1 नवंबर 2026
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मतदाता सूची में 13.2 करोड़ नाम हटाए गए: प्रियांक खड़गे का ज्ञानेश कुमार पर हमला, BJP पर 'आयोग की प्रवक्ता' होने का आरोप

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मतदाता सूची में 13.2 करोड़ नाम हटाए गए: प्रियांक खड़गे का ज्ञानेश कुमार पर हमला, BJP पर 'आयोग की प्रवक्ता' होने का आरोप

सारांश

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने कलबुर्गी में आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट से 13.2 करोड़ नाम हटाए गए — पात्र मतदाताओं का 15% — और BJP को चुनाव आयोग की 'आधिकारिक प्रवक्ता' करार दिया। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा, दो आयुक्तों ने खुद 14 बेसहमती वाले फैसलों की पुष्टि की।

मुख्य बातें

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने 1 नवंबर 2026 को कलबुर्गी में CEC ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की माँग की।
आरोप — वोटर लिस्ट से 13.2 करोड़ नाम हटाए गए, जो पात्र मतदाताओं का लगभग 15 प्रतिशत है।
खड़गे का सवाल: कानूनी प्रश्नों का जवाब BJP क्यों दे रही है; BJP को 'चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रवक्ता' कहा।
सर्वोच्च न्यायालय ने मामले का संज्ञान लिया है।
चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्तों ने पिछले 10 महीनों में 14 बेसहमती फैसलों की पुष्टि की।
अजय धर्म सिंह ने दिल्ली रामलीला मैदान रैली को 'SIR की असली मंशा जानने की लड़ाई' बताया।

कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने 1 नवंबर 2026 को कलबुर्गी में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि वोटर लिस्ट से 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं — जो कुल पात्र मतदाताओं का लगभग 15 प्रतिशत है — और अधिकांश मतदाताओं को इसकी जानकारी तक नहीं दी गई। वहीं, रायचूर से मंत्री डॉ. अजय धर्म सिंह ने भी आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त एसआईआर (SIR) प्रक्रिया में प्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं।

मुख्य आरोप और सवाल

प्रियांक खड़गे ने कहा कि चुनाव आयोग के सामने कानूनी दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण सवाल रखे गए हैं, लेकिन आयोग उनका जवाब देने से बच रहा है। उन्होंने तीखे सवाल उठाए — संसद की निगरानी के बिना फॉर्म-6 की प्रक्रिया बदलने की अनुमति किसने दी और फॉर्म-7 इतनी बड़ी संख्या में क्यों वितरित किए जा रहे हैं? उन्होंने यह भी पूछा कि जब कानूनी सवाल मुख्य चुनाव आयुक्त से पूछे जाते हैं, तो जवाब भारतीय जनता पार्टी (BJP) क्यों देती है।

खड़गे ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'क्या BJP चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रवक्ता बन गई है? ज्ञानेश कुमार कहाँ छिपे हुए हैं?' उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त को न्यायिक छूट की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।

सुप्रीम कोर्ट का संज्ञान और संवैधानिक गंभीरता

खड़गे ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि बनावटी जनादेश और कृत्रिम बहुमत के आधार पर सरकारें बनाई जा रही हैं, तो यह संविधान के विरुद्ध है और उनके शब्दों में 'देशद्रोह से कम नहीं है।' उन्होंने माँग की कि ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देकर कानून का सामना करना चाहिए।

इंडिया गठबंधन की दिल्ली रैली और SIR का विवाद

मंत्री डॉ. अजय धर्म सिंह ने कहा कि दिल्ली के रामलीला मैदान में इंडिया गठबंधन की रैली में केवल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) ही नहीं, बल्कि पूरे गठबंधन के नेता और देशभर के आम नागरिक बड़ी संख्या में जुटे हैं। उन्होंने कहा कि शहरों और गाँवों से लाखों लोग इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हो रहे हैं क्योंकि देश जानना चाहता है कि एसआईआर (SIR) के पीछे असली मंशा क्या है।

डॉ. धर्म सिंह ने आरोप लगाया कि यह स्पष्ट हो चुका है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस पूरे मामले में संलिप्त हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह उन्हें क्यों संरक्षण दे रहे हैं, जबकि ज्ञानेश कुमार किसी भी राजनीतिक दल से संबद्ध नहीं हैं।

दो आयुक्तों की असहमति का उल्लेख

डॉ. धर्म सिंह के अनुसार, चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्तों ने स्वयं स्पष्ट किया है कि पिछले 10 महीनों में 14 ऐसे फैसले लिए गए जिन पर कोई आम सहमति नहीं बनी और उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं दी गई। गौरतलब है कि यह आरोप चुनाव आयोग के आंतरिक कामकाज पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।

आगे क्या होगा

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब विपक्षी दल एसआईआर प्रक्रिया को लेकर लगातार आक्रामक रुख अपना रहे हैं और मामला सर्वोच्च न्यायालय में भी विचाराधीन बताया जा रहा है। दोनों मंत्रियों के ये आरोप आने वाले दिनों में संसदीय और न्यायिक दोनों मंचों पर केंद्र-विपक्ष टकराव को और तेज़ कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर राष्ट्रीय संकट बन सकता है। चुनाव आयोग के भीतर से ही असहमति के संकेत — दो आयुक्तों द्वारा 14 एकतरफा फैसलों की पुष्टि — इस विवाद को विपक्षी राजनीति की सीमा से बाहर ले जाते हैं। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इसे कांग्रेस बनाम BJP की जंग के रूप में प्रस्तुत करती है, लेकिन असली सवाल संस्थागत है — क्या चुनाव आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया सहमति-आधारित है या एकल-केंद्रित? सर्वोच्च न्यायालय का संज्ञान इस बहस को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से न्यायिक जाँच के स्तर पर ले जाने का अवसर है।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रियांक खड़गे ने चुनाव आयोग पर क्या आरोप लगाए?
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने आरोप लगाया कि वोटर लिस्ट से 13.2 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जो कुल पात्र मतदाताओं का लगभग 15 प्रतिशत है। उन्होंने यह भी कहा कि फॉर्म-6 और फॉर्म-7 की प्रक्रिया संसदीय निगरानी के बिना बदली गई।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार विवाद में क्यों घिरे हैं?
कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार SIR प्रक्रिया में प्रत्यक्ष रूप से शामिल हैं और कानूनी सवालों का जवाब देने की बजाय BJP के माध्यम से प्रतिक्रिया दे रहे हैं। प्रियांक खड़गे ने उनसे इस्तीफे और कानून का सामना करने की माँग की है।
SIR (Special Intensive Revision) क्या है और इसका विवाद क्यों है?
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण, मतदाता सूचियों को अद्यतन करने की एक प्रक्रिया है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के ज़रिये बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जिससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।
क्या सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में कोई कदम उठाया है?
प्रियांक खड़गे के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले का संज्ञान लिया है। हालाँकि, अदालती कार्यवाही के विस्तृत ब्यौरे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध स्रोतों से नहीं हो सकी है।
चुनाव आयोग के भीतर असहमति के क्या संकेत सामने आए हैं?
मंत्री डॉ. अजय धर्म सिंह के अनुसार, चुनाव आयोग के दो अन्य आयुक्तों ने खुद पुष्टि की है कि पिछले 10 महीनों में 14 ऐसे फैसले लिए गए जिन पर कोई आम सहमति नहीं बनी और उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं दी गई।
राष्ट्र प्रेस
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