर भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत एफआईआर दर्ज करवा रही है, जो उनके अनुसार कानून का स्पष्ट दुरुपयोग है।
सरकार पर आरोप और मुख्यमंत्री को चुनौती
विजयेंद्र ने दावा किया कि मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और राज्य सरकार के मंत्रियों द्वारा चुनाव आयोग के समक्ष विरोध प्रदर्शन किए जाने के बाद पुलिस पर दबाव बनाया गया और तब ये एफआईआर दर्ज हुईं। एसआईटी गठन पर मुख्यमंत्री के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि सत्ता में होने का अर्थ यह नहीं कि सरकार पुलिस तंत्र को अपनी इच्छानुसार संचालित करे। उन्होंने कहा, 'सत्ता किसी की पारिवारिक संपत्ति नहीं है। सत्ता का गलत इस्तेमाल बंद होना चाहिए।'
गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब कर्नाटक में कांग्रेस और भाजपा के बीच मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर राजनीतिक तनाव पहले से चरम पर है।
भाजपा की चेतावनी और आगे की रणनीति
विजयेंद्र ने चेतावनी दी, 'हम चुप नहीं बैठेंगे। अपने कार्यकर्ताओं की सुरक्षा हमारी जिम्मेदारी है और हम उनके बचाव के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। हमारे कार्यकर्ताओं के खिलाफ गलत तरीके से दर्ज किए गए मामले वापस लिए जाने चाहिए। वरना, हम विरोध प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे, जिसमें पुलिस स्टेशनों के बाहर प्रदर्शन भी शामिल है।' उन्होंने साफ कहा कि यदि राज्य सरकार अपने रवैये से नहीं हटी, तो भाजपा पूरे कर्नाटक में आंदोलन शुरू करेगी।
आने वाले दिनों में इस विवाद का राजनीतिक असर और गहरा होने की संभावना है, खासतौर पर तब जब पार्टी के वरिष्ठतम नेता इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।