6 अक्टूबर 2026
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कर्नाटक में पुलिस स्टेशन 'कांग्रेस स्टेशन' बने : भाजपा नेता आर. अशोक का राज्यपाल से गंभीर आरोप

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कर्नाटक में पुलिस स्टेशन 'कांग्रेस स्टेशन' बने : भाजपा नेता आर. अशोक का राज्यपाल से गंभीर आरोप

सारांश

कर्नाटक में भाजपा ने कांग्रेस सरकार पर पुलिस के ज़रिए विपक्षी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने का गंभीर आरोप लगाया है। विपक्ष के नेता आर. अशोक और चलवाडी नारायणस्वामी ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात कर कार्रवाई की माँग की — और फॉर्म-7 विवाद में चुनाव आयोग को राज्य सरकार से अलग किया।

मुख्य बातें

अशोक ने 6 अक्टूबर 2026 को आरोप लगाया कि कर्नाटक के पुलिस स्टेशन 'कांग्रेस स्टेशन' बन गए हैं।
भाजपा-जेडी(एस) नेताओं ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात कर कांग्रेस सरकार के खिलाफ कार्रवाई की माँग की।
विपक्ष ने 5 अक्टूबर को चुनाव आयोग से फॉर्म-7 पर स्पष्टीकरण माँगा; आयोग ने कहा पुलिस को मामले दर्ज करने का कोई निर्देश नहीं दिया।
जयनगर के भाजपा विधायक के खिलाफ भी शिकायत दर्ज होने का भाजपा ने उल्लेख किया।
चलवाडी नारायणस्वामी ने कहा — फॉर्म-7 जमा होने के बाद अब तक एक भी मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाया गया।

कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को आरोप लगाया कि बेंगलुरु सहित पूरे कर्नाटक के पुलिस स्टेशन 'कांग्रेस स्टेशन' बन चुके हैं, जहाँ से भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (सेक्युलर) (JD(S)) के कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर निशाना बनाने के लिए झूठे आपराधिक मामले दर्ज किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के नेताओं के साथ राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए अशोक ने राज्य की कांग्रेस सरकार पर 'गुंडा संस्कृति' को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया।

राज्यपाल से मुलाकात और माँगें

आर. अशोक के नेतृत्व में भाजपा और जेडी(एस) के नेताओं ने राज्यपाल थावरचंद गहलोत से शिष्टाचार भेंट कर विपक्षी कार्यकर्ताओं पर हो रही कथित कार्रवाइयों का ब्यौरा सौंपा। उन्होंने राज्यपाल से कांग्रेस सरकार के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की माँग की। अशोक ने कहा कि बिना किसी ठोस आधार के भाजपा-जेडी(एस) कार्यकर्ताओं पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं, जिसका उद्देश्य उन्हें राजनीतिक रूप से परेशान करना है।

फॉर्म-7 विवाद और चुनाव आयोग की स्थिति

अशोक ने बताया कि विपक्षी नेताओं ने सोमवार, 5 अक्टूबर को चुनाव आयोग से भी मुलाकात की और फॉर्म-7 आवेदनों को लेकर स्पष्टीकरण माँगा था। उन्होंने कहा कि कानून के तहत कोई भी नागरिक फॉर्म-7 जमा कर सकता है और यह संख्या पर कोई सीमा नहीं है। उन्होंने दावा किया कि जब चुनाव आयोग से पूछा गया कि क्या उन्होंने पुलिस को मामले दर्ज करने के निर्देश दिए थे, तो आयोग ने स्पष्ट किया कि उसने ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया।

परिषद में विपक्ष के नेता का आरोप

कर्नाटक विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवाडी नारायणस्वामी ने भी इसी तर्ज पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार उन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराकर आम जनता में भय का माहौल बना रही है, जिन पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शिकायत की है। नारायणस्वामी ने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्य चुनाव अधिकारी ने फॉर्म-7 मामले पर सफाई दे दी है — यह मसला चुनाव आयोग और आम जनता के बीच का है, इसमें राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं होनी चाहिए।

फॉर्म-7 और मतदाता सूची पर स्पष्टता

नारायणस्वामी ने जोर देकर कहा कि अब तक फॉर्म-7 जमा होने के बाद एक भी मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से नहीं हटाया गया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग हर आवेदन की जाँच करता है — यदि दस्तावेज सही पाए गए तो नाम बना रहेगा, अन्यथा आवेदन खारिज कर दिया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल पहले से ही गर्म है।

राजनीतिक परिप्रेक्ष्य और आगे की राह

गौरतलब है कि कर्नाटक में सिद्धारमैया नीत कांग्रेस सरकार और भाजपा-जेडी(एस) गठजोड़ के बीच आरोप-प्रत्यारोप का यह सिलसिला नया नहीं है। जयनगर के भाजपा विधायक के खिलाफ शिकायत दर्ज होने का उल्लेख करते हुए अशोक ने इसे सत्तापक्ष की राजनीतिक प्रतिशोध की रणनीति बताया। कांग्रेस की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राज्यपाल की ओर से इस ज्ञापन पर क्या कदम उठाए जाते हैं, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो भाजपा के आख्यान को आंशिक बल देता है। हालाँकि, आरोपों की राजनीतिक टाइमिंग — स्थानीय निकाय चुनावों से पहले — यह भी संकेत करती है कि विपक्ष जमीनी लड़ाई को राज्यपाल और मीडिया के मंच पर ले जाकर कांग्रेस पर दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है। जब तक ठोस न्यायिक या प्रशासनिक जाँच न हो, यह मामला आरोप-प्रत्यारोप के दायरे से बाहर नहीं निकलेगा।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आर. अशोक ने कर्नाटक पुलिस पर क्या आरोप लगाए हैं?
कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर. अशोक ने आरोप लगाया है कि राज्यभर के पुलिस स्टेशन 'कांग्रेस स्टेशन' बन चुके हैं, जहाँ से भाजपा और जेडी(एस) कार्यकर्ताओं के खिलाफ बिना आधार के आपराधिक मामले दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने इसे कांग्रेस सरकार की 'गुंडा संस्कृति' करार दिया है।
भाजपा नेताओं ने राज्यपाल से मुलाकात क्यों की?
भाजपा और जेडी(एस) नेताओं ने 6 अक्टूबर 2026 को राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात कर विपक्षी कार्यकर्ताओं पर कथित राजनीतिक उत्पीड़न का मुद्दा उठाया और कांग्रेस सरकार के खिलाफ कार्रवाई की माँग की। नेताओं का कहना था कि पुलिस का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव के औज़ार के रूप में किया जा रहा है।
फॉर्म-7 विवाद क्या है और चुनाव आयोग का क्या कहना है?
फॉर्म-7 मतदाता सूची से नाम हटाने का आवेदन होता है, जिसे कोई भी नागरिक जमा कर सकता है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि इन आवेदनों की आड़ में भाजपा-जेडी(एस) कार्यकर्ताओं पर मामले दर्ज किए गए। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि उसने पुलिस को मामले दर्ज करने का कोई निर्देश नहीं दिया और फॉर्म-7 सबमिशन के बाद एक भी नाम अब तक वोटर लिस्ट से नहीं हटाया गया।
चलवाडी नारायणस्वामी ने क्या कहा?
कर्नाटक विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलवाडी नारायणस्वामी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार एफआईआर दर्ज कराकर लोगों में भय का माहौल बना रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फॉर्म-7 का मामला चुनाव आयोग और जनता के बीच का विषय है, इसमें राज्य सरकार की भूमिका नहीं होनी चाहिए।
इन आरोपों पर कांग्रेस का क्या रुख है?
रिपोर्टों के अनुसार, भाजपा के इन आरोपों पर कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राज्यपाल के ज्ञापन पर आगे क्या कदम उठाए जाएँगे, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
राष्ट्र प्रेस
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