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चुनाव आयोग पर सवाल: प्रियांक खड़गे बोले — 'संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा BJP की आदत'

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चुनाव आयोग पर सवाल: प्रियांक खड़गे बोले — 'संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा BJP की आदत'

सारांश

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने BJP पर सीधा वार किया — 'संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा आदत बन रही है।' SIR विवाद, प्री-प्रिंटेड फॉर्म-7 और सॉफ्टवेयर ऑडिट के सवालों ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर तीखी बहस छेड़ दी है।

मुख्य बातें

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने 4 अक्टूबर 2026 को आरोप लगाया कि BJP संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करती और उन पर कब्जा जमाती है।
खड़गे ने पूछा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को न्यायिक छूट की आवश्यकता क्यों है और SIR के बाद सॉफ्टवेयर ऑडिट देर से क्यों हुआ।
कर्नाटक BJP प्रतिनिधिमंडल ने डीजी-आईजीपी एम.ए.
सलीम से मिलकर फॉर्म-7 से जुड़ी FIR रोकने की माँग की।
खड़गे ने दोषियों पर 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' की धारा 31 के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी।
शिवसेना (UBT) नेता किशोरी पेडनेकर ने CEC ज्ञानेश कुमार पर लोकतंत्र और संविधान के अपमान का आरोप लगाया।

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने 4 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत में भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करना और उन पर कब्जा जमाना भाजपा की बढ़ती आदत बनती जा रही है। यह बयान विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर छिड़े विवाद और चुनाव आयोग की भूमिका पर उठ रहे सवालों की पृष्ठभूमि में आया है। शिवसेना (UBT) नेता किशोरी पेडनेकर ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लोकतंत्र और संविधान के अपमान का आरोप लगाया।

मुख्य घटनाक्रम

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में कहा था कि 'हार मानने के बाद जनादेश का अपमान करना कांग्रेस के डीएनए में है।' इसी बयान के जवाब में प्रियांक खड़गे ने पलटवार करते हुए कहा, 'संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करना और उन पर कब्जा करना भाजपा की आदत बनती जा रही है।' उन्होंने सीधा सवाल दागा कि मुख्य चुनाव आयुक्त को न्यायिक छूट की आवश्यकता क्यों है और चौहान को इसका जवाब देना चाहिए।

चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल

खड़गे ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश, हरियाणा, तमिलनाडु, बिहार और पश्चिम बंगाल में चुनावी प्रक्रिया को लेकर पूर्व चुनाव आयोग के अधिकारी भी सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने कहा, 'हर कोई जानता है कि सॉफ्टवेयर कैसे बदला जा रहा है और इसका कोई ऑडिट नहीं हो रहा।' उन्होंने इस बात को आयोग की मंशा पर संदेह का आधार बताया कि SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव आयोग ने सॉफ्टवेयर को ऑडिट के लिए ITI को सौंपने का फैसला किया।

फॉर्म-7 विवाद और BJP प्रतिनिधिमंडल

कर्नाटक भाजपा के एक बड़े प्रतिनिधिमंडल ने डीजी-आईजीपी एम.ए. सलीम से मुलाकात कर माँग की कि पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ 'फॉर्म-7' आवेदनों को लेकर दर्ज FIR रोकी जाएँ और उनकी समीक्षा बंद की जाए। इस पर खड़गे ने पूछा, 'वे कह रहे हैं कि पहले से प्री-प्रिंटेड बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा करने वालों के खिलाफ शिकायत न हो — यह कानूनी कैसे हो सकता है?' उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई बूथ स्तर का अधिकारी (BLA) भी है, तो वह एक साथ 300-400 फॉर्म कैसे जमा कर सकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि जाँच में दोष पाए जाने पर 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' की धारा 31 के तहत मामला दर्ज किया जाएगा।

शिवसेना (UBT) की तीखी प्रतिक्रिया

शिवसेना (UBT) नेता किशोरी पेडनेकर ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल पर निशाना साधते हुए कहा, 'उनके काम ने लोकतंत्र और बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान का अपमान किया है और उन्हें इसके नतीजे भुगतने होंगे।' यह बयान विपक्षी दलों के उस व्यापक असंतोष का प्रतिनिधित्व करता है जो चुनावी पारदर्शिता को लेकर लगातार मुखर होता जा रहा है।

आगे क्या

यह ऐसे समय में आया है जब कई विपक्षी दल एकजुट होकर चुनाव आयोग के कामकाज पर संसदीय बहस की माँग कर रहे हैं। गौरतलब है कि SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची की शुद्धता पर यह टकराव आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी के बीच राजनीतिक रूप से और संवेदनशील होता जा रहा है। प्रियांक खड़गे ने साफ संकेत दिया कि कर्नाटक सरकार प्री-प्रिंटेड फॉर्म-7 मामलों की जाँच जारी रखेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह केवल चुनावी मौसम की बयानबाजी बनकर रह जाएगी। चुनाव आयोग के लिए भी यह समय है कि वह सॉफ्टवेयर ऑडिट और फॉर्म-7 प्रक्रिया पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण दे — चुप्पी संदेह को और गहरा करती है।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रियांक खड़गे ने BJP पर क्या आरोप लगाए?
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करना और उन पर कब्जा करना BJP की आदत बनती जा रही है। उन्होंने यह बयान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के उस बयान के जवाब में दिया जिसमें चौहान ने जनादेश का अपमान करना कांग्रेस के DNA में बताया था।
SIR विवाद क्या है और इसमें चुनाव आयोग की क्या भूमिका है?
विशेष सारांश पुनरीक्षण (SIR) मतदाता सूची को अद्यतन करने की प्रक्रिया है, जिस पर विपक्ष ने पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं। खड़गे ने आरोप लगाया कि SIR पूरी होने के बाद चुनाव आयोग ने सॉफ्टवेयर ऑडिट के लिए ITI को सौंपने का फैसला किया, जो उनके अनुसार आयोग की मंशा पर संदेह पैदा करता है।
फॉर्म-7 विवाद क्या है?
फॉर्म-7 मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए आवेदन होता है। खड़गे ने आरोप लगाया कि पहले से भरे (प्री-प्रिंटेड) फॉर्म-7 बड़ी संख्या में जमा किए जा रहे हैं जिनमें नाम, पता और EPIC नंबर पहले से दर्ज हैं। कर्नाटक BJP ने इन मामलों में FIR रोकने की माँग की, जिसे खड़गे ने अवैध बताया।
किशोरी पेडनेकर ने CEC पर क्या आरोप लगाए?
शिवसेना (UBT) नेता किशोरी पेडनेकर ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाया कि उनके काम ने लोकतंत्र और बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान का अपमान किया है। उन्होंने यह भी कहा कि कुमार को इसके नतीजे भुगतने होंगे।
प्रियांक खड़गे ने आगे क्या कार्रवाई की चेतावनी दी?
खड़गे ने कहा कि प्री-प्रिंटेड फॉर्म-7 मामलों की जाँच जारी रहेगी और दोषियों पर 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' की धारा 31 के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि BLA का दर्जा रखने वाला भी 300-400 फॉर्म एक साथ जमा नहीं कर सकता।
राष्ट्र प्रेस
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