प्रियांक खड़गे का BJP पर निशाना: 'संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा करना भाजपा की आदत'
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने 4 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में मीडिया से बातचीत करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला। एसआईआर (SIR) विवाद और 'फॉर्म-7' मामले की पृष्ठभूमि में उन्होंने भारतीय चुनाव आयोग (ECI) की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए। उनके साथ शिवसेना (UBT) नेता किशोरी पेडनेकर ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर लोकतंत्र और संविधान का अपमान करने का आरोप लगाया।
खड़गे का BJP और चुनाव आयोग पर सीधा हमला
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में कहा था कि हार के बाद जनादेश का अपमान करना कांग्रेस के 'डीएनए में है।' इसी बयान पर पलटवार करते हुए खड़गे ने कहा, 'संवैधानिक संस्थाओं का अपमान करना और उन पर कब्जा करना भाजपा की आदत बनती जा रही है।' उन्होंने सीधा सवाल पूछा कि 'मुख्य चुनाव आयुक्त को न्यायिक छूट की जरूरत क्यों है? शिवराज सिंह चौहान पहले इसका जवाब दें।'
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल चुनाव आयोग की स्वायत्तता और प्रक्रियागत पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
चुनाव सॉफ्टवेयर ऑडिट पर गंभीर आरोप
खड़गे ने चुनाव प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'हर कोई जानता है कि सॉफ्टवेयर कैसे बदला जा रहा है। सॉफ्टवेयर का कोई ऑडिट नहीं हो रहा है। अब, एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद चुनाव आयोग ने सॉफ्टवेयर को ऑडिट के लिए आईटीआई को सौंपने का फैसला किया है। इससे साफ पता चलता है कि भारत के चुनाव आयोग की मंशा ठीक नहीं थी।'
उन्होंने मध्य प्रदेश, हरियाणा, तमिलनाडु, बिहार और पश्चिम बंगाल के पूर्व चुनाव आयोग अधिकारियों के बयानों का भी हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयोग को 'सब कुछ साफ-साफ बताना चाहिए।'
'फॉर्म-7' विवाद और BJP प्रतिनिधिमंडल
कर्नाटक BJP के एक बड़े प्रतिनिधिमंडल ने डीजी-आईजीपी एम.ए. सलीम से मुलाकात कर मांग की कि पार्टी कार्यकर्ताओं के खिलाफ 'फॉर्म-7' आवेदनों से जुड़ी FIR दर्ज करने और उनकी समीक्षा का काम रोका जाए। इस पर खड़गे ने कड़ी प्रतिक्रिया दी।
उन्होंने कहा कि पहले से भरे हुए (प्री-प्रिंटेड) 'फॉर्म-7' बड़ी संख्या में जमा किए जा रहे हैं जिनमें नाम, पता और ईपीआईसी नंबर पहले से लिखे होते हैं। उन्होंने सवाल किया, 'जो लोग इन्हें जमा कर रहे हैं, वे बीएलए भी नहीं हैं और अगर कोई बीएलए है भी, तो वह 300-400 फॉर्म कैसे जमा कर सकता है?' खड़गे ने चेतावनी दी कि ऐसा करने वालों के खिलाफ 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' की धारा 31 के तहत मामला दर्ज किया जाएगा।
किशोरी पेडनेकर का मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोप
शिवसेना (UBT) नेता किशोरी पेडनेकर ने और भी सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा, 'मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के काम ने लोकतंत्र और बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान का अपमान किया है। उन्हें इसके नतीजे भुगतने होंगे!' यह बयान विपक्षी दलों की बढ़ती एकजुटता को रेखांकित करता है, जो चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर एक साथ सवाल उठा रहे हैं।
आगे क्या होगा
कर्नाटक में एसआईआर और 'फॉर्म-7' का विवाद अब राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर गर्म है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि संदिग्ध फॉर्म जमा करने वालों की जाँच जारी रहेगी। विपक्षी दलों के ये आरोप आगामी चुनावी प्रक्रिया पर बड़ा असर डाल सकते हैं, और चुनाव आयोग से पारदर्शिता की माँग और तेज हो सकती है।