1 नवंबर 2026
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श्रीलंकाई नौसेना ने रामेश्वरम के सात मछुआरों को हिरासत में लिया, 2026 में यह चौथी बड़ी गिरफ्तारी

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श्रीलंकाई नौसेना ने रामेश्वरम के सात मछुआरों को हिरासत में लिया, 2026 में यह चौथी बड़ी गिरफ्तारी

सारांश

श्रीलंकाई नौसेना ने एक बार फिर रामेश्वरम के सात मछुआरों को कच्चातिवु के पास हिरासत में लिया — 2026 में यह चौथी बड़ी गिरफ्तारी है। 270 नावें पहले से जब्त हैं, संयुक्त कार्य समूह की बैठक अधर में है, और तटीय परिवारों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है।

मुख्य बातें

श्रीलंकाई नौसेना ने 1 नवंबर 2026 को तड़के रामेश्वरम और थंगाचीमडम के सात मछुआरों को कच्चातिवु द्वीप के पास हिरासत में लिया।
पकड़े गए सभी मछुआरे रामनाथपुरम जिले से हैं; उनकी नाव भी जब्त कर श्रीलंका के नौसैनिक बंदरगाह ले जाई गई।
2026 में यह चौथी बड़ी हिरासत — इससे पहले मार्च, जुलाई और 3 अक्टूबर को भी मछुआरों को पकड़ा गया था।
मुख्यमंत्री विजय ने 5 अक्टूबर को विदेश मंत्री जयशंकर को पत्र लिखकर 20 मछुआरों की रिहाई और 270 जब्त नावें वापस दिलाने की माँग की थी।
मछुआरा संगठनों ने तटीय जिले के सभी संगठनों की आपात बैठक बुलाने की घोषणा की है।

श्रीलंकाई नौसेना ने 1 नवंबर 2026 को तड़के तमिलनाडु के रामेश्वरम और थंगाचीमडम के सात मछुआरों को हिरासत में ले लिया। तमिलनाडु मत्स्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन मछुआरों को कच्चातिवु द्वीप और उत्तरी मन्नार के बीच मछली पकड़ते वक्त पकड़ा गया और अवैध मत्स्याखेट के आरोप में उनकी नाव सहित श्रीलंका के एक नौसैनिक बंदरगाह पर ले जाया गया।

पकड़े गए मछुआरों की पहचान

अधिकारियों ने हिरासत में लिए गए मछुआरों की पहचान प्लासियस (41 वर्ष), अलगु पांडी (22 वर्ष), एंटनी पिचाई (33 वर्ष), राबिन (21 वर्ष), नेल्सन (58 वर्ष), अरुलानंदा जेवियर (65 वर्ष) और सहाय आनंद (34 वर्ष) के रूप में की है। ये सभी रामनाथपुरम जिले के मछुआरा समुदायों से ताल्लुक रखते हैं।

मत्स्य विभाग ने शनिवार, 31 अक्टूबर को मछली पकड़ने के लिए 398 टोकन जारी किए थे। इन सातों को रविवार शाम तक वापस लौटना था, लेकिन वे अपनी यात्रा पूरी नहीं कर सके।

मुख्य घटनाक्रम और पृष्ठभूमि

यह घटना इस वर्ष भारतीय मछुआरों की ऐसी चौथी बड़ी हिरासत है। इससे पहले 3 अक्टूबर को रामेश्वरम के नौ मछुआरों को गिरफ्तार किया गया था और उनकी मशीनीकृत नाव जब्त की गई थी। उस घटना के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने 5 अक्टूबर को विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की माँग की थी।

मुख्यमंत्री विजय ने अपने पत्र में श्रीलंका की हिरासत में बंद 20 मछुआरों की रिहाई और जब्त की गई 270 नावों को वापस दिलाने का आग्रह किया था। उन्होंने मत्स्य पालन से जुड़े द्विपक्षीय 'संयुक्त कार्य समूह' के ज़रिए बातचीत फिर से शुरू करने की भी अपील की थी।

इससे पहले जुलाई में रामेश्वरम के नौ और मछुआरों को मन्नार के उत्तर में पकड़ा गया था, उनकी नाव जब्त कर उन्हें मन्नार के एक नौसैनिक शिविर में रखा गया था। मार्च में भी रामेश्वरम के सात मछुआरों और उनकी दो नावों को अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (IMBL) पार करने के आरोप में हिरासत में लिया गया था।

मछुआरा संगठनों की प्रतिक्रिया

मछुआरों के एक नेता ने कहा, 'हम तटीय जिले के सभी मछुआरा संगठनों की एक बैठक बुलाएँगे और आगे की रणनीति तय करेंगे।' संगठनों ने केंद्र व राज्य सरकार दोनों से इस दीर्घकालिक विवाद का स्थायी समाधान निकालने की माँग दोहराई है।

गौरतलब है कि कच्चातिवु द्वीप के आसपास का जलक्षेत्र दशकों से विवादित रहा है। भारतीय मछुआरे इस इलाके को परंपरागत मत्स्याखेट क्षेत्र मानते हैं, जबकि श्रीलंका इसे अपनी समुद्री सीमा का हिस्सा बताता है।

आम जनता और मछुआरों पर असर

रामनाथपुरम जिले के हज़ारों परिवारों की आजीविका समुद्री मत्स्याखेट पर निर्भर है। बार-बार होने वाली गिरफ्तारियाँ न केवल परिवारों को आर्थिक संकट में डालती हैं, बल्कि नावों की जब्ती से पूँजी का भी भारी नुकसान होता है। आंकड़ों के अनुसार, अकेले इस वर्ष श्रीलंका ने 270 से अधिक भारतीय नावें जब्त की हैं।

क्या होगा आगे

विदेश मंत्रालय की ओर से अभी तक इस ताज़ा घटना पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। मछुआरा संगठनों की प्रस्तावित बैठक में इस मसले पर अगला कदम तय किया जाएगा। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-श्रीलंका के बीच द्विपक्षीय 'संयुक्त कार्य समूह' की बैठक अभी तक नहीं हुई है और दोनों देशों के बीच मत्स्याखेट विवाद सुलझाने की कोई ठोस रूपरेखा सामने नहीं आई है।

संपादकीय दृष्टिकोण

270 से अधिक जब्त नावें और संयुक्त कार्य समूह की बैठक का अभाव — यह सब बताता है कि भारत-श्रीलंका के बीच मत्स्याखेट विवाद पर कोई ठोस कूटनीतिक प्रगति नहीं हुई है। मुख्यमंत्री विजय का पत्र और जयशंकर से अपील अब तक कोई दृश्यमान परिणाम नहीं दे सकी है — यह तटीय समुदायों के लिए जवाबदेही का सवाल है, सिर्फ नीतिगत विफलता नहीं।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

श्रीलंकाई नौसेना ने रामेश्वरम के मछुआरों को क्यों पकड़ा?
मत्स्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इन सात मछुआरों को कच्चातिवु द्वीप और उत्तरी मन्नार के बीच मछली पकड़ते वक्त अवैध मत्स्याखेट के आरोप में हिरासत में लिया गया। श्रीलंका इस जलक्षेत्र को अपनी समुद्री सीमा में मानता है।
2026 में कितनी बार भारतीय मछुआरों को श्रीलंका ने पकड़ा है?
1 नवंबर 2026 की यह घटना इस वर्ष की चौथी बड़ी हिरासत है। इससे पहले मार्च में सात, जुलाई में नौ और 3 अक्टूबर को नौ मछुआरों को पकड़ा गया था। अब तक 270 से अधिक नावें भी जब्त की जा चुकी हैं।
तमिलनाडु सरकार ने इस विवाद पर केंद्र से क्या माँग की है?
मुख्यमंत्री विजय ने 5 अक्टूबर को विदेश मंत्री एस. जयशंकर को पत्र लिखकर श्रीलंका की हिरासत में बंद 20 मछुआरों की रिहाई, 270 जब्त नावों की वापसी और द्विपक्षीय 'संयुक्त कार्य समूह' की बैठक फिर से शुरू करने का आग्रह किया था।
कच्चातिवु द्वीप विवाद क्या है?
कच्चातिवु एक छोटा निर्जन द्वीप है जिसे 1974 में भारत ने श्रीलंका को सौंप दिया था। इसके आसपास का जलक्षेत्र भारतीय मछुआरों का परंपरागत मत्स्याखेट क्षेत्र रहा है, लेकिन श्रीलंका इसे अपनी समुद्री सीमा का हिस्सा मानता है, जिससे बार-बार टकराव होता है।
पकड़े गए मछुआरों को कब रिहा किया जाएगा?
अभी तक उनकी रिहाई की कोई आधिकारिक तारीख सामने नहीं आई है। मछुआरा संगठन आपात बैठक बुलाकर आगे की रणनीति तय करने की बात कह रहे हैं, जबकि विदेश मंत्रालय की ओर से इस घटना पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
राष्ट्र प्रेस
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