श्रीलंकाई नौसेना ने रामेश्वरम के सात मछुआरों को हिरासत में लिया, 2026 में यह चौथी बड़ी गिरफ्तारी
सारांश
मुख्य बातें
श्रीलंकाई नौसेना ने 1 नवंबर 2026 को तड़के तमिलनाडु के रामेश्वरम और थंगाचीमडम के सात मछुआरों को हिरासत में ले लिया। तमिलनाडु मत्स्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन मछुआरों को कच्चातिवु द्वीप और उत्तरी मन्नार के बीच मछली पकड़ते वक्त पकड़ा गया और अवैध मत्स्याखेट के आरोप में उनकी नाव सहित श्रीलंका के एक नौसैनिक बंदरगाह पर ले जाया गया।
पकड़े गए मछुआरों की पहचान
अधिकारियों ने हिरासत में लिए गए मछुआरों की पहचान प्लासियस (41 वर्ष), अलगु पांडी (22 वर्ष), एंटनी पिचाई (33 वर्ष), राबिन (21 वर्ष), नेल्सन (58 वर्ष), अरुलानंदा जेवियर (65 वर्ष) और सहाय आनंद (34 वर्ष) के रूप में की है। ये सभी रामनाथपुरम जिले के मछुआरा समुदायों से ताल्लुक रखते हैं।
मत्स्य विभाग ने शनिवार, 31 अक्टूबर को मछली पकड़ने के लिए 398 टोकन जारी किए थे। इन सातों को रविवार शाम तक वापस लौटना था, लेकिन वे अपनी यात्रा पूरी नहीं कर सके।
मुख्य घटनाक्रम और पृष्ठभूमि
यह घटना इस वर्ष भारतीय मछुआरों की ऐसी चौथी बड़ी हिरासत है। इससे पहले 3 अक्टूबर को रामेश्वरम के नौ मछुआरों को गिरफ्तार किया गया था और उनकी मशीनीकृत नाव जब्त की गई थी। उस घटना के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने 5 अक्टूबर को विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की माँग की थी।
मुख्यमंत्री विजय ने अपने पत्र में श्रीलंका की हिरासत में बंद 20 मछुआरों की रिहाई और जब्त की गई 270 नावों को वापस दिलाने का आग्रह किया था। उन्होंने मत्स्य पालन से जुड़े द्विपक्षीय 'संयुक्त कार्य समूह' के ज़रिए बातचीत फिर से शुरू करने की भी अपील की थी।
इससे पहले जुलाई में रामेश्वरम के नौ और मछुआरों को मन्नार के उत्तर में पकड़ा गया था, उनकी नाव जब्त कर उन्हें मन्नार के एक नौसैनिक शिविर में रखा गया था। मार्च में भी रामेश्वरम के सात मछुआरों और उनकी दो नावों को अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (IMBL) पार करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था।
मछुआरा संगठनों की प्रतिक्रिया
मछुआरों के एक नेता ने कहा, 'हम तटीय जिले के सभी मछुआरा संगठनों की एक बैठक बुलाएँगे और आगे की रणनीति तय करेंगे।' संगठनों ने केंद्र व राज्य सरकार दोनों से इस दीर्घकालिक विवाद का स्थायी समाधान निकालने की माँग दोहराई है।
गौरतलब है कि कच्चातिवु द्वीप के आसपास का जलक्षेत्र दशकों से विवादित रहा है। भारतीय मछुआरे इस इलाके को परंपरागत मत्स्याखेट क्षेत्र मानते हैं, जबकि श्रीलंका इसे अपनी समुद्री सीमा का हिस्सा बताता है।
आम जनता और मछुआरों पर असर
रामनाथपुरम जिले के हज़ारों परिवारों की आजीविका समुद्री मत्स्याखेट पर निर्भर है। बार-बार होने वाली गिरफ्तारियाँ न केवल परिवारों को आर्थिक संकट में डालती हैं, बल्कि नावों की जब्ती से पूँजी का भी भारी नुकसान होता है। आंकड़ों के अनुसार, अकेले इस वर्ष श्रीलंका ने 270 से अधिक भारतीय नावें जब्त की हैं।
क्या होगा आगे
विदेश मंत्रालय की ओर से अभी तक इस ताज़ा घटना पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। मछुआरा संगठनों की प्रस्तावित बैठक में इस मसले पर अगला कदम तय किया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-श्रीलंका के बीच द्विपक्षीय 'संयुक्त कार्य समूह' की बैठक अभी तक नहीं हुई है और दोनों देशों के बीच मत्स्याखेट विवाद सुलझाने की कोई ठोस रूपरेखा सामने नहीं आई है।